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30 साल बाद भाजपा में पीढ़ी परिवर्तन….चौथी पीढ़ी के हवाले मप्र

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मप्र  भाजपा और राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के लिए वह प्रयोगशाला है, जहां वह अपने नए-नए फॉर्मूले का परीक्षण करते हैं। फिर उसकी सफलता के बाद उसे देशभर में लागू किया जाता है। मप्र से परीक्षण के बाद निकले फॉर्मूले को आधार बनाकर भाजपा ने न केवल केंद्र में बल्कि वर्तमान समय में 17 राज्यों में अपनी सरकार स्थापित की है। अब एक बार फिर भाजपा ने मप्र में पीढ़ी परिवर्तन के फॉर्मूले का परीक्षण शुरू किया है और इसके तहत 4जी (फॉर्थ जनरेशन) यानी चौथी पीढ़ी (टीम वीडी) के हवाले संगठन को सौंप दिया है। भाजपा का यह प्रयोग मिशन 2023 और 2024 के लिए है।

भोपाल (डीएनएन)। करीब 2 साल पहले आरएसएस और भाजपा ने चौथी पीढ़ी को संगठन की कसौटी पर कसने का फॉर्मूला बनाया था। जिसका परीक्षण करने के लिए 15 फरवरी 2020 को चौथी पीढ़ी के सबसे सक्रिय नेता वीडी शर्मा को मप्र भाजपा की कमान सौंपी गई। वीडी पार्टी के लिए भाग्यशाली साबित हुए और करीब सवा माह बाद ही भाजपा की पुन: सत्ता में वापसी हो गई। उसके बाद वीडी ने सत्ता और संगठन के बीच सामंजस्य का जो प्रदर्शन किया है, उससे प्रभावित होकर संघ और भाजपा ने पीढ़ी परिवर्तन का निर्णय लिया और चौथी पीढ़ी के हवाले मप्र को कर दिया। यानी मप्र भाजपा में चौथी पीढ़ी के नेताओं को प्रतिनिधित्व सौंपा गया।
गौरतलब है कि 15 साल के बाद दिसंबर 2018 में भाजपा के हाथ से सत्ता निकली तो संघ और भाजपा में चिंता की लहर दौड़ पड़ी। इसकी सबसे बड़ी वजह यह रही कि मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान के नेतृत्व में विकास की गंगा बहाने के बाद भी विधानसभा चुनाव में हार का सामना करना पड़ा था। उसके बाद संघ और भाजपा ने महसूस किया कि अकेला चना (शिवराज सिंह चौहान) भाड़ नहीं फोड़ सकता। इसलिए चौथी पीढ़ी को आगे लाने की रणनीति पर काम शुरू हुआ और वीडी को मप्र भाजपा का अध्यक्ष बनाया गया। उसके बाद से ही वीडी पर संगठन के गठन का दबाव पडऩे लगा लेकिन काफी सोच-विचार के बाद संघ और भाजपा के केंद्रीय नेतृत्व ने प्रदेश अध्यक्ष को चौथी पीढ़ी को अपनी टीम में शामिल करने की हरी झंडी दी। दरअसल, इसके पीछे संघ और भाजपा का फोकस विधानसभा चुनाव 2023 और लोकसभा चुनाव 2024 पर है।
30 साल बाद पार्टी में पीढ़ी परिवर्तन: दिग्गज नेताओं से भरी भाजपा में दूसरी और तीसरी पंक्ति के नेताओं की सक्रियता के बाद भी चौथी पीढ़ी को संगठन में महत्वपूर्ण जिम्मेदारी सौंपना कोई आसान कदम नहीं था। लेकिन कैडर बेस भाजपा में कोई भी परिवर्तन परीक्षण और मंथन के बाद ही होता है। वीडी शर्मा ने अपनी कार्यकारिणी में जिन सदस्यों को शामिल किया है, उस पर संघ और भाजपा में काफी मंथन हुआ है। दरअसल, विधानसभा चुनाव 2018 में भाजपा को मिली हार के बाद संघ ने अपने स्वयंसेवकों से हार के कारणों की पड़ताल करवाई तो यह तथ्य सामने आया था कि तीसरी पीढ़ी के नेताओं के कारण पार्टी में चौथी पीढ़ी पर ग्रहण छाया हुआ है। अगर यही स्थिति रही तो आने वाले समय में भाजपा की स्थिति और कमजोर हो सकता है। इसलिए संघ ने चौथी पीढ़ी के नेताओं को संगठन में महत्वपूर्ण जिम्मेदारी देने की सलाह दी थी। वीडी शर्मा को इसी के तहत प्रदेश अध्यक्ष बनाया गया था। 13 जनवरी को वीडी ने मप्र भाजपा की नई कार्यकारिणी की घोषणा की, तो उससे 30 साल बाद पार्टी में पीढ़ी परिवर्तन की झलक दिखाई दी। इससे पहले स्व. सुंंदरलाल पटवा भाजपा में नई पीढ़ी को लाए थे, जो अब तक सत्ता-संगठन में शीर्ष पदों पर हैं या थे। अब कार्यकारिणी में ज्यादातर नए चेहरों को जगह दी गई है

