अग्नि आलोक
script async src="https://pagead2.googlesyndication.com/pagead/js/adsbygoogle.js?client=ca-pub-1446391598414083" crossorigin="anonymous">

बिहार में की जा रही पल्टूबाजी से सारे गिरगिट शर्मशार

Share

 मुनेश त्यागी 

    उसने पहले कहा था कि “मैं मर जाऊंगा पर बीजेपी में नहीं जाऊंगा* और अब सिद्ध कर दिया है कि “मैं बीजेपी के बिना जिंदा नहीं रह सकता, मैं बीजेपी में जाऊंगा।” बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार का सत्ता बदल नाटक पूरी देश दुनिया देख रही है। नीतीश कुमार ने पूरी दुनिया को बता दिया और दिखा दिया है कि वे कुछ भी कहते रहे हों, मगर वे सत्ता के बिना जिंदा नहीं रह सकते और वे सत्ता में बने रहने के लिए भाजपा जैसी सांप्रदायिक ताकतों से बार-बार गठबंधन कर सकते हैं।

     जानकार बता रहे हैं कि उन्होंने 10-12 बार अलग-अलग पार्टियां बदलकर बिहार की मुख्यमंत्री की गद्दी संभाली है। यहीं पर यह बात भी सिद्ध हो रही है की नीतीश कुमार का किसी विचारधारा में कोई विश्वास नहीं है। उनकी कोई विचारधारा नहीं है। उनकी सिर्फ और सिर्फ एक ही विचारधारा है कि किसी तरह से देश या प्रदेश की सर्वोच्च सत्ता पर बना रहा जा सके। इससे पहले वे केंद्र में अटल बिहारी वाजपेई की सरकार में रेल मंत्री थे और उसके बाद वह अब नौंवी बार बिहार के मुख्यमंत्री बने हैं और इस बार उन्होंने फिर से भाजपा का सहारा लिया है। 

     यहां पर कई सारे सवाल पैदा हो रहे हैं कि जैसे उन्हें बिहार के लोग और राजनीतिक दल इतनी बार पार्टी बदलने के बाद भी, फिर से उनके साथ गठबंधन कर लेते हैं और उन्हें मुख्यमंत्री बना देते हैं। आखिर उनकी क्या मजबूरी है? क्या उनकी कोई सोच नहीं है, उनकी कोई विचारधारा नहीं है? या वें सब बस नीतीश कुमार के बारे में सिर्फ सपने देखते रहते हैं?  अब यह पूरी तरह से सिद्ध हो गया है कि नीतीश कुमार सिर्फ और सिर्फ सत्ता के पुजारी हैं, उनका जन कल्याण या जन विकास में कोई विश्वास नहीं हैं। जो भी उन्हें मुख्यमंत्री बना देगा या केंद्र में मंत्री बना देगा, वे उसी के साथ चले जाएंगे।

      उन्हें इंडिया गठबंधन का सूत्रधार बताया जा रहा है। मगर यहां पर भी यह बात सिद्ध हो गई है कि वे इंडिया गठबंधन के प्रधानमंत्री बनना चाहते थे, उसका संयोजक बनना चाहते थे और जब उन्हें दिख गया कि लोग उन्हें समर्थन नहीं दे रहे हैं और उनका प्रधान मंत्री या संयोजक बनना निश्चित नहीं है तो उन्होंने एक बार फिर से पलटी मार दी। उनकी इस पलटी मारने के बाद तो दुनिया भर के सारे गिरगिट शर्म के मारे, मरे जा रहे होंगे और वे सोच रहे होंगे कि रंग बदलने की गिरगिटी दौड़ में नीतीश कुमार सबसे आगे हैं। जैसे वे इस रंग बदलने की गिरगिटी दौड़ में दुनिया के चैंपियन बन गए हैं।

