सत्याग्रह से मजदूरों की मांग मनवाने का अनूठा मामला*
*भारत दोसी*
आज जब हड़तालों में कामकाज बंद होने पर हिंसा होती है, मजदूरों को बेरोजगार होकर भूखे रहना होता है ऐसे में बापू का यह प्रयोग अनुकरणीय है ।
अहमदाबाद की मिलों के मजदूर मजदूरी बढ़ाने की मांग को लेकर हड़ताल कर रहे थे श्रीमती अनुसूया देवी के आग्रह पर बापू भी इससे जुड़ गए । मिल मालिकों से मीठे रिश्ते थे पर बात मजदूरों के हितों की थी तो बापू कहा समझौता करते ? रोज एक वृक्ष के नीचे बैठक होती। संकल्प लेते । पर हड़ताल लम्बी चली, मजदूर टूटने लगे ।
एक दिन सवेरे का समय था सभा चल रही थी बापू के मुँह से अचानक निकला *” यदि मजदूर फिर से संकल्पबद्ध नहीं हुए और फैसला होने तक हड़ताल को चला न सकें तो मैं तब तक के लिए उपवास करूँगा । “* इसका असर हुआ मजदूर फिर जुट गए मालिक कमजोर हुए तीन दिन चले उपवास के बाद मांगे मान ली गई । इस बीच बापू ने मजदूरों के पेट भरने के लिए , काम के लिए साबरमती आश्रम मे रेत ढोने का काम दिया था ।