फीडबैक के आधार पर टीम गठित
जानकारी के अनुसार 2 साल पहले संघ ने अपने स्वयंसेवकों से मिले फीडबैक के बाद भाजपा को जो रिपोर्ट सौंपी थी, उसके आधार पर ही मप्र भाजपा की प्रदेश कार्यकारिणी को आकार दिया गया है। सूत्रों का कहना है कि स्वयंसेवकों द्वारा तैयार रिपोर्ट में कहा गया था कि विधानसभा चुनाव 2018 में कांग्रेस ने अधिकतर युवाओं को टिकट दिया था। इस कारण कांग्रेस ने भाजपा से अधिक सीटें जीती थीं। इस रिपोर्ट के बाद से ही संघ और भाजपा में इस बात पर मंथन शुरू हो गया था कि पार्टी में अब चौथी पीढ़ी को आगे लाया जाए। भविष्य को देखते हुए सोची-समझी रणनीति के तहत भाजपा संगठन ने चौथी पीढ़ी के नेताओं को मुख्यधारा में लाने का कदम उठाया है। वीडी शर्मा ने लगभग 11 महीने बाद अपनी टीम बनाई है। जिसमें भौगोलिक, जातिगत, गुटीय संतुलन पर भी खास ध्यान दिया गया है। संगठन के पुराने पदाधिकारियों में सिर्फ जीतू जिराती और पंकज जोशी की ही वापसी हुई है। महिला मोर्चे की प्रदेशाध्यक्ष रहीं सीमा सिंह की दस साल बाद संगठन में वापसी हुई है। अब तक पदाधिकारी रहे रजनीश अग्रवाल और राहुल कोठारी को पदोन्नत कर प्रदेश मंत्री बनाया है। वहीं, लोकेंद्र पाराशर को एक बार फिर प्रदेश मीडिया प्रभारी की बागडोर सौंपी गई है। पाराशर ऐसे पहले मीडिया प्रभारी हैं जिन पर पूर्व प्रदेशाध्यक्ष नंदकुमार सिंह चौहान और राकेश सिंह के बाद तीसरे प्रदेशाध्यक्ष वीडी शर्मा ने भी भरोसा जताया है।

