
बीजेपी में अहंकार आ गया है,मोदी-शाह और शिवराज-वीडी पर पार्टी को हाईजैक करने का लगाया आरोप
इंदौर। विधानसभा चुनाव की बेला में पार्टी में मान-सम्मान, पद और टिकट का हक पाने के साथ राजनीतिक अस्तित्व को बचाने की कवायद तेज हो गई है। पूर्व सीएम कैलाश जोशी के बेटे दीपक जोशी की बगावती तेवर के बाद, वरिष्ठ नेता सत्यनारायण सत्तन ने भी पार्टी को जमकर खरी-खरी सुना दी है और अब द सूत्र से चर्चा करते हुए पूर्व विधायक भंवर सिंह शेखावत ने भी पार्टी पर विरोधी तीर चला दिए हैं। साथ ही साफ कर दिया है कि मैं तो चुनाव लडूंगा, अब पार्टी को तय करना है कि वह मुझे कौन सी सीट देना है, नहीं हुआ तो फिर अपना अगला कदम तय करूंगा। शेखावत इंदौर की विधानसभा पांच से विधायक रह चुके हैं।
पूर्व बीजेपी विधायक भंवर सिंह शेखावत से सीधी बात
- सवाल- कहा जा रहा है कि आप भी कांग्रेस में जा रहे हैं?
- शेखावत– अभी तक फैसला नहीं लिया है, इस पर चर्चा भी कांग्रेस से नहीं हुई है, लेकिन पार्टी को बता दिया है कि मेरा इंदौर आपने छुड़वा दिया। बदनावर भी चला गया। अब मुझे भी किसी भी हारी हुई सीट से एडजस्ट करो, क्योंकि चुनाव तो मुझे लड़ना है।
सवाल- किस सीट से लड़ना चाहते हैं?
- शेखावत- देपालपुर या बड़नगर दोनों ही राजपूत बाहुल्य है और यहां से टिकट मैंने मांगा है और दोनों ही बीजेपी की हारी सीट है। देपालपुर में मनोज पटेल की इस बार भी स्थिति ठीक नहीं है।
- सवाल- यह कदम क्यों उठाना पड़ रहा है?
- शेखावत- यह तो नेचुरल बात है, कुल मिलाकर पार्टी से पहले हमें रिक्वेस्ट करना चाहिए, वह कर दी है, ताकि कल को कोई यह नहीं कहे कि आपने पहले बताया नहीं।
- सवाल- कांग्रेस से आए लोगों के कारण क्या संकट आ गया है?
- शेखावत- बिलकुल, जहां कांग्रेस को बीजेपी में लिया है, वह सभी संकट में आ गए हैं। जैसे दीपक जोशी की बात करें, सांवेर में सोनकर परिवार की बात हो, ग्वालियर में उनके पुराने नेताओं की बात हो, शेजवार जी की बात हो। पुराने लीडर जिन्होंने सालों तक लड़ाई लड़ी, पार्टी खड़ी की। वह दरकिनार हो गए हैं और घर बैठा दिया है, कांग्रेस से आए लोग लीडर बन गए हैं।
- सवाल- ऐसा क्यों हो रहा है?
- शेखावत- बीजेपी में अहंकार आ गया है। कार्यकर्ता की पहचान ही नहीं रही, यही अहंकार 2018 के चुनाव में भी था तो क्या हुआ? कहते हैं नियुक्तियां चुनाव के बाद देखेंगे तो फिर भाई सत्ता में क्यों आए थे? कार्यकर्ता क्या घर बैठा रहेगा।
- सवाल- पार्टी में ऐसा क्यों हो रहा है, किसकी चल रही है?
- शेखावत- ब्यूरोक्रेसी ही सरकार चला रही है, पांच-दस साल से यही देख रहा हूं। किसी मंत्री, संत्री की नहीं चलती है। पार्टी के अंदर कुछ लोगों का कब्जा है और यह पब्लिक लिमिटेड कंपनी की तरह काम कर रही है।
- सवाल- कौन इसे कंपनी की तरह चला रहा है?
- शेखावत- आप ही देख लीजिए। दिल्ली में मोदी और शाह ने पार्टी को हाईजैक कर रखा है। तीसरा नाम ही नहीं है, वहीं प्रदेश में शिवराज है और एक वीडी शर्मा नाम के प्राणी है, यही सब फैसले लेते हैं और कोई सुनने वाला नहीं है। फिर हमने भी गुलामी का पट्टा तो लिखा नहीं है। फैसला लेने के लिए स्वतंत्र हैं।
- सवाल- कैलाश विजयवर्गीय से अब कैसे संबंध हैं?
- शेखावत- उन्हें तो राजनीति में मैं ही लाया था, पार्षद का टिकट दिया था, अब वह बड़े लीडर हो गए हैं। कोई दिक्कत नहीं है, लेकिन मेरी और उनकी कार्यशैली अलग है।
सत्यनारायण सत्तन ने भी सुनाई खरी-खरी
इसी तरह सत्तन ने भी मीडिया से कहा कि पार्टी का रूख पुरातन नेताओं की अवहेलना वाला हो गया है। अभी दो जा रहे हैं, सौ भी जाएंगे पार्टी छोड़कर। जिन्होंने पार्टी को लेकर जीवन दिया, उन्हें कुछ नहीं मिला, बल्कि जिन्होंने कांग्रेसियों ने 70 साल हमें गालियां दी उन्हें पास में बैठाकर राजतिलक किया जा रहा है। पुराने नेताओं के मनाने का बात पर वह कहते हैं कि पार्टी को कोई फर्क नहीं पड़ता इसलिए उन्हें कोई नहीं मनाएगा। संगठन के सारे फैसले कुछ लोग लेंगे तो यही होगा। अनुभव को नकार कर केवल उम्र की बात की जा रही है तो अब उस उम्र की दहलीज पर तो पीएम भी खड़े हैं।
एबीवीपी से आए नेताओं पर साधा निशाना
सत्तन ने एबीवीपी (अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद) पर निशाना साधते हुए कहा कि यहां से आए लोगों को अपने-अपने लोगों को रेवड़ी बांटने का खेल हो रहा है। उल्लेखनीय है कि प्रदेशाध्यक्ष वीडी शर्मा, महापौर पुष्यमित्र भार्गव, नगराध्यक्ष गौरव रणदिवे यह सभी एबीवीपी में रहे हैं। सत्तन ने कहा कि इन सभी ने जेल नहीं देखी, जनसंघ नहीं जानते हैं, यातनाएं नहीं सहीं जो सब कुछ हम लोगों ने सहा है।





