भोपाल। । वैसे तो प्रदेश में विगत १६ वर्षों से उमा भारती के शासनकाल के बाद से जिस प्रकार की राजनीति चल रही है उसके चलते भ्रष्टाचार की गंगोत्री ऊपर से लेकर नीचे तक बह ही रही है तो वहीं प्रदेश की राजनैतिक इतिहास में भले ही शिवराज लम्बे समय तक मुख्यमंत्री होने का गौरव प्राप्त है? लेकिन उनके इस गौरवशाली कार्यकाल में क्या-क्या खेल हुए वह भी अपने आपमें एक अजब-गजब इतिहास है
जहां शिवराज सिंह के कार्यकाल में डम्पर से लेकर व्यापमं और व्यापमं से लेकर सिंहस्थ जैसे कई बड़े-बड़े घोटाले चर्चाओं में रहे हैं इन्हीं घोटालों के चलते २०१८ में हुए विधानसभा चुनावों के दौरान भाजपा को पराजय का सामना कर सत्ता से बेदखल होना पड़ा था लेकिन १५ वर्षों से सत्ता का वनवास भोग रही कांग्रेस को जैसे-तैसे सत्ता तो हासिल हो गई थी लेकिन कमलनाथ की कार्यशैली के चलते जिस प्रकार से नाथ के शासनकाल में तबादला उद्योग ही नहीं बल्कि किसानों, युवाओं, महिलाओं और अदिवासियों के साथ वादा खिलाफी करने के साथ-साथ यह स्थिति हो गई थी कि वल्लभ भवन की पांचवी मंजिल दलाली के रूप में चर्चित था, यही नहीं नाथ के कार्यकाल में तो तबादला उद्योग के नाम पर कांग्रेस के बड़े-बड़े नेताओं ने कई काउंटर खोल रखे थे और उन्हीं काउंटरों से नेताओं की मुंहमांगी रकम देकर प्रसादी पाकर कई अधिकारियों ने मनचाही पदस्थापना इसलिये करवाई थी कि नई सरकार में विकास कार्य होंगे और इस शासन में भी शिवराज शासन की तरह सबके साथ सबका विकास का गोरखधंधा खूब चलेगा, लेकिन वह मुंहमांगी रकम देकर पदस्थापना पाने वाले अधिकारियों को शायद यह पता नहीं था कि कमलनाथ और दिग्विजय ङ्क्षसह के पुत्रमोह के चलते ज्योतिरादित्य सिंधिया की जो उपेक्षा की जा रही थी उसी का परिणाम कमलनाथ सरकार को गर्त में लाकर छोड़ेगा और हुआ भी वही कि पिता-पुत्र मोह के चलते नाराज सिंधिया व उनके समर्थकों ने कांग्रेस की सरकार को धराशायी कर भाजपा का दामन थामते ही उधार के सिंदूर से सुहागन होकर मुख्यमंत्री बने शिवराज सिंह के नेतृत्व तो बन गये लेकिन उन्होंने २०१८ के विधानसभा चुनाव में अपनी कार्यशैली के चलते जो पराजय का स्वाद चखा था और आज भी उसी ढर्रे पर वह सरकार चल रही है जिसकी वजह से भाजपा ने सत्ता गंवाई थी आज भी उनके मंत्रिमण्डल में उच्च शिक्षा मोहन यादव जैसे मंत्री मौजूद हैं जो कभी कोरोना जैसी महामारी में उनके प्रतिनिधि द्वारा पीडि़त को भर्ती कराने के नाम से रकम ऐंठने के नाम से सुर्खियों में रहते हैं तो कभी उनके पीए के नाम पर लेनदेन की घटना को लेकर चर्चाओं में बने रहते हैं, इन सब घटनाओं के बाद मोहन यादव के स्टाफ से जुड़ी घटनाओं को लेकर प्रदेश के राजनीतिक हलकों में तरह-तरह की चर्चायें लोग चटकारे लेकर करते नजर आ रहे हैं और इस लाख टके का सवाल हल ढूंढने में लगे हैं कि आखिर ऐसा क्या है जो मोहन यादव के चाहे प्रतिनिधि हों या उनके स्टाफ का अधिकारी उसके नाम पर लेनदेन का खेल हमेशा खेला जाता है? तो कुछ भाजपा के नेता यह भी कहते हैं कि जब बिना धुंआ के तो आग जलती नहीं आखिर कुछ न कुछ तो है जो पैसे के लेनदेन का खेल मोहन यादव से जुड़े लोग खेल रहे हैं तभी तो वह चर्चाओं में रहते हैं वैसे भी मोहन यादव की कार्यशैली को लेकर लोग तरह-तरह की चर्चायें करते रहते हैं, इससे यह साफ जाहिर हो जाता है कि मोहन यादव और उनसे जुड़े इस तरह की कार्यशैली से यह साफ जाहिर हो जाता है कि मुख्यमंत्री शिवराज के शासन की कार्यशैली किस प्रकार चल रही है?
०





