अग्नि आलोक
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..और एक दिन गौरैया भारत से विलुप्त हो गईं !

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यह कोई कपोलकल्पित भविष्यवाणी नहीं है,अपितु वर्तमानसमय में बिल्कुल यथार्थ पर आधारित,कटुसत्यता पर आधारित एक आकलन हैं,क्योंकि आज के सत्ता के बिल्कुल असंवेदनशील,पशु-पक्षियों व समस्त जैवमण्डल के प्रति बिल्कुल उदासीन,क्रूर,असहिष्णु कर्णधारों,भारत की भ्रष्ट और रिश्वतखोर नौकरशाही तथा कथित भारतीय न्यायव्यवस्था में अपने पैतृक वारिस के अधिकार के बल पर बैठे नाकारा,अयोग्य,जनविरोधी मानसिकता तथा पर्यावरण के प्रति बिल्कुल असंवेदनशील जजों की मानसिकता के चलते ये बात दृढता और स्पष्टता से कही जा सकती है।

यहाँ केवल पर्यावरण दिवस और गौरैया दिवस पर करोड़ों-अरबों रूपये फूँककर केवल एक ढोंग किया जाता है,दूसरी तरफ हजारों जीवों की शरणस्थली,लाखों हरे-भरे,सघन पेड़ों को,जो इस जैवमण्डल के प्राणों के,सांसों के आधार हैं,निर्ममतापूर्वक काट दिया जाता है ! इसी प्रकार पूरे देश में पर्यावरण वैज्ञानिकों के अनुसार समस्त मानवप्रजाति,गौरैयों व अन्य सभी जीवों के लिए,हॉर्ट अटैक, ब्रेनहैमरेज,गर्भपात, विकलांगता तथा कैंसर जैसी बीमारियों को न्योता देनेवाले लाखों की संख्या में मोबाइल टॉवर इस देश की रिश्वतखोर नौकरशाही द्वारा बेशर्मी से रातोंरात खड़े कर दिए जा रहे हैं ! 

 उक्त वर्णित त्रयी महानुभावों को न वृक्षों,न वनों,न वन्य पशुओं और विलुप्तिकरण के कगार पर खड़ी गौरैयों सहित सैकड़ों पक्षियों के इस धरती से सदा के लिए समाप्त होने आदि से कोई मतलब ही नहीं है ! यहाँ सबकुछ अनापशनाप, फिजूलखर्ची तथा अनर्गल कुकृत्य केवल पैसों के घोटाले करने और प्रिंट तथा दृश्य मिडिया में स्वयं को अधिकाधिक ग्लैमराइज्ड करने और प्रचारित करने का एक छद्म कुकृत्य के सिवा कुछ भी नहीं है ! यहाँ एक ही सिद्धांत सर्वोपरि है कि ‘इस देश के सभी जीव-जन्तु,परिंदे,पेड़-पौधे,जंगलक्षेत्र आदि सभी कुछ अपनी बला से समाप्त हो जाएं, हमारे पास रिश्वत और कमीशन का लाखों-करोडों की राशि प्रति माह आती रहे ‘..

परसों मेरे घर दो और गौरैयों के बच्चे हमारे घर के बिल्कुल बगल एक पैसों के लालची पड़ोसी की छत पर लगे एक मोबाइल टॉवर से निकलनेवाली तीव्र व प्राणघातक इलेक्ट्रो मैग्नेटिक रेडिएशन किरणों की वजह से अपने घोसले में ही दम तोड़ दिए ! एक माह पहले भी इसी मोबाइल टॉवर से निकलनेवाले प्राणघातक रेडिएशन की वजह से 12 गौरैयों के बच्चों की दर्दनाक मौत हो चुकी है ! इस संबंध में इस  मोबाइल टॉवर को हटवाने के लिए गाजियाबाद विकास प्राधिकरण को लगभग एक महीने पहले शिकायत दर्ज की गई थी,जीडीए के सबसे बड़े अधिकारी उसके वीसी से भी इस संबंध में बात हई थी,अधिकारी महोदय से उक्त प्राणघाती टॉवर हटाने का आश्वासन भी मिला था !

लेकिन गौरैयों के 15 बच्चों का जीवन समाप्त करने वाले इस मोबाइल टॉवर को आज तक नहीं हटाया गया, अब तो जीडीए के अधिकारी फोन तक को भी नहीं उठा रहे हैं ! गाजियाबाद स्थित वन विभाग का एक रेंजर तो रेडिएशन से गौरैयों की मौत को ही सिरे से खारिज़ करने का निर्लज्ज बयान हिन्दुस्तान,गाजियाबाद के 8-6-2021 के अंक में दे चुका है,इसलिए हम आज बहुत दुःखी मन से यह भविष्यवाणी करते हैं,कि गौरैयों की वर्तमानसमय की पीढ़ी के बाद हमारे यहाँ से सभी गौरैयों का अस्तित्व दुःखद रूप से समाप्त हो जाने की पूर्ण संभावना है !यही कटुसच्चाई और कटुयथार्थ है।-निर्मल कुमार शर्मा,

‘गौरैया एवंम् पर्यावरण संरक्षण तथा पत्र-पत्रिकाओं में वैज्ञानिक, राजनैतिक, सामाजिक, आर्थिक, अंधविश्वास व पाखंड के खिलाफ.. सशक्त,निष्पृह, बेखौफ व स्वतंत्र लेखन ‘,प्रताप विहार,गाजियाबाद, उप्र,

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Ramswaroop Mantri

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