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भाजपा विधायक वासुदेव देवनानी किसी मुगालते में नहीं रहे…. मैं आठ हजार वोटों से हरा था, लेकिन मैंने 16 हजार बोगस मतदाताओं के नाम कटवाए-महेंद्र सिंह रलावता

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एसपी मित्तल अजमेर

वर्ष 2018 में अजमेर उत्तर विधानसभा क्षेत्र से कांग्रेस के प्रत्याशी रहे महेंद्र सिंह रलावता का कहना है कि भाजपा विधायक वासुदेव देवनानी को किसी मुगालते में नहीं रहना चाहिए। 2023 के चुनाव में वे फिर से कांग्रेस के प्रत्याशी होंगे और विधायक बनेंगे। रलावता ने बताया कि 2018 में भी उत्तर क्षेत्र में मतदाताओं की संख्या 2 लाख 8 हजार थी और अब 5 जनवरी 2022 को भी निर्वाचन विभाग ने दो लाख 9 हजार मतदाता माने हैं। क्या पिछले तीन वर्ष में सिर्फ एक हजार मतदाता ही बढ़े। जबकि हर वर्ष जनवरी में 18 वर्ष की उम्र वाले युवा मतदाता अपना नाम जुड़वाते हैं। रलावता ने कहा कि उनके चुनाव हारने का प्रमुख कारण बोगस मतदाता रहे। वे आठ हजार मतों से हारे, लेकिन उन्होंने चुनाव में उत्तर क्षेत्र की मतदाता सूची से 16 हजार मतदाताओं के नाम कटवाए। असल में ये 16 हजार मतदाता उत्तर क्षेत्र के नहीं थे, लेकिन देवनानी ने अपने मंत्री पद के प्रभाव से बाहरी लोगों के नाम जुड़वा लिए। अब चूंकि बोगस मतदाता नहीं है तो चुनाव निष्पक्ष होगा। रलावता ने कहा कि देवनानी को इस तथ्य को भी समझना चाहिए कि जनवरी 2018 में जब लोकसभा के उपचुनाव हुए थे, तब कांग्रेस प्रत्याशी रघु शर्मा को अजमेर उत्तर क्षेत्र से 7 हजार मतों की बढ़त मिली थी, लेकिन तब कांग्रेस को 57 हजार वोट मिले, जबकि नवंबर 2018 में विधानसभा चुनाव के दौरान मुझे 59 हजार 251 वोट मिले। जो अब तक के सर्वाधिक वोट हैं। इतना ही नहीं 2013 के चुनाव में कांग्रेस प्रत्याशी डॉ. श्रीगोपाल बाहेती मात्र 680 मतों से पराजित हुए। यानी गैर सिंधी उम्मीदवार के होते हुए भी कांग्रेस की स्थिति अच्छी रहती है। रलावता ने कहा कि सिंधी मतदाताओं की संख्या को लेकर देवनानी भ्रम फैलाते हैं। उत्तर क्षेत्र में मात्र 15 हजार सिंधी मतदाता है। रलावता ने बताया कि पूरे विधानसभा क्षेत्र में सिर्फ वार्ड संख्या 77 ही सिंधी बाहुल्य हे। मौजूदा समय में भाजपा के मात्र तीन सिंधी पार्षद हैं। उन्होंने कहा कि अजमेर उत्तर विधानसभा क्षेत्र जब पुनर्गठित हुआ, तब 45 प्रतिशत अजमेर पूरब, 40 प्रतिशत पुष्कर तथा मात्र 15 प्रतिशत अजमेर पश्चिम का था। इन विधानसभा क्षेत्रों में कभी सिंधी मतदाताओं का प्रभाव नहीं रहा। ऐसा नहीं कि कांग्रेस का सिंधी मतदाताओं में प्रभाव नहीं है। कांग्रेस को सिंधियों के वोट भी मिलते हैं, लेकिन देवनानी ने ऐसा भ्रम फैला रखा कि वे सिंधी मतदाताओं के दम पर ही चुनाव जीतते हैं। रलावता ने कहा कि जब 16 हजार बोगस मतदाता हट गए हैं, तब 2023 के चुनाव में देवनानी को हकीकत का पता चल जाएगा। जहां तक कांग्रेस में उम्मीदवारी का सवाल है तो उत्तर क्षेत्र के नागरिक जानते हैं कि हारने के बाद भी मैं लगातार सक्रिय रहा हंू। मुख्यमंत्री की बजट घोषणाओं के अनुरूप करोड़ों रुपए के विकास कार्य करवाए हैं। जो क्षेत्र उपेक्षित रहे उसमें भी विकास कार्य करवाए। पार्टी ने डॉ. श्रीगोपाल बाहेती, श्रीमती नसीम अख्तर, हेमंत भाटी को भी दो-दो बार चुनाव लड़ने का अवसर दिया हैं। मैंने तो सिर्फ एक बार ही चुनाव लड़ा है। ऐसा कोई कारण नहीं है, जिसकी वजह से मुझे टिकट नहीं मिले। मैं उन 59 हजार 251 मतदाताओं का आभारी हंू जिन्होंने मुझे गत चुनाव में वोट दिया। रलावता ने कहा कि समझ में नहीं आता कि वासुदेव देवनानी अपनी उम्र कम क्यों बता रहे हैं? क्या उम्र की वजह से भाजपा टिकट कटने का डर है? देवनानी चुनाव नामांकन में अपनी जन्म तिथि 11 जनवरी 1948 बताई है। इस हिसाब से देवनानी की उम्र 74 वर्ष है। मोबाइल नंबर 9414497073 पर अजमेर उत्तर क्षेत्र की और अधिक जानकारी महेंद्र सिंह रलावता से ली जा सकती है।

Ramswaroop Mantri

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