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*कामुकता एवं सम्भोग की उच्चता पर काले या दिव्यांग तन का असर नहीं पड़ता!*

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     ~ पवन कुमार ‘ज्योतिषाचार्य’

* पतिहंता सभी स्त्रियों के प्रेमी कुरूप और कबाड़

* कामुकता का बेस चमड़ी का रंग, उम्र या धन नहीं, भीतरी आग 

* वास्तविक प्रेम और ईश्वरदायी सम्भोग का बेस आंतरिक गर्मी

* एक ही अनिवार्यता : स्त्री ठंडी न हो, पुरुष उसे बेसुध होने तक ले

* निःशुल्क क्षमता विकास के लिए +91 99977 41245 व्हाट्सप्प.

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    इन दिनों प्रेमी की मदद से पति के क़त्ल का ट्रेंड है. जितने भी केस अब तक सामने आये हैं, सभी में पति सुंदर थे. वे अच्छे कमाऊ भी थे. और प्रेमी? सभी में प्रेमी असुंदर है और कबाड़ी टाइप का है. 

   इन पत्नियों के कई प्रेमी तो ऐसे हैं, जिनपे थूकना तक आप पसंद नहीं करेंगे. तो प्रेम और सेक्ससुख के फैक्टर पर रूप- रंग- उम्र- धन देखने वाले मूर्खो! सटिस्फैक्शन में इन सबकी कोई भूमिका नहीं होती है.

    आप व्हाइट तरबूज को लो या ब्लैक को, अंदर से वह लाल और स्वादिस्ट ही निकलेगा. स्त्री या उसकी योनि कितनी भी काली हो, भीतर से गुलाबी ही होगी. लिंग की चमड़ी कैसी भी हो, उसके नीचे का हिस्सा सबका एक जैसा ही होता है. खतना वालों पर यह सिद्धांत लागू नहीं होता. वे तो खुरदरे ही होते हैं.

  अगर इंसान रोगी नहीं है, अगर उसमें आग है, अगर उसमें कामुकता और उसकी अभिव्यक्ति की अदाएँ हैं, अगर उसमें पर्याप्त यौनिकता है तो : वह कितना ही ब्लैक हो, बदसूरत या उम्रदराज हो, यहां तक की दिव्यांग भी हो — सेक्स के मामले में वह योग्यतम ही सावित होगा.

        विगत वर्ष चेतना मिशन के एक शिविर के दौरान साक्षात्कार में, जर्मनी की 29 वर्षीया विदुषी साशा ने कहा, “मैं विकलांग हूँ गंभीर रूप से. कोई सामान्य नौकरी नहीं कर सकती. सामान्यत: दस मिनट झुकना मेरे लिए सहज नहीं, लेकिन सेक्स में घंटे भर भी झुकना- सबकुछ करना और करवाना सहज हो जाता है.”

    इसी तरह हर अंग से स्वस्थ लेकिन काली-कलूटी साइंटिस्ट मिरांडा एलिजाबेथ कहती हैं, “मैं इतनी कोमल हूँ कि, एक घंटे खड़ी रहकर काम नहीं कर सकती, लेकिन इंटिमेँट होने में मैं एक घंटे के लिए झुक सकती हूँ. मुझे इतना प्यार और कामुक सेक्स मिलता है कि रात भर भी ऐक्टिव रह सकती हूँ. मेरा बॉडी पार्टनर मेरी तरह ब्लैक नहीं है. वह बेहद गोरा और सुंदर है. मेरी कामुकता का कायल है वह. मेरे से अधिक सुंदर उसे कोई लग ही नहीं सकती.”

        स्वस्थ कामुकता ‘बीज’ बन जाती है, प्रेम ‘फूल’ बन जाता है, करुणा ‘स्व-बोध’ ‘के लिए समर्पण बनती है और सम्भोग परमानंद यानी ईश्वर.

      किसी चीज में आग पकड़ती है तो वह जलती है. एक बार पूरी तरह जल जाने के बाद वह दोबारा नहीं जल सकती. लेकिन जीवित इंसान का मामला अलग है. जो लोग सच्चे प्रेम या कामुकता में जल रहे होते हैं, वे आग बुझ जाने के बाद भी, ठंडे पड़ जाने के बाद भी बार-बार खुद को आग से पकड़वा लेते हैं।

      अगर स्त्री पुरुष की कामुकता मज़बूत है, पुरुष सेक्सुअल लेबल पर नामर्द नहीं है, स्त्री भी ठंडी नहीं है तो चमत्कार होता है. रूप- रंग, कद- पद आधारहीन है. यदि दोनों समग्रता से संलग्न होते हैं और एक- दूसरे को सर्वश्रेष्ठ और सर्वस्व देने के लिए पूरी उत्तेजना का उपयोग करते हैं तो या तो दोनों एक साथ अपने चरमोत्कर्षी-स्खलन तक पहुंचेंगे या यह 30+ मिनट तक चलेगा या दोनों एक साथ बेसुध होंगे। तब व्यक्ति शरीर या अस्तित्व से परे परम के अनुभव में प्रवेश करता है।

     ध्यानिष्ठ व्यक्ति सेक्स के दौरान जब तक चाहे, तब तक अपने वीर्य को डिस्चार्ज नहीं होने दे सकता है. मेडिटेटिव सेक्स थेरेपी के दौरान मेडिटेशन ट्रेनर डॉ. विकास मानव एक-एक घंटे का सात राउंड तक भी दे सकते हैं. बॉडी के तौर पर उन्हें सुंदर नहीं, बिल्कुल ‘असुंदर’ कहेंगे आप. बूढ़े भी कहेंगे. लेकिन कामुकता संपन्न लड़की या स्त्री की दृष्टि में उनसे अधिक सुंदर और जवान कामदेव भी नहीं हो सकते. गर्ल्स-फीमेल्स पार्टनर के ‘पौरुष’ के लिए या खुद के सुपर आर्गेज्मिक मल्टीपल सटिस्फैक्शन के लिए व्हाट्सप्प +91 99977 41245 पर संपर्क कर सकती हैं.

       देश ही नहीं, विदेश तक की ऐसी-ऐसी गर्ल्स-फीमेल्स उनकी सेवा लेती हैं कि आपकी ऑंखें चौंधिया जाएँगी. वर्जिन गर्ल्स तो सबसे अधिक उनकी क्रेजी हैं. तमाम समझदार पतियों द्वारा अपनी पत्नी को और माताओं द्वारा अपनी पुत्री को उनसे सटिस्फैक्शन दिलाया जा रहा है जिससे वे रोगी या बदचलन बनकर बर्बाद नहीं हों.  उनका कोई भी शिविर अटेंड करके आप सच देख सकते हैं.

     स्वस्थ कामुकता का बेस बॉडी नहीं, भीतर की आग है, सोल है. यहां व्यूटी नहीं, सेक्सुअलिटी अहम होती है. इसमें चमड़ी का रंग नहीं, भीतर की गर्मी मायने रखती है. 

   ऐसे सेक्स में नर-मादा दोनों की आत्माएँ विलीन होकर एक हो जाती हैं, एक क्षण के लिए स्वयं ब्रह्मांडीय आत्मा बन जाती हैं। केवल आत्मा ही शेष रहती है. ‘ब्रह्मांडीय आत्मा’ या ‘ईश्वर’ स्त्री-पुरुष दोनों को उस क्षण में दिखता है। इसे ही अर्धनारीश्वर होना कहते हैं. (चेतना-स्टेमिना विकास मिशन).

Ramswaroop Mantri

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