- भोपाल। प्रदेश के किसानों की मदद के लिए सरकार द्वारा की जाने वाली कृषक मित्र की नियुक्तियों में प्रभारी मंत्री राह का रोड़ा बन गए हैं। इस वजह से कई माह से प्रदेश में इन पर फैसला नहीं हो पा रहा है। दरअसल इनकी नियुक्ति की शर्तों में साफ तौर पर प्रावधान है कि प्रभारी मंत्री के अनुमोदन के बाद ही कृषक मित्र की नियुक्ती की जा सकेगी।
इस वजह से पूर्व मुख्यमंत्री कमलनाथ के कार्यकाल में की गई किसानों की कर्ज माफी की समस्याओं के निराकरण का काम भी शुरू नहीं हो पा रहा है। दरअसल मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान की मंशा किसानों को कर्ज माफी में किसानों की समस्याओं का ग्रामस्तर पर पताकर उन्हें विकास खण्ड स्तर के कृषि विभाग अधिकरियों को देकर उनका समाधान कराना है। इस समाधान की जानकारी इन्ही कषि मित्रों द्वारा किसानों के पास जाकर दी जाएगी। इन कृषि मित्रों की भर्ती के लिए कृषि विभाग द्वारा निर्देश भी जारी किए जा चुके हैं। कृषक मित्रों के लिए तय किए गए कर्तव्य और जिम्मेदारियों में कृषक हित समूह, खाद्य सुरक्षा समूह, कमोडिटी हित समूह के गठन का काम तो है ही साथ ही वे कृषि के साथ अनुषांगिक विभागों और किसानों के बीच कड़ी का काम भी करेंगे। खास बात यह है कि इनकी नियुक्ति को लेकर दिए गए निर्देशों में 26 जनवरी तक ग्राम सभाओं के माध्यम से पात्र युवाओं के चयन करने के निर्देश कलेक्टर, सीईओ जिला पंचायत, उप संचालक और संयुक्त संचालक किसान कल्याण तथा परियोजना अधिकारी आत्मा को दिए गए थे। जिसके बाद अधिकांश जिलों में चयन कर उनकी सूची तैयार कर ली गई है, लेकिन प्रभारी मंत्री न होने की वजह से उस पर अंतिम फैसला नहीं हो पा रहा है।
26 हजार कृषक मित्रों की होनी है नियुक्ति
हर दो गांवों में एक कृषक मित्र की नियुक्ति होनी है। इस हिसाब से प्रदेश के 52 हजार गांवो में 26 हजार कृषक मित्र की नियुक्ति की जानी है। यह कृषक मित्र स्थानीय निवासी ही होंगे।
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