शिवराज सिंह चौहान प्रफुल्लित
मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान मप्र भाजपा की टीम का स्वरूप देखकर इस कदर प्रफुल्लित हैं कि पदाधिकारियों के पदभार ग्रहण कार्यक्रम में उन्होंने यहां तक कह डाला कि भाजपा की टीम जोश और उमंग से भरी है लेकिन कमलनाथ-दिग्गी की टीम घिसी-पीटी है। गौरतलब है कि वीडी शर्मा ने अपनी कार्यकारिणी में कई ऐसे नेताओं को महत्वपूर्ण जिम्मेदारी दी है, जो इससे पूर्व कभी अधिक चर्चा में नहीं थे। बैतूल के वैभव पंवार को युवा मोर्चा का अध्यक्ष बनाया गया है। इनके अलावा किसान मोर्चा-दर्शन सिंह चौधरी, महिला मोर्चा-माया नारोलिया, पिछड़ा वर्ग मोर्चा-भगत सिंह कुशवाह, अनुसूचित जाति मोर्चा- डॉ. कैलाश जाटव, अनुसूचित जनजाति मोर्चा-कल सिंह भाबर और अल्पसंख्यक मोर्चा-रफत वारसी को प्रदेशाध्यक्ष बनाया है। वहीं प्रदेश उपाध्यक्ष में अनुभवी चेहरों को महत्व दिया गया है। संध्या राय (सांसद) भिंड, मुकेश चौधरी भिंड, कांतदेव सिंह सिंगरौली, योगेश ताम्रकार सतना, सुमित्रा वाल्मिक जबलपुर, आलोक शर्मा भोपाल, सीमा सिंह भोपाल, जीतू जिराती इंदौर, गजेंद्र पटेल (सांसद) बड़वानी, बहादुर सिंह सोंधिया (विधायक) उज्जैन, चिंतामणि मालवीय उज्जैन, पंकज जोशी शाजापुर को प्रदेश उपाध्यक्ष बनाया गया है। उधर, जिन नेताओं को प्रदेश मंत्री बनाया गया है, उनमें मदन कुशवाहा ग्वालियर, ललिता यादव छतरपुर, रजनीश अग्रवाल सागर, लता वानखेड़े सागर, प्रभुदयाल कुशवाह सागर, राजेश पाण्डेय रीवा, मनीषा सिंह (विधायक) शहडोल, आशीष दुबे जबलपुर, नंदिनी मरावी (विधायक) जबलपुर ग्रामीण, राहुल कोठारी भोपाल, संगीता सोनी झाबुआ और जयदीप पटेल धार का नाम शामिल है। इनके अलावा जबलपुर के अखिलेश जैन को प्रदेश कोषाध्यक्ष, उज्जैन के अनिल जैन कालूखेड़ा को प्रदेश सह कोषाध्यक्ष, भोपाल के राघवेंद्र शर्मा को प्रदेश कार्यालय मंत्री बनाया गया है।

4जी के जमाने में 3जी की धाक
संघ के एक पदाधिकारी का कहना है कि राजनीति का यह दौर 4जी यानी चौथी पीढ़ी का है, लेकिन भाजपा में अभी भी 3जी यानी तीसरी पीढ़ी की धाक है। ऐसे में चौथी पीढ़ी को आगे लाना बड़ा कदम है। वह कहते हैं कि वैसे तो भाजपा की तीसरी पीढ़ी के नेताओं में पहली और दूसरी पीढ़ी के नेताओं की तरह भविष्य की राजनीति के मद्देनजर युवा पीढ़ी को तवज्जो देने का भाव नहीं है। भाजपा की पहली और दूसरी पीढ़ी के नेताओं ने हमेशा अपनी अगली पीढ़ी को अपने साथ रखकर उन्हें आगे बढ़ाया है। लेकिन तीसरी पीढ़ी में यह देखने को नहीं मिल रहा है। वे यह भी स्वीकार करते हैं कि देश की राजनीति में भाजपा आज जिस मुकाम पर है उसमें पार्टी की तीन पीढिय़ों के नेताओं के तप, त्याग और तत्परता का योगदान रहा है। अगर मप्र की बात करें तो यहां भाजपा को मजबूत करने में पहली पीढ़ी के अटल बिहारी वाजपेयी, कुशाभाऊ ठाकरे, प्यारेलाल खंडेलवाल, नारायण गुप्ता, नरेश जौहरी, नारायण कृष्ण शेजवलकर, राजमाता विजयाराजे सिंधिया, गोविंद सारंग जैसे नेताओं का योगदान रहा। इन नेताओं ने अपने साथ ही अपनी दूसरी पीढ़ी को भी आगे बढ़ाया। जिसका परिणाम यह रहा कि पार्टी को सुंदरलाल पटवा, कैलाश जोशी, कैलाश सारंग, बाबूलाल गौर, लक्ष्मीनारायण पांडे, सुमित्रा महाजन जैसे नेता मिले। जिन्होंने भाजपा की नींव को मजबूती प्रदान की। दूसरी पीढ़ी के इन और अन्य नेताओं ने अपने साथ-साथ तीसरी पीढ़ी को भी मजबूत किया। जिसका परिणाम यह हुआ कि पार्टी को तीसरी पीढ़ी में उमा भारती, शिवराज सिंह चौहान, नरेंद्र सिंह तोमर, विक्रम वर्मा, प्रहलाद पटेल, कैलाश विजयवर्गीय, गोपाल भार्गव, जयंत मलैया, अनूप मिश्रा, नरोत्तम मिश्रा, लक्ष्मीकांत शर्मा, राजेंद्र शुक्ला, नंदकुमार सिंह चौहान जैसे नेता मिले। संघ ने अपनी रिपोर्ट में यह माना है कि मप्र सहित देशभर में भाजपा को स्थापित करने में तीसरी पीढ़ी के नेताओं का अमूल्य योगदान रहा है। आज मप्र में भाजपा जन-जन की पार्टी बनी है इसमें शिवराज सिंह चौहान की महती भूमिका है। शिवराज सिंह चौहान सत्ता के शिखर पर होने के बाद भी एक आम कार्यकर्ता के रूप पार्टी के लिए काम करते हैं। इसी का परिणाम है कि आज वे मप्र ही नहीं बल्कि देशभर में राजनीति का रोल मॉडल बने हुए हैं। अब मप्र में भाजपा की चौथी पीढ़ी को स्थापित करवाने की जिम्मेदारी भी शिवराज और वीडी की जोड़ी पर है।

