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*तुलसी विवाह के दिन इन उपायों से कन्याओं का जल्द बनता है विवाह योग*

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 सनातन धर्म में तुलसी विवाह पर्व का बड़ा महत्व है. यह त्योहार बड़ी धूमधाम से मनाया जाता है. कार्तिक माह की एकादशी तिथि को देवउठनी मनाई जाती है. इस दिन तुलसी विवाह किया जाता है. तुलसी विवाह के साथ ही सनातन परंपरा के अनुसार सभी शुभ कार्यों की शुरुआत हो जाती है. तुलसी विवाह का अपना अलग महत्व है. इससे जुड़े कई लाभ हैं. देवउठनी एकादशी के नाम से भी इस पूजा की पहचान होती है. पढ़िए तुलसी विवाह की पूजा-विधि मुहूर्त और लाभ क्या है.

तुलसी पर जल अर्पित कर नहीं करनी चाहिए पूजा

ज्योतिषाचार्य डॉ. वैभव आलोणी बताते हैं कि “देवउठनी एकादशी यानी की तुलसी विवाह के दिन सभी शुभ कार्यों की शुरुआत होती है. खास बात यह है इस दिन तुलसी विवाह होता है. तुलसी विवाह के दिन तुलसी के पौधे पर जल अर्पित कर पूजा नहीं करनी चाहिए, क्योंकि इस दिन माता लक्ष्मी भगवान विष्णु के लिए निर्जला व्रत रखती हैं. अगर इस पूजा के दौरान किसी ने तुलसी पौधे में जल अर्पित किया तो माता का व्रत खंडित हो जाता है और व्रतधारी महिला पुरुषों को इसका फल नहीं मिलता है.”

शालिग्राम और माता तुलसी का कराया जाता है विवाह

ज्योतिषाचार्य बताते हैं कि भगवान देवशयनी एकादशी के बाद शयनमुद्रा में चले जाते हैं. जिसके बाद सभी शुभ मांगलिक काम वर्जित होते हैं. देव उठनी एकादशी तुलसी विवाह के दिन भगवान शयनमुद्रा से जागते हैं और शुभ कामों की शुरुआत होती है. इस दिन भगवान विष्णु के प्रतीक शालिग्राम और माता तुलसी के पौधे का विवाह करवाया जाता है. मान्यता है कि ऐसा करने से शादीशुदा जीवन खुशहाल रहता है और आने वाली सभी बाधाएं दूर होती हैं.

कुंवारी कन्याओं के जल्दी बनते हैं विवाह योग

ज्योतिषाचार्य के अनुसार, इस साल यह पर्व 2 नवंबर को मनाया जाएगा, जिसकी तिथि सुबह 7:31 बजे शुरू होकर 3 नवंबर तक रहेगी. इस दिन पूजा का शुभ मुहूर्त सुबह 5:07 बजे से पूरे दिन तक रहेगा. इस अवसर पर माता तुलसी और भगवान शालिग्राम की विधि विधानपूर्वक पूजा-आराधना की जाती है और उनका विवाह कराया जाता है. मान्यता है कि इस दिन अगर कुंवारी कन्या कुछ खास उपाय करती हैं, तो उनके विवाह के योग जल्दी बनते हैं.

गन्ने का बनाया जाता है मंडप

तुलसी विवाह के दिन गन्ने से विवाह का मंडप तैयार किया जाता है. इसके बाद बेर, चने की भाजी और आंवला से भगवान का पूजन किया जाता है. तुलसी जी को गन्ना अधिक प्रिय है. इसलिए गन्ने का मंडप बनाया जाता है. तुलसी पूजा में हल्दी की गांठ, शालिग्राम, गणेशजी की प्रतिमा, श्रृंगार सामग्री, विष्णु जी की प्रतिमा, बताशा, फल-फूल, दीप हल्दी, हवन सामग्री, गन्ना, लाल चुनरी, अक्षत, रोली, कुमकुम, तिल, घी, आंवला, मिठाई का इस्तेमाल होता है.

Ramswaroop Mantri

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