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अल्बर्ट आइंस्टीन ने ‘लेटर’अमेरिकी राष्ट्रपति फ्रैंकलिन को लिखा था, इससे बना जापान को दहलाने वाला एटम बम?

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अल्बर्ट आइंस्टीन ने 1939 में पूर्व अमेरिकी राष्ट्रपति फ्रैंकलिन डी रूजवेल्ट को एक लेटर लिखा था, जिसमें उन्होंने परमाणु हथियारों के विकास में जर्मनी को हराने की दौड़ में एक सीक्रेट मिशन का जिक्र किया था. इस लेटर से अमेरिकी न्यूक्लियर प्रोग्राम की राह खुली. आइए जानते हैं कि अमेरिका ने पहला एटम बम कैसे बनाया और उसमें इस लेटर का क्या रोल रहा.

कई लोग एटम बनाने के पीछे मशहूर साइंटिस्ट और नोबल प्राइज विनर अल्बर्ट आइंस्टीन का हाथ बताते हैं. इसे साबित करने के लिए लोग एक लेटर का जिक्र करते हैं, जिसे आइंस्टीन ने पूर्व अमेरिकी राष्ट्रपति फ्रैंकलिन डी रूजवेल्ट को लिखा था. इससे अमेरिका के सीक्रेट न्यूक्लियर प्रोग्राम ‘मैनहेटन प्रोजेक्ट’ को शुरू करने में मदद मिली थी. इसके अलावा जर्मनी के परमाणु कार्यक्रम को लेकर चिंता भी जाहिर की गई थी. हाल ही में एक नीलामी में यह लेटर करीब 33 करोड़ रुपये में बिका है.

1945 में अमेरिका ने हिरोशिमा पर एटम बम गिराकर जापान को दहला दिया था. इसके बाद नागासाकी में एटम बम गिराया गया. यह पहला मौका था जब दुनिया को पता चला कि परमाणु बम कितने बड़े पैमाने पर विध्वंसक हो सकता है. लेकिन इस विध्वंसकता के बारे में आइंस्टीन ने रूजवेल्ट को पहले ही आगाह किया था. यह लेटर इस बात की गवाही देता है. बहरहाल, अब देखना ये है कि एटम बम कैसे बना और इसे बनाने में आइंस्टीन के लेटर की क्या भूमिका रही.

किसने बनाया पहला एटम बम?

क्या आपने सात ऑस्कर अवार्ड जीतने वाली ओपेनहाइमर मूवी देखी है? 2023 में आई यह मूवी एटम बम बनाने वाले अमेरिकी साइंटिस्ट रॉबर्ट ओपेनहाइमर और मैनहेटन प्रोजेक्ट पर बेस्ड है. मैनहेटन प्रोजेक्ट अमेरिका का एटम बम बनाने का प्रोजेक्ट था. इस मूवी में आप एटम बम बनाने की सफलता के पीछे ओपेनहाइमर और अल्बर्ट आइंस्टीन के बीच क्या कुछ रहा, यह देख सकते हैं. दुनिया का पहला एटम बम बनाने का खिताब ओपेनहाइमर के पास है.

एटम बम बनाने के दौरान कई तकनीकी दिक्कतों का सामना करना पड़ा था. जब आइंस्टीन को पता चला कि जर्मन इन समस्याओं को हल करने में सफल हो सकते हैं, तो उन्होंने राष्ट्रपति फ्रैंकलिन डी रूजवेल्ट को इसके बारे में आगाह किया. आइंस्टीन के 1939 के लेटर ने परमाणु बम बनाने के अमेरिकी प्रयास को शुरू करने में मदद की, लेकिन पहले काम धीरे-धीरे आगे बढ़ा. आइंस्टीन ने यह लेटर एक अन्य वैज्ञानिक लियो सिजलार्ड की मदद से लिखा था.

Albert Einstein Leo Szilard Letter

अल्बर्ट आइंस्टीन ने लियो सिजलार्ड की मदद से लेटर लिखा.

अमेरिका का मैनहेटन प्रोजेक्ट

1940 और 1941 में दो खोज ने दिखाया कि बम बनाना संभव था. एटम बम बनाने में इस्तेमाल किए जाने वाले यूरेनियम के ‘क्रिटिकल मास’ का पता लग गया, और यह पुष्टि भी हो गई कि प्लूटोनियम फिजन से गुजर सकता है और बम में इस्तेमाल किया जा सकता है. दिसंबर 1941 में सरकार ने एटम बम बनाने के लिए मैनहेटन प्रोजेक्ट शुरू कर दिया.

Albert Einstein Atomic Bomb Letter

अल्बर्ट आइंस्टीन ने यह लेटर पूर्व US प्रेसिडेंट फ्रैंकिल डी रूजवेल्ट को लिखा.

दो परमाणु बम बनाए

परमाणु हथियारों की अपार विनाशकारी शक्ति बम के कोर को बनाने वाले फिसाइल एलिमेंट्स के न्यूक्लाई को विभाजित करने से बनी एनर्जी के अचानक निकलने से पैदा होती है. अमेरिका ने सेकेंड वर्ल्ड वॉर के दौरान दो प्रकार के परमाणु बम विकसित किए. पहला लिटिल बॉय, एक गन-टाइप का वेपन था, जिसमें यूरेनियम कोर था.

Hiroshima Atom Bomb Blast

हिरोशिमा, जापान में दुनिया का पहला एटम बम गिरा.

लिटिल बॉय को हिरोशिमा पर गिराया गया था. दूसरा हथियार, जिसे नागासाकी पर गिराया गया था, उसे फैट मैन कहा जाता है और यह प्लूटोनियम कोर वाला एक इंप्लोजन-टाइप का डिवाइस था.

