मुकेश गर्ग
- वो मूर्खतापूर्ण नोटबंदी करके … सैकड़ों लोगों को लाइन में मार सकता है
- वो गलत तरीके से GST लगा कर … छोटे काम धंधे बर्बाद कर सकता है
- वो पहली लहर में “नमस्ते ट्रंप” करके … कोरोना फैला सकता है
- वो कोरोना को 21 दिन में हराने की बात करके … लोगों से ताली थाली बजवा सकता है
- वो बिना तैयारी के लॉकडाउन लगा कर … लाखों मजदूरों,महिलाओं, बच्चों को झुलसा देने वाली गर्मी में भूखे प्यासे हजारों किलोमीटर पैदल चलने पर और सड़कों पर, रेल की पटरियों पर मरने को मजबूर कर सकता है
- वो दूसरी लहर में बिना अस्पताल, बिना ऑक्सीजन मरते लोगों को छोड़ कर … चुनावी रैलियों में भीड़ बुला कर इतरा कर “दीदी ओ दीदी” कर सकता है
- वो महंगाई, बेरोजगारी और घटती आमदनी से त्रस्त जनता पर नए नए टैक्सों का बोझ डाल कर उसकी कमर और तोड़ सकता है
- चीन देश में घुस कर गांव बसा ले … पर वो “कोई नहीं घुसा” बोल कर चीनी अतिक्रमण को जायज ठहरा सकता है
- वो “देश नहीं बिकने दूंगा” का जुमला छोड़ कर … सरकारी संपतियों को अपने “पूंजीपति मित्रों” को कौड़ियों के दाम में बेच सकता है
- वो 2 करोड़ नौकरी हर साल दूंगा बोल कर … देश को 45 सालों की सर्वाधिक बेरोजगारी में धकेल सकता है
- वो “अच्छे दिन” लाऊंगा का सपना दिखा कर … जनता के “बुरे दिन” ला सकता है
क्योंकि उसे पता है कि उसने और उसके पूंजीपति मित्रों, बिकाऊ मीडिया, आईटी सैल और अंधभक्तों ने मिलकर … नफरत की अफीम चटा कर, मूर्खों की एक ऐसी जमात तैयार कर ली है … जो अपने दुख से परेशान नहीं है, बल्कि इस बात से खुश है कि “वो” टाइट है !
ये जमात अपने बच्चों को आधे पेट खाना दे देगी, उनके शरीर पर पत्ते बांध लेगी, उन्हें अनपढ़ रख लेगी, बेरोजगार रह कर 5 किलो अनाज के लिए लाइन में लग जायेगी … पर “वो” टाइट होना चाहिए !
और 5 किलो मुफ्त राशन लेकर बोलेगी … आयेगा तो मोती ही !
मुकेश गर्ग





