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आचार्य ऋषभचंद्र सूरीश्वर का देवलोक गमन:इंदौर में ली अंतिम सांस; मोहनखेड़ा में अंतिम संस्कार कल सुबह 6 बजे

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मोहनखेड़ा/धार

धार जिले के मोहनखेड़ा महातीर्थ के ज्योतिषाचार्य, वर्तमान गच्छाधिपति आचार्य भगवंत ऋषभचंद्र सूरीश्वरजी का बुधवार देर रात 1.44 बजे इंदौर के अरबिंदो हॉस्पिटल में देवलोक गमन हो गया। उनकी पार्थिव देह को मोहनखेड़ा ले जाया गया। मोहनखेड़ा तीर्थ से जारी पत्र के अनुसार, आचार्यश्री ऋषभचंद्र सूरीश्वरजी का शुक्रवार को ही जन्मदिन है। अब शुक्रवार को ही सुबह 6 बजे आचार्यश्री का अंतिम संस्कार किया जाएगा। अंतिम संस्कार को लेकर दो बार निर्णय बदला गया है। अंतिम संस्कार में कोई भी चढ़ावे की प्रक्रिया नहीं होगी। ट्रस्ट ने अनुयायियों से अपील की है कि वो जहां हैं, वहीं से आचार्यश्री को श्रद्धासुमन अर्पित करेंगे। अंतिम दर्शन और संस्कार ऑनलाइन किया जाएगा।

पहले श्री आदिनाथ राजेंद्र जैन श्वेतांबर ट्रस्ट की तरफ से शुक्रवार को दोपहर 12 बजकर 39 मिनट पर विजय मुहूर्त में तीर्थ भूमि पर अग्नि संस्कार के विधि-विधान संपन्न कराने की बात कही थी। इधर प्रशासन ने मोहनखेड़ा महातीर्थ पहुंचकर आज गुरुवार शाम 5 बजे अंतिम संस्कार के लिए कहा। कोविड गाइडलाइन को ध्यान में रखकर अंतिम संस्कार कराने की तैयारी है। लेकिन भक्त शुक्रवार को अंतिम संस्कार की बात पर अड़े थे। दोनों पक्षों में बात चली। मामला भोपाल स्तर तक पहुंच गया है। बाद में ट्रस्ट ने गुरुवार शाम 5 बजे अंतिम संस्कार की बात मान ली। फिर ट्रस्ट ने पत्र जारी करके शुक्रवार सुबह 6 बजे अंतिम संस्कार की बात कही है।

पाट पर किया गया स्थापित, आनलाइन चढ़ावे होने की संभावना
श्री आदिनाथ राजेंद्र जैन ट्रस्ट मोहन खेड़ा मैनेजिंग ट्रस्टी सुजान मल जैन ने बताया कि तीर्थ पर उन्हें पाट पर स्थापित कर दिया गया है। संपूर्ण परिसर गुरु देव अमर रहे के जय घोष से गुंजायमान हो रहा है। आचार्य श्री का शिष्य परिवार भी मोहनखेड़ा पहुंच चुका है। अंतिम संस्कार के चढ़ावे आनलाइन होने की संभावना है। त्रिस्तुतिक जैन श्री संघ के राष्ट्रीय अध्यक्ष चंपालाल वर्धन भी मोहनखेड़ा पहुंच रहे हैं।

सीएम ने ट्वीट से जताया दुःख।

सीएम ने ट्वीट से जताया दुःख।

ट्रस्ट ने अंतिम संस्कार के लिए जारी किया दूसरा पत्र

ट्रस्ट का पहला पत्र

जानिए आचार्य ऋषभचंद्रजी को:नरेंद्र मोदी, सोनिया गांधी और मोहन भागवत आ चुके हैं आशीर्वाद लेने; 3 दिन में बनवा दिया था 300 बेड का कोविड सेंटर

मोहनखेड़ा तीर्थ में संत आचार्यश्री ऋषभचन्द्र सूरीश्वरजी से प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, आरएसएस प्रमुख मोहन भागवत, राष्ट्रीय कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी से लेकर फिल्म और उद्योग जगत की हस्तियां आशीर्वाद लेने आती थीं। संत आचार्य श्री ऋषभचन्द्र सूरीश्वर जी जीवन भर मानव सेवा का पर्याय रहे। कोरोना का कहर देखा तो उन्होंने महज 3 दिन में यहां 300 बेड का अस्पताल बनवा दिया। कोरोना को लेकर उन्होंने भविष्यवाणी की थी कि 23 मई के बाद इसका असर कम होगा। साथ ही यह भी चेताया था कि अभी कुछ साल हम सभी को सजग होकर रहना होगा।

