अशोक रघुवंशी इंदौर ..
*रुद्राक्ष वितरण की अव्यवस्थाओ की शिकार एक महिला को अपनी जान गवानी पड़ी। सेकड़ो घायल । भूखे प्यासे भक्त सड़को पर।वाहन जाम में फसे। जिम्मेदार कौन ?* *क्या रुद्राक्ष ऑनलाइन बुकिंग कर भक्तो के घर तक नही पहुचाये जा सकते थे ?*
लेकिन अफसोस ….. *पंडित प्रदीप मिश्रा ने सरकार को अपनी ताकत दिखाने दो लाख भक्तो को कुबेर धाम आमंत्रित कर दिया। और अंध भक्त जनता भी दौड़ पड़ी रुद्राक्ष लेने कुबेर धाम की ओर*…. यहाँ भी सवाल वही है भक्ति और अंधभक्ति ….
*क्या एक रुद्राक्ष से आपकी सब समस्या दूर हो जाएगी। कैसे संभव है धरती पर आए है तो आपको मायावी दुनिया मे दुख सहन करने ही पड़ेंगे। *देवता भी मानव रूप में धरती पर आकर बच नही पाए। फिर वो भगवान श्री राम हो या श्री कृष्ण उन्हें भी दुख उठाने पड़े* । क्या उनके समय कोई बड़े साधु संत नही थे जो उन्हें रुद्राक्ष का टोटका बता देते? फिर क्यों हम इतने भावुक हो जाते है।
धर्म मे आस्था होनी चाहिए जरूरी है लेकिन अंधभक्ति की आवश्यकता नही। *सरकार व जिला प्रशासन यू तो शहर में छोटी सी रैली धरना प्रदर्शन में कानून व्यवस्था की दुहाई देता है तो फिर इतने बड़े आयोजन की अनुमति कैसे दी ?* ओर अगर अनुमति दी तो व्यपक व्यवस्थाएं क्यों नही की गई ? *पूर्व में भी पंडित प्रदीप मिश्रा के रुद्राक्ष वितरण में जनहानि हुई थी। जिला प्रशासन ने उससे सबक क्यों नही लिया ?* कोई कितना भी बड़ा नेता हो संत हो *जनता की सुरक्षा पहले है। महिला की मौत और घायलों की जिम्मेदार प्रदेश सरकार ले या प्रदीप मिश्रा पर कानूनी कार्यवाही करें।* और जिला प्रशासन आगे से ऐसे किसी आयोजन की अनुमति न दे ये भी सुनिश्चित होना चाहिए।





