इंदौर मध्यप्रदेश विधानसभा चुनाव 2023 की तारीखें जैसे जैसे नजदीक आ रही हैं सूबे का सियासी पारा गर्माता जा रहा है। कुछ दिनों पहले तक प्रदेश में कांग्रेस और समाजवादी पार्टी के बीच गठबंधन के कयास लगाए जा रहे थे। लेकिन गठबंधन के पहले ही दोनों पार्टियों में कलह देखने को मिल रही है। सबसे पहले इस मामले में पीसीसी चीफ कमलनाथ का बयान सामने आया था कि I.N.D.I.A. गठबंधन सिर्फ केंद्र तक सीमित है। अब इसपर सपा प्रमुख अखिलेश यादव ने प्रतिक्रिया देते हुए कहा है किअगर मुझे पहले पता होता कि गठबंधन सिर्फ केंद्र तक सीमित है तो मैं अपने नेताओं को कांग्रेस के पास भेजता ही नहीं।
मीडिया से चर्चा करते हुए अखिलेश यादव ने कहा कि ‘अगर मुझे पता होता कि गठबंधन प्रदेश स्तर पर नहीं है तो मैं कभी अपने नेताओं को दिग्विजय सिंह और कमलनाथ के पास नहीं भेजता। मुझे ये भरोसा होता कि कांग्रेस पार्टी के लोग धोखा देंगे तो मैं उनकी बात का भरोसा नहीं करता। मुझे बताया गया कि 6 सीटों पर आपके लिए सोच विचार किया गया है। उस पर तय करेंगे। सिटिंग एमएलए की जगह आप सीट दे दोगे और उम्मीद करोगे कि मैं आपके बारे में सच बोलूं।’
अखिलेश यादव ने आगे कहा कि अगर हम उन मीटिंग में बैठे हैं तो हम ही कन्फ्यूज रहे होंगे। कांग्रेस के नेताओं ने हमारे साथ मीटिंग रखी। हमने उसमें अपनी पूरी परफॉर्मेंस बताई कि किन सीट पर हमारे नेता जीत के आए हैं। लेकिन जब रिजल्ट आया, सीटें घोषित की गई तो समाजवादी पार्टी शून्य रही। अगर ये मुझे पहले पता होता तो हमारी पार्टी के लोग कभी मिलने नहीं जाते।
भाजपा का तंज
अखिलेश यादव की प्रतिकिया सामने आने के बाद भाजपा प्रदेश मीडिया प्रभारी आशीष अग्रवाल ने मामले पर चुटकी लेते हुए कहा कि जिसे गठबंधन समझा वो तो ठगबंधन निकला। उन्होंने लिखा कि, ‘गठबंधन नहीं ये तो ठगबंधन निकला! ठगे जाने की शुरुआत समाजवादी पार्टी से हुई है। मध्य प्रदेश में कमलनाथ जी ने अखिलेश यादव के साथ छल करने में कोई कसर नहीं छोड़ी। सूची भी ले ली और फिर ठेंगा भी दिखा दिया। बेचारे अखिलेश यादव को कांग्रेस की मोहब्बत वाली दुकान से सिर्फ मिला तो केवल धोखा। लेकिन ये भी गौर करने की बात है कि अखिलेश यादव ने कांग्रेस को उसकी हैसियत बता दी!’ उन्होंने आगे कहा, घमंडीया गठबंधन केंद्र में बना था। इसका मुख्य उद्देश्य ही अपवित्र था। इसका उद्देश्य सनातन का समापन था। प्रदेश में भी कांग्रेस और अन्य गठबंधन की राजनीति नहीं चलेगी। आप पार्टी, सपा समेत अन्य दलों के भरोसे कांग्रेस बेसहारा हुई। प्रदेश हो या केंद्र धर्म विरोधी गठबंधन की राजनीति नहीं चलेगी।