गॉड फादर के बिना मिली राजनीति में जगह
मप्र भाजपा की कार्यकारिणी में शामिल सदस्यों को देखें तो ये वे नाम हैं जिनकी पारिवारिक पृष्ठभूमि राजनीति की नहीं रही है। इन्होंने मप्र की राजनीति में अपना मुकाम स्वयं बनाया और पाया है। यानी बिना गॉडफादर के उन्हें यह मुकाम मिला है। वर्तमान दौर में माना जाता है कि प्रभावशाली पिता या गॉडफादर के बिना राजनीति में जगह बनाना मुश्किल है। कई प्रतिभाशाली युवा राजनीति से जुड़ नहीं पा रहे हैं और जगह नहीं बना पा रहे हैं क्योंकि उनके पास प्रभावशाली पिता या गॉडफादर नहीं है। हमारा देश 65 फीसदी युवाओं का देश है। देश के तमाम क्षेत्रों से आवाज उठ रही है कि युवाओं को मौका मिलना चाहिए। अब अगर बात राजनीति की हो तब यह आवाज और भी मुखर हो जाती है। वर्तमान लोकसभा में युवा सांसदों की ठीक-ठाक संख्या को देख कर स्थिति निराशाजनक नहीं लगती। देश में युवा नेतृत्व पैदा हो रहा है। मगर ध्यान देने वाली बात है कि वह कहां से पैदा हो रहा है! अधिकतर युवा नेता परिवारवाद की प्रयोगशाला से निकले हैं। इन्होंने न तो राजनीति को एक जुनून की तरह लिया, न आम इंसानों की तरह शासन की कमियों के शिकार हुए और न कभी सडक़ों पर आंदोलित हुए। इनकी राजनीति इनके बड़े-बुजुर्गों के सियासी हित सुरक्षित रखने और पारिवारिक जागीर को बचाए रखने का प्रयास ज्यादा लगती है। मप्र भाजपा में ऐसे युवाओं की संख्या कम नहीं है, जिनकी पारिवारिक पृष्ठभूमि राजनीति की है। लेकिन प्रदेश भाजपा संगठन में नेता पुत्रों को दरकिनार कर सक्रिय कार्यकर्ताओं को पदाधिकारी बनाकर यह संकेत दे दिया है कि पार्टी में कार्यकर्ता ही सर्वोपरि हैं।
अगर देखा जाए तो भाजपा में चौथी पीढ़ी के सक्रिय नेताओं की कमी नहीं है। भाजपा प्रदेश अध्यक्ष वीडी शर्मा, सांसद गणेश सिंह, अरविंद भदौरिया, विश्वास सारंग, रामेश्वर शर्मा, आलोक शर्मा, कृष्णा गौर, दीपक जोशी, सुरेंद्र पटवा, रमेश मेंदोला, संजय पाठक, रीति पाठक, संध्या राय, हिमाद्री सिंह, आकाश विजयवर्गीय, मुदित शेजवार, विक्रम सिंह, रमेश पटेल, देवेंद्र सिंह तोमर, हर्षवर्धन सिंह चौहान, सुकर्ण मिश्रा, अभिषेक भार्गव, मंदार महाजन, मौसम बिसेन, पितांबर सिंह, कार्तिकेय चौहान सहित कई युवा नेता भाजपा को मजबूती देने और पार्टी को आगे बढ़ाने को बेताब हैं। इनमें कुछ वर्तमान तो कुछ पूर्ववर्ती सरकार में मंत्री रह चुके हैं तो कुछ विधायक और सांसद हैं। इनके अलावा पार्टी में कई ऐसे नेता सक्रिय हैं जो नेपथ्य में हैं। ऐसे ही कुछ नेताओं को मप्र संगठन में जगह दी गई है। वहीं अधिकांश जिलों की कमान भी युवा नेताओं को सौंपी गई है। भाजपा में 30 साल बाद शुरू हुआ यह पीढ़ी परिवर्तन मप्र की राजनीति को सुदृढ़ बनाने की दिशा में सार्थक कदम है।

