राजस्थान में 11 मार्च को 4000 पेज की चार्जशीट फाइल की थी। इस चार्जशीट से खुलासा हुआ है कि पिंकी के साथी दौसा के एसडीएम रहे पुष्कर मित्तल ने आरोप्वत के लिए हाईवे के मुआवजे की फाइल एक साल तक दबाए रखी। यहां तक कि किसानों को मिलने वाले मुआवजे के चेक भी बनकर आ गए, लेकिन मित्तल ने रिश्वत न मिलने की वजह से उन पर साइन नहीं किए। नेशनल हाइवे अथॉरिटी ऑफ इंडिया (NHAI) ने मित्तल को सालभर में 30 चिट्ठियां लिखकर किसानों को मुआवजा देने को कहा, लेकिन मित्तल ने एक भी चिट्ठी का जवाब नहीं दिया।
एसीबी की चार्जशीट के मुताबिक, पुष्कर मित्तल ने हाईवे बनाने वाली कंपनी से 13 जनवरी को सरकारी आवास पर 5 लाख रुपये लिए थे। कंपनी का प्रतिनिधित्व रिश्वत का पैसा लेकर एसडीएम के आवास पर पहुंचा, उसे इशारा कर अंदर बुलाया और बैठने के लिए कहा। उपस्थिति ने जैसे ही कहा कि पैसा लाया गया, तो यह सुनते ही मित्तल ने लपक कर कहा कि ला .. उसने कागज में लिपटे हुए 5 लाख रुपए (जिनमें दो-दो हजार के 250 नोट थे) पुष्कर मित्तल को दिए। मित्तल ने रुपयों का पैकेटबोर्ड में रख दिया। इसके थोड़ी ही देर बाद एसीबी ने उन्हें ट्रैप कर लिया।
किसानों का 147 करोड़ रुपये का मुआवजा रोके ने रखा
चार्जशीट के मुताबिक, भारतमाला प्रोजेक्ट में हाईवे कंपनी से रिश्वत लेने के लिए पुष्कर मित्तल ने हर काम अटैंड किया था। इसमें न हाईवे एक्ट की चिंताओं की और न भारत सरकार के निर्देशों की। जमीन अधिग्रहण के बदले किसानों को लगभग 147 करोड़ रुपये के चेक जारी किए गए थे। मित्तल ने ये सभी चेक रोक दिए। NHAI ने 25 दिसंबर 2019 से 28 दिसंबर 2020 तक हर दसवें दिन उन्हें चिट्ठी लिखकर मुआवजा जारी करने को कहा, लेकिन मित्तल ने सभी को अनसुना कर दिया।
ट्रैप होने पर एसीबी के सामने उर्ड का बहाना किया
पुष्कर मित्तल ने 13 जनवरी को अपने सरकारी आवास पर हाईवे कंपनी के प्रतिनिधियों से आरोप्वत ली थी। इसके थोड़ी देर बाद एसीबी ने उन्हें ट्रैप कर लिया। एसीबी के इंस्पेक्टर ने पूछा, ‘अभी तक 5 लाख रुपये थे इनका स्रोत क्या है?’ इस पर मित्तल ने कहा कि हाईवे कंपनी का प्रतिनिधि मुझसे पैसे उधार लेता है, आज वह पैसा लौटाने आया है। ‘ इस पर कंपनी के प्रतिनिधियों ने कहा, ‘एसडीएम झूठ बोल रहे हैं, कोई उधार नहीं लिया गया था। जमीन का कब्जा दिलवाने और किसानों को मुआवजा समय पर देने के एवज में आरोप्वत का पैसा दिया है।)
नए एसडीएम ने हाथों-हाथ बंधे मुआवजे
रिश्वत के लिए सटकर किसानों को मुआवजा नहीं बांटने वाले मित्तल जब एसीबी की जांच में फंसे और उन्हें हटा दिया गया, तब जाकर किसानों को मुआवजा बंट पाया गया। दौसा में पदस्थ किए गए नए एसडीएम बृजेंद्र मीणा ने ही किसानों के मुआवजे के चेक पर दस्तखत किए। यह समझा जा सकता है कि रिश्वत लेने के लिए पुष्कर मित्तल ने किसानों को उनके हक से दूर रखा।
घूसकांड के 3 किरदारों में से 2 अभी तक जेल में
रिश्वत के लिए पुलिस और प्रशासनिक अधिकारियों के इस गठजोड़ के कई खुलेसे हो रहे हैं। दौसा के तत्कालीन एसपी मनीष अग्रवाल और एसडीएम पुष्कर मित्तल अभी जेल में हैं, जबकि तीसरे आरोपी एसडीएम पिंकी मेना को जमानत मिल गई है। पूरे मामले में तीनों अफसरों की मिलीभगत थी। पिंकी मीना ने खुद पैसे नहीं लिए, इसलिए उसके पैसे बरामद नहीं हुए। तीनों अफसर वर्तमान में सस्पेंड हैं।




