यह केवल भगवे रंग का पेटेंट नहीं है। यह धर्म और राजनीति के कॉकटेल के व्यापार का ऱोज का खेल है।*
*बहुत दिनों से यह देखा जा रहा है तीनों मुस्लिम सितारों शाहरुख, आमिर और सलमान के खिलाफ कोई मौका मिलना चाहिए या कोई ढूंढ कर निकाल कर इन दिनों बीजेपी ब्रांड हिंदू नेताओं, संतों और संगठनों को विरोध करने का या इनकी फिल्मों के बहिष्कार करने के आव्हान का।
शाहरुख के बेटे को तो ड्रग के झूठे केस में फंसाकर बहुत प्रचार किया।
*दुनिया में अभी तक तो बड़ी से बड़ी ताकत का किसी रंग पर अधिकार या आधिपत्य तो हो नहीं सकता। असल में भगवा रंग और अश्लीलता तो बहाना है। 30-40सालों से फिल्मों में ऐसे दृश्य फिल्माए जाते रहे हैं। सेंसर बोर्ड उसके लिए वयस्कों की फिल्म का सर्टिफिकेट देता आया है। आपको देखना है तो नहीं तो मत जाइए। कल “प्रभात किरण” समाचार पत्र के संपादकीय में ऐसे तत्वों से बहुत सटीक प्रश्न किया है।*
*यदि यह दृश्य अक्षय कुमार या किसी इनके चहेतों पर फिल्माया होता तो क्या ये विरोध करते?*
*”दूसरा खजुराहो के शिव मन्दिरों पर हजारों बरस पहले जो दृश्य महिला – पुरूष मिलन के उकेरे गए हैं जिन पर किसी तरह का कपड़ा नहीं है कभी किसी ने उन्हें अश्लील कहा?*”
*बीजेपी की सरकार भी हर वर्ष वहां नृत्य उत्सव का आयोजन करती आ रही है।*
*बरसों से भोजपुरी फिल्मों के गाने तो ऐसे फिल्माए जाते रहे हैं कि आप बच्चों के साथ देख तक नहीं सकते।*
असली निशाना शाहरुख और दीपिका पादुकोण है।*
*ये साम्प्रदायिक नफ़रत फैलाने और राजनीतिक एजेंडा के शिकार है।*
*मध्यप्रदेश के गृह मंत्री नरोत्तम मिश्रा के मुंह से तो निकल ही गया कि दीपिका पादुकोण तो पहले जेएनयू के आंदोलनकारियों के बीच जाने का गुनाह कर चुकी है।*
*मध्यप्रदेश तो वैसे भी गुजरात और उत्तर प्रदेश की तरह राम राज्य की ओर बढ़ रहा है।*
*हिंदू संगठनों की शिकायत पर इंदौर शहर के एक लॉ कॉलेज के निर्दोष प्राचार्य इनामुल रहमान को लायब्रेरी में रखी एक किताब के लिए पहले निलंबित किया , जबकि उनका उस किताब से किसी प्रकार का संबंध नहीं।*न उनका लेखन से संबंध और न ही उनके कार्यकाल में वह पुस्तक खरीदी गई।*
*प्रथम द्रष्टया कैसे किसी कालेज का प्राचार्य यह जान पाएगा कि उसके कालेज की लायब्रेरी में कौन कौन सी पुस्तक रखी है और किसी पुस्तक में कोई आपत्तिजनक कुछ लिखा है निर्दोष व्यक्ति पर पुलिस की धाराएं गिनेंगे तो आश्चर्य चकित रह जाएंगे और उसके बाद यह भी पाएंगे कि मध्यप्रदेश की हाई कोर्ट ने भी जमानत नहीं दी अग्रिम जमानत सुप्रीम कोर्ट ने दी।*
*लोकतंत्र और देश के संविधान में विश्वास करने वाली विवेकशील जनता समझ गई कि मध्यप्रदेश में भी रामराज्य आ रहा है।*
*ठीक वैसे ही आदिवासियों के बीच में काम करने वाले या उनके हकों के लिए लड़ने वाले मानवाधिकार सामाजिक कार्यकर्ता तो रामराज्य के आंख की किरकिरी है। क्योंकि बीजेपी सरकार के कार्पोरेट मित्रों की नजर कृषि और जंगलों पर है।*
*इसलिए महाराष्ट्र में पहले दौर में जब रामराज्य था तो कोरेगांव में देशभर के आदिवासियों के पक्ष में लड़ने वाले और बरसों से उनके बीच काम करने वाले जितने भी सामाजिक कार्यकर्ता एकत्रित हुए थे सबको यूएपीए में बंद कर दिया।*
*ये सरकारें मेधा पाटकर के कैसे पिछे पड़ी है सारे नागरिक अधिकारों के प्रति सारे सजग नागरिक जानते हैं।*
*आएं अभी 15 नवंबर 2022 को बिरसा मुंडा की जयंती पर होने वाली एक घटना को याद करें।*
*राजनीतिक बदले की भावना से जयस के 5 सामाजिक कार्यकर्ताओं को झूठे आरोपों में गिरफ्तार किया गया।नमें आनंद राय जिन्होंने व्यापंम घोटाले को उजागर करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी वो भी शामिल हैं।
*19 सामाजिक कार्यकर्ताओं पर भी एफ आई आर दर्ज कर दी।*
अब वक्त आ गया है धर्म निरपेक्षता और अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता और संविधान प्रदत्त नागरिक अधिकारों की रक्षा करने में जनता के बीच प्रगतिशील समूह और राजनीतिक दल विश्वास करते हैं उन्हें इस लोकतंत्र को भीड़ तंत्र में परिवर्तित करने वालों के विरुद्ध एक साथ लड़ना होगा।*





