इंदौर के बारे में कहा जाता है कि यह शहर एक दौर का गवाह है इसने कई उतार-चढ़ाव देखे हैं. जब देश गुलामी की बेड़ियो में था तब भी अंग्रेज यहां शासन नहीं कर पाए. इसके आसपास कुछ छावनियां बनाकर वह जरूर रहते थे. इसी की गवाही देती इमारत यहां पर मौजूद है जिसका नाम है फूटी कोठी. इसे बनवाया था होलकर राजवंश ने ताकि अंग्रेज ऐसी कोई हिमाकत न कर सके जिससे शहर वासियों की सुरक्षा पर खतरा पैदा हो.40 साल पहले होलकर परिवार के एक ट्रस्ट ने फूटी कोठी को बेच दिया था।… फूटी कोठी की पहचान उसकी खुली छत और अधूरी सीढ़ियों के कारण है
वैसे यहां पर अंग्रेजों का सीधा शासन नहीं था क्योंकि यह एक प्रिंसली स्टेट था और यहां पर होलकर राजवंश का शासन था. इसी कारण अंग्रेजों की यहां कभी नहीं चली. लेकिन ब्रिटिश सेवा की चालबाजी और धोखेबाजी से बचने के लिए होलकर राजवंश ने शहर की सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए इस कोठी का निर्माण कराया था. ताकि शहर से करीब 20 किलोमीटर दूर महू पर नजर रखी जा सके और किसी अप्रत्याशित हमले का तत्काल प्रभाव से जवाब दिया जा सके.
फूटी कोठी की खासियत
इस कोठी का निर्माण महाराज शिवाजी राव होल्कर ने सन 1825 में शुरू कराया था जिसका काम 1875 तक चला. निर्माण के दौरान ही अंग्रेजों को इसकी जानकारी मिल गई थी जिसकी वजह से उन्होंने इसका काम रुकवा दिया और यह इमारत अधूरी रह गई. अगर आप गौर से इसका वीडियो देखेंगे तो भारतीय शैली में बनी यह दो मंजिल की यह इमारत छत विहीन है.
पूरी इमारत में गोलाकार स्तंभ है और ऊपर से यह चतुष्कोणीय है. जिन पर बार वही कीचक आकृतियों का अंकन है, निर्माण के दौरान हर एक स्तंभ को अर्क द्वारा जोड़ा गया. इस विशाल कोठी में 365 कमरे हैं जिनके बारे में कहा जाता है कि इसमें से हर एक का निर्माण एक दिन में किया गया. कोठी बनाने के लिए उस वक्त इंग्लैंड से पत्थर मंगाया गया था. कोठी के आसपास अलग-अलग देवी देवताओं के करीब 18 मंदिर है.
पूरे इंदौर में जाती थी गुफाएं
बताया जाता है कि कोठी से शहर के अलग-अलग हिस्सों में गुफाएं जाती थी. एक गुफा राजवाड़ा एक गुफा हवा बंगला जगह पर जाती थी. इसके अतिरिक्त एक गुफा महू तक बन रही थी जिसे अंग्रेजों ने भनक लगते ही रुकवा दिया था.आज फूटी कोठी न केवल शहर की बल्कि अंग्रेज दौर में भी होलकर शासन के बल की परिचायक है जो अटल है आदि है और बताती है कि मालवा की धरती अंग्रेजों को सीधी चुनौती देती थी.
इंदौर के इस फूटी कोठी को कौन नहीं जानता। कभी भूतिया मानी जाने वाली इस फूटी कोठी पर रौनक नजर आएगी। 40 साल पहले होलकर परिवार के एक ट्रस्ट ने फूटी कोठी को बेच दिया था। अब यह कोठी पुरातत्व विभाग की संपत्ति होगी। इसका नोटिफिकेशन जल्द ही जारी होगा। प्रशासन तीन साल से इस जमीन को पाने के लिए प्रयास कर रहा था।
1886 में होलकर शासन काल में फूटी कोठी का निर्माण हुआ था। महाराजा तुकोजीराव की इच्छा थी कि इस स्थान से वे अंग्रेजों की सैन्य छावनी को नजर अंदाज कर सकें और जरूरत पड़ने पर इसे हमला किया जा सके। लेकिन, अंग्रेजों को इसकी भनक लग गई और निर्माण को रोक दिया गया। फूटी कोठी की पहचान उसकी खुली छत और अधूरी सीढ़ियों के कारण है। खंडहर पड़ी इस कोठी रात में डरावनी लगने लगती है, इसलिए लोग इसे फूटी कोठी कहने लगे थे और यहां के डरावने किस्से तक बनाने लगे थे।
वहां के लोग ने तो इसे लंबे समय तक खाली देखकर उसे भूतिया कोठी कहना शुरू कर दिया था। लोगों के डर को दूर करने के लिए इस कोठी में एक मंदिर भी बनवाया गया। पिछले दस वर्षों से यह कोठी मैरेज गार्डन के रूप में उपयोग किया जा रहा था। इसे बनवाने के लिए इंग्लैंड से राज मिस्त्री आए थे, लेकिन उन्होंने अपना काम पूरा नहीं किया।