अब कार्यकर्ताओं को मिलेगी ज्यादा तरजीह
मप्र में सरकार की प्राथमिकताएं अब भाजपा कार्यकर्ताओं के सुझावों और मंशा के अनुरूप तय होंगी। सत्ता और संगठन में बेहतर तालमेल के लिए यह फॉर्मूला तैयार किया गया है। इससे जहां कार्यकर्ता पार्टी के साथ जुड़ाव महसूस करेंगे, वहीं योजनाओं की जानकारी भी ज्यादा मनोयोग के साथ आम जनता तक पहुंचाएंगे। सत्ता और संगठन के बीच आम तौर पर मनमुटाव जैसी स्थितियां देखने को मिलती है। कार्यकर्ता अपनी उपेक्षा के आरोप अपनी ही पार्टी की सरकार पर लगाते हुए दिखाई देते हैं, लेकिन अब ऐसी स्थितियों से निपटने के लिए प्रदेश भाजपा ने एक फॉर्मूला तैयार किया है। सत्ता और संगठन के बीच बेहतर तालमेल के लिए ये फॉर्मूला तैयार किया गया है जिसके तहत सरकार की प्राथमिकताएं तय करने में कार्यकर्ताओं की अहम भूमिका होगी। अब कांग्रेस कार्यकर्ता आमजन से जुड़ी समस्याओं से संगठन को अवगत करवाएंगे और इसके बाद पार्टी के अधिवेशन में संगठन इन पर मुहर लगाकर सरकार के पास भिजवाएगा। संगठन की बैठक में यह तय होगा कि सरकार किन परेशानियों पर पहले फोकस करे। सरकार इन प्रस्तावों के अनुरूप अपनी प्राथमिकताएं और योजनाएं तय करेगी। भोपाल के इस फॉर्मूले से कार्यकर्ताओं को लगेगा कि सरकार उनके कहे अनुसार काम कर रही है और पार्टी से उन्हें जुड़ाव महसूस होगा। कार्यकर्ताओं को जब लगेगा कि सरकार उनका मान-सम्मान कर रही है तो वो ज्यादा उत्साह के साथ काम करेंगे और सरकार द्वारा किए गए कामों को ज्यादा मनोयोग के साथ आम लोगों तक पहुंचाएंगे। मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान की भी यह मंशा है कि कार्यकर्ता आमजन से जुड़ी समस्याओं के प्रस्ताव तैयार करें और उन्हें संगठन द्वारा पास कर सरकार के पास भेजा जाए। यह बात मुख्यमंत्री कई बार बोल भी चुके हैं। पार्टी प्रदेशाध्यक्ष वीडी शर्मा का कहना है कि सरकार की मंशा आम जनता को गुड गवर्नेंस देना है। इसे कैसे बेहतर किया जा सकता है। इसे लेकर लगातार कवायद की जा रही है। वहीं सरकार अच्छी योजनाएं लांच करे और आम जनता को इनका बेहतर तरीके से लाभ मिल पाए इसमें भी यह फॉर्मूला कारगर साबित होगा। कार्यकर्ताओं की आशाएं और अपेक्षाएं इस फॉर्मूले से पूरी होंगी। उन्हें लगेगा कि सरकार के साथ उनका सीधा जुड़ाव है और सरकार उनकी भावना के अनुरूप काम कर रही है। कार्यकर्ताओं के प्रस्तावों के अनुरूप प्राथमिकताएं और योजनाएं तय होंगी तो वे उनके प्रचार-प्रसार में भी तन-मन से जुटेंगे जिसका फायदा सरकार और संगठन को होगा।