न्यूक्लियर फिजन

यूरेनियम-235 और प्लूटोनियम-239 आइसोटोप को परमाणु वैज्ञानिकों ने इसलिए चुना क्योंकि वे आसानी से फिजन से गुजरते हैं. फिजन तब होता है जब एक न्यूट्रॉन किसी भी आइसोटोप के न्यूक्लाई से टकराता है, न्यूक्लाई को टुकड़ों में बांटता है और भारी मात्रा में एनर्जी रिलीज करता है. फिजन प्रोसेस अपना आप काम करती है, क्योंकि एटम के फिजन से बने न्यूट्रॉन आस-पास के न्यूक्लाई से टकराते हैं और ज्यादा फिजन पैदा करते हैं. इसे चेन रिएक्शन के नाम से जाना जाता है और यही परमाणु विस्फोट का कारण बनता है.

Little Boy Fat Man Atom Bomb Models

‘लिटिल बॉय’ और ‘फैट मैन’ एटम बम के मॉडल्स.

ऐसे बनता है एटम बम

जब यूरेनियम-235 एटम एक न्यूट्रॉन को अब्सॉर्ब करता है और दो नए परमाणुओं में बंटता है, तो यह तीन नए न्यूट्रॉन और कुछ बाइंडिंग एनर्जी जारी करता है. दो न्यूट्रॉन रिएक्शन करना जारी नहीं रखते क्योंकि वे यूरेनियम-238 एटम से खो जाते हैं या अब्सॉर्ब हो जाते हैं. हालांकि, एक न्यूट्रॉन यूरेनियम-235 के एक एटम से टकराता है, जो फिर बंट जाता है और दो न्यूट्रॉन और कुछ बाइंडिंग एनर्जी रिलीज करता है. वे दोनों न्यूट्रॉन यूरेनियम-235 एटम से टकराते हैं, जिनमें से हरेक बंटता है, और एक से तीन न्यूट्रॉन के बीच जारी होता है. इसी तरह यह एक न्यूक्लियर चेन रिएक्शन का कारण बनता है.

Nagasaki Atom Bomb Blast

नागासाकी, जापान में एटम बम से हमला. (Universal History Archive/Universal Images Group via Getty Images)

परमाणु ऊर्जा कैसे बनती है?

एटम बम को विध्वंसक बनाने के लिए उसमें विनाशकारी एनर्जी पैदा करना जरूरी है. ज्यादातर मामलों में न्यूक्लियर पावर यूरेनियम एनरिचमेंट यानी यूरेनियम संवर्धन से शुरू होती है.

यूरेनियम संवर्धन आमतौर पर सबसे ज्यादा गैस सेंट्रीफ्यूज में होता है. यूरेनियम को गैस में तब्दील करने के बाद इसे सेंट्रीफ्यूज में डाला जाता है, जो हाई स्पीड पर घूमते हैं, ताकि थोड़े भारी यूरेनियम-238 को यूरेनियम-235 से अलग किया जा सके. सेंट्रीफ्यूज में घूमने का हरेक राउंड सैंपल में यूरेनियम-238 के रेश्यो को कम करता है और यूरेनियम-235 के रेश्यो को बढ़ाता है.

यूरेनियम संवर्धन

यूरेनियम को अलग-अलग लेवल तक एनरिच किया जा सकता है, जो दो कैटेगरी में आते हैं-

कम समृद्ध यूरेनियम (Low-Enriched Uranium-LEU), जिसमें 20 फीसदी से कम यूरेनियम-235 होता है और इसका इस्तेमाल अक्सर न्यूक्लियर पावर या नॉन-पावर रिएक्टरों में किया जाता है, जो मेडिकल यूज, साइंटिफिक रिसर्च और दूसरे मकसद के लिए मैटेरियल का प्रोडक्शन करते हैं.

Nuclear Reacter Plant Enriched Uranium

अत्यधिक समृद्ध यूरेनियम (Highly Enriched Uranium-HEU), जिसमें 20 फीसदी या उससे ज्यादा यूरेनियम-235 होता है और इसका इस्तेमाल मुख्य तौर पर मिलिट्री के लिए किया जाता है. परमाणु हथियार विकसित करने के लिए और कुछ अन्य स्पेशल कामों में जैसे- परमाणु ऊर्जा से चलने वाली पनडुब्बियों पर रिएक्टर के लिए भी इसका इस्तेमाल होता है.

Nuclear Weapon Enriched Uranium

HEU के किसी भी स्तर का इस्तेमाल हथियार के लिए किया जा सकता है, लेकिन कम से कम 90 फीसदी तक समृद्ध HEU, जिसे कभी-कभी वेपन-ग्रेड यूरेनियम कहा जाता है, सबसे आम है. हाई लेवल के संवर्धन का मतलब है कि हथियार बनाने के लिए कम यूरेनियम की जरूरत होती है. इसका मतलब है कि वारहेड छोटे और हल्के हो सकते हैं, जिससे मिसाइलें ज्यादा दूरी तय कर सकती हैं और विमान ज्यादा हथियार ले जा सकते हैं.

अल्बर्ट आइंस्टीन और एटम बम

अल्बर्ट आइंस्टीन ने कभी भी सीधे एटम बम पर काम नहीं किया, लेकिन आइंस्टीन को अक्सर गलत तरीके से परमाणु हथियारों के आविष्कार से जोड़ा जाता है. उनकी फेमस इक्वेशन E=mc2 एक एटम बम में निकलने वाली एनर्जी को बयां करती है, लेकिन यह नहीं बताती कि इसे कैसे बनाया जाता है. उन्होंने बार-बार लोगों को समझाया कि मैं खुद को परमाणु ऊर्जा के निकलने का जनक नहीं मानता. इसमें मेरी भूमिका काफी इनडायरेक्ट थी.

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