      यहीं पर इस सारी नाटक बाजी और पलटीबाजी में नीतीश कुमार की ईमानदारी की पोल भी खुल गई है क्योंकि बहुत सारे रिपोर्टर और राजनीतिक विश्लेषक लोग बता रहे हैं कि भाजपा ने उनके तमाम निकट के लोगों पर और बड़े-बड़े ब्यूरोक्रेसी के लोगों पर शिकंजा कसना शुरू कर दिया था और उनकी गलत आर्थिक हरकतों को पकड़ लिया था जिस वजह से उनमें से कई को जेल भी भेजा जा चुका है, उन पर सीबीआई , ईडी, इनकम टैक्स के रेड हो रहे हैं, उन्हें तमाम तरह से डराया और धमकाया जा रहा हैं। इस सबसे घबराकर नीतीश कुमार ने अपने हित मे यही उचित समझा कि पूरी दुनिया में अपनी छिछालेदर होने से बचने के लिए, यह जरूरी है कि एक बार फिर से एनडीए के चंगुल में फंसा जाए और एक बार फिर उन्होंने यह काम कर डाला।

      अब बिहार की जनता को और धर्मनिरपेक्ष जनता की कल्याणकारी नीतियों में विश्वास रखने वाले तमाम बिहार के लोगों की यह सबसे बड़ी जिम्मेदारी बनती है कि वे जेडीयू और उसके नेतृत्व में विश्वास न करें, अगले आने वाले चुनावों में वे अपने मत द्वारा, इन सब पलटुओं का और उनके पिछलग्गूओं का पत्ता साफ कर दें और उन सबको सांसदी, विधायकी से पूरी तरह से महरूम कर दे, वंचित कर दें और ऐसी ताकतों के साथ गठबंधन कायम करें जो भारत के संविधान में, कानून के शासन में, जनतंत्र में, समाजवाद में और धर्मनिरपेक्षता में और जनकल्याणकारी नीतियों में विश्वास रखते हैं और जो सांप्रदायिकता का खात्मा करके आपसी भाईचारे में विश्वास रखते हैं।

      नीतीश कुमार का यह गिरगिटपन भारत के समाजवादी आंदोलन पर और भारत की समाजवादी ताकतों पर सबसे बड़ा धब्बा है, उनके लिए सबसे बड़ा आघात है। अब भारत के समाजवादी आंदोलन और समाजवादी नेतृत्व को नीतीश कुमार जैसे लोगों से सावधान होना हो जाना चाहिए और अब मौका है कि भारत में समाजवादी विचारधारा को और समाजवादी आंदोलन को जिंदा रखने के नीतीश कुमार जैसे गिरगिटों से पूरी तरह से छुटकारा पा लिया जाए और उन सबको मिलकर, भारत के वामपंथी आंदोलन में विश्वास रखने वाले तमाम दलों के साथ, राष्ट्रीय स्तर पर एक मजबूत संगठन बनायें और इन नीतियों और कार्यक्रमों के साथ जनसंघर्षों में उतरें और समाजवादी नीतियों को लेकर जनता के बीच में जाएं। आज यह उनकी सबसे बड़ी जिम्मेदारी और जरूरत बन गई है।

     यहीं पर हमारा यह भी कहना है कि नीतीश कुमार के जाने से बिहार में या राष्ट्रीय स्तर पर इंडिया गठबंधन पर कोई फर्क नहीं पड़ेगा क्योंकि इंडिया गठबंधन को नीतीश कुमार जैसे अवसरवादी और पाला बदलने वाले लोगों की जरूरत नहीं है। इंडिया गठबंधन के राष्ट्रीय नेताओं को अब बिहार में राजद, कांग्रेस, वामपंथी पार्टियों, समाजवादियों और सांप्रदायिक एकता और भाईचारे में विश्वास रखने वाले तमाम लोगों को एकजुट करके इंडिया गठबंधन की मुहिम को और तेज करना चाहिए। यह बहुत अच्छा हुआ कि जनता को धोखा देने वाले, दल बदलने वाले और किसी भी तरह से सत्ता में बने रहने वाले चालबाज आदमी से भारत की जनता को और इंडिया गठबंधन को दूर रहने का मौका मिल गया है।

Ramswaroop Mantri

Recent posts

script async src="https://pagead2.googlesyndication.com/pagead/js/adsbygoogle.js?client=ca-pub-1446391598414083" crossorigin="anonymous">

प्रमुख खबरें

चर्चित खबरें