2023 में युवा हो जाएगी भाजपा

प्रदेश भाजपा के एक नेता का दावा है कि 2023 के विधानसभा चुनाव तक मप्र भाजपा पूरी तरह युवा हो जाएगी। इसकी तैयारी संगठन के गठन से शुरू हो गई है। गौरतलब है कि प्रदेश अध्यक्ष वीडी शर्मा ने प्रदेश में जिलाध्यक्षों की नियुक्ति में भी युवा फैक्टर को प्राथमिकता दी है। पार्टी संगठन को सक्रिय करने के लिए युवा चेहरों को मौका दिया गया है। निष्क्रिय जिला व शहर अध्यक्षों को हटाकर उनके स्थान पर नई तैनाती की गई है। इसी फॉर्मूले पर मंडल अध्यक्षों की भी नियुक्ति की गई है। दरअसल, पार्टी की कोशिश यह है कि 2023 में होने वाले उपचुनाव से पहले पार्टी में युवा कार्यकर्ताओं को महत्वपूर्ण जिम्मेदारी सौंप दी जाए। वैसे तो मप्र विधानसभा चुनाव होने में अभी बहुत वक्त है लेकिन भाजपा अभी से इसकी तैयारी में जुट गई है। मिशन 2023 के लिए भाजपा ने रणनीति बनानी शुरू कर दी है। सीहोर में भाजपा ने 2 दिन के प्रशिक्षण वर्ग कार्यक्रम में प्रदेश प्रभारी मुरलीधर राव ने भी इसके संकेत दिए थे कि भाजपा में अब नया दौर शुरू होने वाला है। पार्टी अपने हर एक युवा कार्यकर्ता को जिम्मेदारी से लैस करेगी। मुरलीधर राव का कहना है कि पार्टी अब कमजोर बूथ के लिए हर बूथ मजबूत अभियान चलाएगी। इसमें राजनीतिक गतिविधियों के जरिए लोगों को संगठित करने का काम किया जाएगा। वहीं नगर निकाय चुनाव में जीत के लिए अभी से रूपरेखा तैयार होगी प्रभारी और सह प्रभारी कार्यकर्ताओं से संवाद बनाने का काम करेंगे और इसके लिए जिलों का प्रवास होगा। पार्टी संगठन की इस मंशा को साकार करने के लिए भाजपा प्रदेश अध्यक्ष वीडी शर्मा ने अपनी प्रदेश और जिलों की कार्यकारिणी में युवाओं को अधिक से अधिक जगह देने की नीति पर अमल किया है।

उम्मीदों की नई टीम
मप्र भाजपा की बहुप्रतीक्षित कार्यकारिणी को उम्मीदों की टीम माना जा रहा है। लंबे समय बाद नए चेहरों वाली एक युवा टीम तैयार है। आने वाले वक्त में 2023 के विधानसभा चुनाव और मौजूदा चुनौतियों से निपटने के लिए, लेकिन इस संतुलित कही जा रही टीम में सिंधिया समर्थकों को तरजीह नहीं दी गई है। इस बात पर कांग्रेस ने कटाक्ष करते हुए सिंधिया समर्थकों के राजनैतिक भविष्य पर सवालिया निशान लगा दिया। यहां तक कहा गया कि आगे-आगे देखिए कैसे सिंधिया हाशिए पर डाले जाते हैं। 30 सदस्यों वाली टीम के सामने चुनौतियां हजार हैं लेकिन फिलहाल क्या इस टीम को लेकर पार्टी के भीतर वाकई शांति है, संतुष्टि है ये बड़ा सवाल है। इस सवाल के जवाब में वीडी कहते हैं कि कांग्रेस अपने कुनबे की चिंता करे। भाजपा में सबकुछ सुनियोजित रणनीति के तहत होता है। शर्मा की नवगठित टीम में पुराने जमे हुए लोगों में से सिर्फ चार को ही जगह मिली है। साफ है कि प्रदेश भाजपा की टीम में बड़े बदलाव हुए हैं। टीम वीडी में सिंधिया समर्थकों में से केवल मदनलाल कुशवाह को जगह मिली, मंत्रिमंडल में भी इस वक्त सिंधिया समर्थक 9 विधायक मंत्री हैं। सिंधिया समर्थक 3 विधायक चुनाव हारने के बाद मंत्रिमंडल से बाहर हो चुके हैं और फिर से जगह बनाने की जुगत में हैं। संगठन में सिंधिया समर्थकों को जगह नहीं मिलने कांग्रेस को लगे हाथ एक मुद्दा मिल गया है। पिछले साल मार्च महीने में जब ज्योतिरादित्य सिंधिया ने कांग्रेस छोडक़र भाजपा का दामन संभाला था, तो उनके साथ कई समर्थकों ने भी पाला बदला। मंत्रिमंडल विस्तार में तो सिंधिया को उनकी पूरी हिस्सेदारी मिली, लेकिन संगठन में उनकी भागीदारी नहीं दिखाई दी। आने वाले दिनों में अभी निगम-मंडल, प्राधिकरणों में नियुक्ति के अलावा नगरीय निकायों चुनावों में फिर से सिंधिया समर्थकों को मौका मिल सकता है। हालांकि आधिकारिक तौर पर भाजपा अध्यक्ष खुद साफ कर चुके हैं कि पार्टी में अब कोई किसी का समर्थक नहीं है। जरूरत के मुताबिक सबका इस्तेमाल होगा।

