अग्नि आलोक
script async src="https://pagead2.googlesyndication.com/pagead/js/adsbygoogle.js?client=ca-pub-1446391598414083" crossorigin="anonymous">

अधर्म का नाश हो* (पार्ट-9)

Share

संजय कनौजिया की कलम”✍️

डॉ० राममनोहर लोहिया आगे लिखते हैं, कि हिन्दुस्तान की किवदंतियों ने सदियों से लोगों के दिमाग पर निरंतर असर डाला है..इतिहास के बड़े लोगों के बारे में, चाहे वे बुद्ध हों या अशोक, देश के चौथाई से अधिक लोग अनभिज्ञ हैं..दस में एक को उनके काम के बारे में थोड़ी-बहुत जानकारी होगी और सौ में एक या हज़ार में एक उनके कर्म और विचार के बारे कुछ विस्तार से जानता हो तो अचरज की बात होगी..देश के तीन सबसे पौराणिक नाम- “राम, कृष्ण और शिव” सबको मालूम हैं..उनके काम के बारे में थोड़ी बहुत जानकारी प्राय: सभी को, कम से कम दो में से एक को होगी ही, उनके विचार व कर्म या उन्होंने कौन से शब्द कब कहे, उसे विस्तारपूर्वक दस में से एक जानता होगा..भारतीय आत्मा के लिए बेशक और कम से कम अब तक के भारतीय इतिहास की आत्मा के लिए और देश के सांस्कृतिक इतिहास के लिए, यह अपेक्षाकृत निरर्थक बात है की भारतीय पुराण के ये महान लोग धरती पर पैदा हुए भी थे कि नहीं..!
राम और कृष्ण शायद इतिहास के व्यक्ति थे और शिव भी गंगा की धारा के लिए रास्ता बनाने वाले इंजीनियर रहे हों और साथ-साथ एक अदित्य प्रेमी भी..इनको इतिहास के परदे पर उतारने की कोशिश करना, और ऐसी कोशिश होती भी है, एक हास्यपद चीज़ होगी..संभावनाओं की साधारण कसौटी पर इनकी जीवन कहानी को कसना उचित नहीं..सत्य का इससे अधिक आभास किया मिल सकता है कि पचास या शायद सौ शताब्दियों से भारत की हर पीढ़ी के दिमाग पर इनकी कहानी लिखी हुई है..इनकी कहानियां लगातार दुहराई गई हैं..बड़े कवियों ने अपनी प्रतिभा से इनका परिष्कार किया है और निखारा है तथा लाखों करोड़ों लोगो के सुख और दुःख इनमे घुले हुए हैं..!
राम, कृष्ण और शिव भारत की उदासी और साथ-साथ रंगीन सपने हैं..उनकी कहानियों में एकसूत्रता ढूंढना या उनके जीवन में अटूट नैतिकता का ताना-बाना बुनना या असंभव व गलत लगने वाली चीज़े अलग करना उनके जीवन का सब कुछ नष्ट करने जैसा होगा केवल तर्क बचेगा..हमें मान लेना चाहिए राम, कृष्ण और शिव कभी पैदा नहीं हुए, कम से कम उस रूप में, जिसमे कहा जाता है..उनकी किवदंतियां गलत और असंभव है..उनकी शृंखला भी कुछ मामलों में बिखरी हुई हैं जिसके फलस्वरूप कोई तार्किक अर्थ नहीं निकाला जा सकता, लेकिन यह स्वीकारोक्ति बिल्कुल अनावश्यक है..भारतीय आत्मा के इतिहास के लिए ये तीन नाम सबसे सच्चे हैं और पूरे कारवां में महानतम हैं..इतने ऊँचे और इतने अपूर्व हैं कि दूसरों के मुक़ाबले में गलत और असंभव दिखते हैं..जैसे पत्थरों और धातुओं पर इतिहास लिखा मिलता है वैसे ही इनकी कहानियां लोगों के दिमाग में अंकित है जो मिटाई नहीं जा सकती..!
भारत की पहाड़ियों में देवी-देवताओं का निवास माना जाता है जिन्होंने कभी-कभी मनुष्य रूप में धरती पर आकर बड़ी नदियों के साँपों को मारा है या पालतू बनाया है और भक्त गिलहरियों ने समुन्द्र बाँधा है..रेगिस्तान इलाकों के देवी-विश्वास यहूदी, ईसाई, और इस्लाम से हर देवता मिट चुके हैं, सिवा एक के, जो ऊपर और पहुँच के बाहर हैं, तथा उनके पहाड़, मैदान और नदियां किवदंतियों से शून्य हैं..केवल पढ़े-लिखे लोग या पुरानी गाथाओं की जानकारी रखने वाले लोग “माउंट-ओलिपंस” के देवताओं के बारे में जानते हैं..भारत में जंगलों पर अटूट विशवास और चन्द्रमा का..जड़ी-बूटी, पहाड़, जल और जमीन के साथ हमेशा चलने वाला खिलवाड़, देवताओं और उनके मानवीय रूपों को सजीव रखता है व निखार लाता है..!
किवदंतियां असंख्य चमत्कारी कहानियों से भरे प्राय: अनंत उपन्यास की तरह है..इनसे अगर सीख मिलती है तो केवल अपरोक्ष रूप से..ये सूरज, पहाड़ या फल-फूल जैसी हैं और हमारे जीवन का प्रमुख अंश है..आम और सतालू हमारे शरीर-तंतु बनाते हैं..वे हमारे रक्त और मांस में घुली-मिली होती हैं..इन किवदंतियों को महान लोगों के जीवन के पवित्र नमूने के रूप में देखना एक हास्यपद मूर्खता होगी..लोग अगर इनको अपने आचार-विचार के नमूने के रूप में देखेंगे तो राम, कृष्ण और शिव की प्रतिष्ठा को नीचे गिराएंगे..किवदंतियां एक तरह से महाकाव्य और कथा, कहानी और उपन्यास, नाटक और कविता की मिली जुली उपज है..किवदंतियों में अपरिमित शक्ति है और वह अपनी कौम के दिमाग का अंश बन जाती है लेकिन इसमें सड़ा देने की क्षमता भी होती है….

धारावाहिक लेख जारी है
(लेखक- राजनीतिक व सामाजिक चिंतक है)

Ramswaroop Mantri

Recent posts

script async src="https://pagead2.googlesyndication.com/pagead/js/adsbygoogle.js?client=ca-pub-1446391598414083" crossorigin="anonymous">

प्रमुख खबरें

चर्चित खबरें