मोहनखेड़ा तीर्थ पर कई राजनीतिक, फिल्मी और उद्योग जगत की हस्तियां भी आशीर्वाद लेने आती रही हैं। मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री शिवराजसिंह चौहान, कांग्रेस नेता ज्योतिरादित्य सिंधिया, उद्योगपति गौतम अडाणी, अभिनेत्री हेमा मालिनी, अभिनेता सनी देओल, मशहूर गायक दलेर मेहंदी सहित कई फिल्मी हस्तियां भी मोहनखेड़ा आचार्यश्री का आशीर्वाद लेने आ चुके हैं।

मोहनखेड़ा को जैन तीर्थ के साथ पूरे समाज को जोड़ा
आचार्यश्री सूरीश्वर जी के मन में युवावस्था से जनसेवा का अनूठा जज्बा था। वे मोहनखेड़ा को जैन तीर्थ के साथ समग्र समाज को जोड़ना चाहते थे। अपने इस अभियान में वे बहुत कुछ सफल भी हुए।सभी समाज के लिए उन्होंने 1984 में मानव सेवा चिकित्सालय की स्थापना की जो आज संपूर्ण क्षेत्र में सेवा का पर्याय बन चुका है। उनके सानिध्य में सैकड़ों नेत्र शिविर, चिकित्सा शिविर, विकलांगों के लिए शिविर, उनके उपकरण, अपाहिजों को ट्राइसिकल, महिलाओं को हर वर्ष जन्मदिन पर सैकड़ों सिलाई मशीनें, गरीबों को अनाज, कटे फटे होठों के निशुल्क ऑपरेशन शिविरों का आयोजन किया गया। तीन दिन में 300 बेड के करोना कोविड सेंटर का इंतजाम, समाज जनों के आर्थिक विकास के लिए बैंकों की स्थापना आदि कई कार्य किए।

सटीक भविष्यवाणी भी करते रहे
भविष्यवाणी को लेकर भी उनका आकलन सटीक बैठता था। कोरोना और उज्जैन सिंहस्थ में आंधी तूफान की घटनाओं को लेकर उन्होंने भविष्यवाणियां की थी जो सटीक बैठी थीं। आचार्य ऋषभचंद्र सूरीश्वरजी ने कोरोना को लेकर भविष्यवाणी की थी। उन्होंने कहा था कि यदि 30 अप्रैल से 15 मई के बीच आंधी, तूफान, ओलावृष्टि और बारिश होती है तो विश्वव्यापी कोरोना वायरस की बीमारी खत्म होने की दिशा में तेजी से आगे बढ़ेगी। उन्होंने कहा था कि 31 जुलाई के बाद मौत के आंकड़ों में 90 प्रतिशत तक की गिरावट आएगी। इसके अलावा विश्व के अनेक देशों में भूकंप, समुद्री तूफान सुनामी आदि से जनता को कष्ट सहन करना होंगे। आचार्यश्री ने कहा कि 2300 वर्ष पूर्व उज्जैन में लिखी गई भद्रबाहु संहिता जैनाचार्य के अनुसार यह महामारी आगामी तीन वर्ष तक शरद व ग्रीष्म ऋतु में जनमानस को पीड़ित कर सकती है। इस महामारी से सावधानी व सुरक्षा के नियमों का पालन करते हुए बचा जा सकता है।