हम सामूहिक नेतृत्व के साथ आगे बढ़ते हैं : वीडी
भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष व सांसद विष्णुदत्त शर्मा ने कहा कि पार्टी सामूहिक नेतृत्व के आधार पर आगे बढ़ती है। पार्टी के जिन कार्यकर्ताओं को दायित्व मिला है वे अपनी भूमिका के साथ पूरे प्रदेश में पार्टी को मजबूत करने का काम करेंगे। यह टीम वीडी शर्मा की नहीं यह टीम भाजपा है। यह टीम सामूहिकता के साथ आगे बढ़ेगी। वह कहते हैं कि नरेंद्र मोदी ने पहली बार जब प्रधानमंत्री पद की शपथ ली थी तब उन्होंने कहा था कि मेरी सरकार गरीबों को समर्पित होगी। मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने जब शपथ ली थी तब उन्होंने कहा था कि हम गरीब कल्याण के लिए काम करेंगे। केंद्र और प्रदेश में भाजपा की सरकार गरीबों के कल्याण और अंत्योदय के मंत्र पर काम कर रही है। भाजपा के पदाधिकारी इसे हर बूथ तक पहुंचाने का काम करेंगे। विष्णुदत्त शर्मा कहते हैं कि हम जो भाजपा का वर्तमान स्वरूप देख रहे हैं उसकी नींव में कई संगठन मनीषियों ने अपना त्याग, तपस्या और बलिदान दिया है। राजमाता जी, सुंदरलाल पटवा, कैलाश जोशी, प्यारेलाल खण्डेलवाल, कैलाश नारायण सारंग जैसे अनेक संगठन शिल्पियों ने मप्र भाजपा को गढ़ा है। स्व. कुशाभाऊ ठाकरे ने जिस संगठन पद्धति को लेकर मप्र के कोने-कोने में भाजपा पहुंचाने का काम किया, उस संगठन पद्धति पर भाजपा पूरे देश में काम कर रही है। मप्र के कार्यकर्ता उस पद्धति के तत्व को समझते है इसलिए पूरे देश में मप्र के कार्यकर्ताओं की अलग पहचान है। वे कहते हैं कि गृह मंत्री और पूर्व राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित शाह के नेतृत्व में भाजपा विश्व का सबसे बड़ा दल बना। तो राष्ट्रीय अध्यक्ष जेपी नड्डा के नेतृत्व में भाजपा की विजय पताका राज्यों में फहरा रही है। आने वाले नगरीय निकाय चुनाव में हम पूरी ताकत के साथ जुटें और 2023 और 2024 के चुनावों के लिए आज हम संकल्प लें कि टीम भावना के साथ भाजपा के काम में जुट जाएंगे। यहां से प्रत्येक पदाधिकारी और मोर्चा अध्यक्ष अपने अपने क्षेत्रों और अपने अपने कामों में जुटेंगे। मप्र भाजपा को आगे बढ़ाने के लिए हम परिश्रम की पराकाष्ठा करें।

Ramswaroop Mantri

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