भोपाल- अनुसूचित जाति जनजाति अत्याचार निवारण अधिनियम अर्थात एट्रोसिटी एक्ट को काला कानून बनाकर बताकर इसे समाप्त करने के लिए भोपाल में सपाक्स पार्टी के प्रतिनिधि मंडलों ने राष्ट्रीय अध्यक्ष डॉ हीरालाल त्रिवेदी के नेतृत्व में प्रधानमंत्री जी के नाम संभाग आयुक्त कविंद्र कियावत को तथा डॉ वीणा घाणेकर कार्यवाहक अध्यक्ष के नेतृत्व में राष्ट्रपति के नाम राज्यपाल को ज्ञापन सौंपा तथा कार्यालय में एक वर्कशॉप आयोजित की।
वर्कशॉप को संबोधित करते हुए राष्ट्रीय अध्यक्ष डॉ हीरालाल त्रिवेदी ने बताया कि यह एक्ट 1990 में तत्कालीन वीपी सिंह सरकार ने भाजपा और कांग्रेस के वोट बैंक को तोड़ने के लिए लागू किया था। 2016 आते-आते इस एक्ट का उद्देश्य पूर्ण हो गया। जब देश से छुआछूत एवं भेदभाव लगभग समाप्त हो गया तब केंद्र में वर्तमान भाजपा सरकार ने 2016 में इस एक्ट का नवीनीकरण कर इसमें साधारण अपराध भी जोड़ दिए जिससे इसका दुरुपयोग भी बढ़ गया और जमानत का प्रावधान नहीं होने से सामान्य पिछड़ा वर्ग एवं अल्पसंख्यक वर्ग प्रताड़ित होने लगा। 2 वर्ष के भीतर ही प्रताड़ित होने वालों का आंकड़ा दोगुना हो गया जब सुप्रीम कोर्ट में बड़ी संख्या में प्रकरण लगने लगे तब सुप्रीम कोर्ट ने यह निर्देश दिए कि साधारण अपराधों के मामले में गिरफ्तारी से पूर्व जांच कर ली जाए। परंतु इसके विरुद्ध सभी राजनीतिक दलों ने एकमत होकर सुप्रीम कोर्ट के फैसले को दरकिनार कर संसद में अगस्त 2018 में पुन: इस कानून के प्रावधानों को बहाल कर दिया! 17 अगस्त 2018 को इस कानून के कठोर प्रावधान फिर लागू हो गये। अतः हम प्रतिवर्ष 17 अगस्त को काले दिवस के रूप में मनाते हैं। उन्होंने प्रधानमंत्रीजी से अपील की कि वे इस कानून को या तो तुरंत समाप्त करें और यदि बहुत मजबूरी है तब 2016 के पूर्व की स्थिति बहाल की जाए। डॉ वीणा घाणेकर राष्ट्रीय कार्यवाहक अध्यक्ष ने अपने उद्बोधन में कहा कि जब देश के लोग आजादी के लिए संघर्ष कर रहे थे तब भी उन्हें रोकने के लिए ऐसा भयंकर काला कानून नहीं था जो बिना किसी कारण के भी किसी को भी प्रताड़ित कर सके। तथा केवल किसी को हाथ लगाने, पीछा करने या जाति का नाम लेने पर ही उसे जेल भेज दिया जाए और कोर्ट में केस लगने तक हुआ वह जेल में सड़ता रहे। उन्होंने बताया कि 2016 के संशोधन के बाद 80% मामले झूठे पाए जा रहे हैं तथा लगभग 80 हजार परिवार देश में प्रताड़ित हुए हैं। उन्होंने कहा कि एक तरफ सरकार हिंदुओं को एकत्रित करने की बात करती है और दूसरी तरफ जाति के नाम पर वह अलग-अलग कानून बनाकर उन्हें बांटने और तोड़ने का कार्य कर रही है। यदि ऐसे काले कानून को तत्काल समाप्त नहीं किया गया तो आने वाले वर्षों में इसके भयंकर परिणाम होंगे जिसकी कल्पना करना भी मुश्किल है।
इस अवसर पर अतिथि वक्ता के रूप में पूर्व विशेष न्यायाधीश श्रीराम शर्मा ने कहां की वह 7 वर्ष तक इस एक्ट के विशेष न्यायालय में रहे तथा उन्होंने इस कानून के प्रभावों को बड़ी निकटता से देखा है। इन मामलों में अधिकांश मामले ऐसे आते हैं कि पक्षकार शासन से भी राहत राशि ले लेते हैं और सामने वाले से भी पैसा ऐऺठ लेते हैं। कुछ मामलों में पुलिस भी मिल जाती है। कुछ मामलों में सत्ताधारी राजनेता एवं प्रभावशील लोग इसका दुरुपयोग भी करते हैं। 2016 में जब से इसमें साधारण अपराध जुड़े हैं और इन्हें गैर जमानती बनाया गया है यह न्याय के प्राकृतिक सिद्धांतों के पूर्णता प्रतिकूल है तथा इससे न्याय प्रणाली को पंगु बना दिया गया है। उन्हें आश्चर्य होता है कि जब सुप्रीम कोर्ट यह मानना है कि इसमें सुधार की आवश्यकता है फिर संसद में अमेंडमेंट कर उसे पलट देना गलत कार्य को कानूनी जामा पहनाना है। उन्होंने कहा कि उनका राजनीति से कोई संबंध नहीं है परंतु यह कहना चाहेंगे कि जब देश के राजनीतिक संसद में बैठकर भी न्याय पूर्ण कानून नहीं बना सकते तब न्यायालयों से न्याय कैसे मिलेगा? यह देश के लिए विचारणीय प्रश्न है।
इस अवसर पर सपाक्स पार्टी के पदाधिकारियों हरिओम गुप्ता, डॉ एसके जैन, शंखधर मिश्रा, विपिन तिवारी, विजय झा, अनिकेश पांडे, अरविंद मिश्रा, भूपेंद्र द्विवेदी, पीके मिश्रा, राघवेंद्र मिश्रा, प्रीति तिवारी, संजय यादव, राघवेंद्र सिकरवार, जयकुमार, ऋषि कुमार एवं संदीप यादव, कुलदीप सिंह, राघव बिसेन, घनश्याम केवट, पीयूष जैन आदि ने भी विचार व्यक्त किए। कार्यक्रम में बड़ी संख्या में लोग उपस्थित हुए। कार्यक्रम का संचालन बीके बक्शी प्रदेश महासचिव ने किया।