मोहनकुमार से आचार्यश्री बनने की कहानी: बाल्यकाल में हो गए थे पिता स्वर्गवासी, मां ने भी लिया था संन्यास
गच्छाधिपति आचार्य देवेश श्रीमद्विजय ऋषभचंद सूरीश्वर की पहचान एक श्रेष्ठ धर्माचार्य के साथ ही कुशल संगठक, अच्छे लेखक, उपदेशक, ज्योतिष विज्ञान व मंत्रशास्त्र तथा हिंदी प्राकृत संस्कृत के अध्येता के रूप में है। आचार्यश्री का जन्म सं . 2014 के ज्येष्ठ सुदि सप्तमी अर्थात 4 जून 1957 को सियाणा में हुआ था। पिता मगराजसिंह अपने दो पुत्रों और एक पुत्री को बाल्याकाल में छोड़कर स्वर्गवासी हो गए। माता रत्नावती ने अपनी संतान को श्रेष्ठ धार्मिक संस्कार दिए। साध्वी दीक्षा ग्रहण की व आगे चलकर साध्वी श्री पीयूषलताश्रीजी म.सा. कहलाईं। बड़े भाई नथमलजी ने भी दीक्षा ग्रहण की व आगे चलकर आचार्यश्री श्री रवींद्र सूरिश्वरजी के रूप में विख्यात हुए। वर्तमानाचार्य को गृहस्थ जीवन में मोहनकुमार नाम मिला था।

आचार्यश्री विद्याचंद सूरीजी म.सा. से जब विक्रम संवत 2037 की ज्येष्ठ सुदी 10 दिनांक 23 जून 1980 को श्री मोहनखेड़ा मे दीक्षा ली तो मुनि ऋषभचंदविजयजी नामकरण हुआ। कालांतर में वि.स. 2074 की वैशाख शुक्ल 12 अर्थात 2017 को श्री मोहनखेड़ा तीर्थ मे आयोजित कार्यक्रम मे आचार्यश्री की पदवी प्रदान की गई। इसके बाद श्रीमद्विजयऋषभचंद सूरीश्वरजी कहलाए। मुनि व आचार्यश्री के रूप में उनके वरदहस्थों से धर्म प्रभावना के अनेक कार्य तथा यथा अनेक मुमुक्षुओं को दीक्षा, तीर्थंकर व गुरु मंदिरों की प्रतिष्ठा तथा तीर्थ निर्माण व जीर्णोध्दार, 6 विपालित संघों को निश्रा, प्रवचन आदि हुए। आचार्यश्री ने अनेक पुस्तकों का लेखन व संपादन किया है, जिनके धर्मोपदेश, उपन्यास, कहानियां शामिल हैं।

मोहनखेड़ा को जैन तीर्थ के साथ पूरे समाज को जोड़ा
आचार्यश्री सूरीश्वर जी के मन में युवावस्था से जनसेवा का अनूठा जज्बा था। वे मोहनखेड़ा को जैन तीर्थ के साथ समग्र समाज को जोड़ना चाहते थे। अपने इस अभियान में वे बहुत कुछ सफल भी हुए।सभी समाज के लिए उन्होंने 1984 में मानव सेवा चिकित्सालय की स्थापना की जो आज संपूर्ण क्षेत्र में सेवा का पर्याय बन चुका है। उनके सानिध्य में सैकड़ों नेत्र शिविर, चिकित्सा शिविर, विकलांगों के लिए शिविर, उनके उपकरण, अपाहिजों को ट्राइसिकल, महिलाओं को हर वर्ष जन्मदिन पर सैकड़ों सिलाई मशीनें, गरीबों को अनाज, कटे फटे होठों के निशुल्क ऑपरेशन शिविरों का आयोजन किया गया। तीन दिन में 300 बेड के करोना कोविड सेंटर का इंतजाम, समाज जनों के आर्थिक विकास के लिए बैंकों की स्थापना आदि कई कार्य किए।

खेड़ा से हो गया मोहनखेड़ा
मोहनखेड़ा चतीर्थ स्थल का नाम पहले खेड़ा हुआ करता था। यहां आसपास जंगल था। राजेन्द्र सूरीश्वरजी ने मोहनखेड़ा में आदिनाथ भगवान के मंदिर का निर्माण करवाया था। जैन समाज के 68वें गुरुदेवेश श्री राजेन्द्र सूरीश्वरजी म.सा. जावरा से विहार करते हुए राजगढ़ पहुंचे थे। राजगढ़ में 21 दिसंबर 1906 को पोष सुदी सप्तमी के दिन राजेन्द्र सूरीश्वरजी ने अंतिम सांस ली थी। जिसके बाद समाजनों ने मोहनखेड़ा में उनका अंतिम संस्कार कर समाधि मंदिर की स्थापना की। समाजजनों ने तीर्थ का समय-समय पर विकास किया। मोहनखेड़ा तीर्थ पर स्वर्ण मंदिर का निर्माण हो चुका है।

Ramswaroop Mantri

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