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ब्रज की होली:कैसे शुरू हुई लड्डू मार और लट्ठमार होली? 

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 भारत में होली का नाम आते ही सबसे पहले ब्रज की होली का जिक्र होता है. यहां की होली सिर्फ रंगों का त्योहार नहीं, बल्कि प्रेम, भक्ति और परंपरा का अद्भुत संगम है. विशेष रूप से बरसाना और नंदगांव की लड्डू मार और लट्ठमार होली देखने के लिए दुनिया भर से लोग आते हैं. आइए जानते हैं कैसे शुरू हुई यह परंपरा और साल 2026 में ये कब मनाई जाएगी.

ब्रज की होली पूरे देश ही नहीं बल्कि दुनिया भर में अपनी अनोखी परंपराओं और रंग-बिरंगी संस्कृति के लिए प्रसिद्ध है. खास तौर पर बरसाना और नंदगांव की लड्डू मार होली और लट्ठमार होली देखने के लिए हर साल लाखों श्रद्धालु और पर्यटक यहां पहुंचते हैं. मान्यता है कि इन दोनों होलियों की परंपरा करीब 5000 साल पुरानी है, जो भगवान श्रीकृष्ण और राधा रानी के प्रेम, हंसी-मजाक और ठिठोली से जुड़ी हुई है.

लड्डू मार होली की परंपरा
बरसाना के श्रीजी मंदिर में खेली जाने वाली लड्डू मार होली की कहानी बहुत दिलचस्प है. यह लट्ठमार होली से ठीक एक दिन पहले मनाई जाती है.

पौराणिक कथा
मान्यता है कि द्वापर युग में जब भगवान कृष्ण ने नंदगांव से अपने एक सखा (ग्वाले) को होली का निमंत्रण लेकर बरसाना भेजा, तो राधा रानी के पिता ने उसे स्वीकार कर लिया. खुशी के इस मौके पर राधा जी की सखियों ने ग्वाले पर गुलाल डाला. जब उसे खाने के लिए लड्डू दिए गए, तो वह खुशी में झूम उठा और हंसी-मजाक में ग्वालों ने एक-दूसरे पर लड्डू फेंकना शुरू कर दिया. आज भी इसी याद में मंदिर के सेवायत महल की अटारी से भक्तों पर लड्डू बरसाते हैं. भक्त इन्हें प्रसाद के रूप में पाते हैं और नाचते-गाते इस उत्सव का आनंद लेते हैं.

लट्ठमार होली की परंपरा
लड्डू मार होली के अगले दिन बरसाना की गलियां लट्ठमार होली की गवाह बनती हैं. यह परंपरा भगवान कृष्ण और राधा रानी के बीच की मधुर ‘ठिठोली’ का प्रतीक है.

कैसे हुई शुरुआत?
कथाओं के अनुसार, कान्हा अपने मित्रों के साथ नंदगांव से बरसाना होली खेलने जाते थे. वहां वे राधा जी और उनकी सखियों को छेड़ते और सताते थे. इसके जवाब में गोपियां उन्हें प्रेमपूर्वक डराने और भगाने के लिए लाठियों का इस्तेमाल करती थीं.

आज का स्वरूप
आज भी इस परंपरा को वैसे ही निभाया जाता है. नंदगांव के पुरुष बरसाना आते हैं और बरसाना की महिलाएं उन पर लाठियां बरसाती हैं. पुरुष खुद को ढाल से बचाते हैं. खास बात यह है कि इतनी लाठियां बरसने के बाद भी किसी के मन में कड़वाहट नहीं होती, बल्कि चारों ओर ‘राधे-राधे’ की गूंज सुनाई देती है.

साल 2026 में कब है होली?
लड्डू मार होली 24 फरवरी 2026 बरसाना (श्रीजी मंदिर)
लट्ठमार होली 25 फरवरी 2026 बरसाना
लट्ठमार होली 26 फरवरी 2026 नंदगांव

Ramswaroop Mantri

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