भोपाल)। हाल ही में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा अपने निर्धारित कार्यक्रम मन की बात के दौरान बैतूल जिले के जिन ग्रामीणों से चर्चा की तो उन ग्रामीणों ने प्रधानमंत्री को बताया कि उन्होंने ही नहीं बल्कि पूरे ग्राम के ग्रामवासियों में वैक्सीन को लेकर फैले भ्रम के कारण किसी ने वैक्सीन नहीं लगवाई, प्रधानमंत्री की इन ग्रामीणों से हुई चर्चा के बाद यह बात लोग चटकारे लेकर करते नजर आ रहे हैं कि जिस बैतूल को राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ नागपुर से मुख्यालय हटाकर बैतूल में कायम करने की योजना को साकार करने में लगा हुआ है यही नहीं वर्षों से और खासकर शिवराज सिंह चौहान के शासनकाल में यदि संघ प्रमुखों की मध्यप्रदेश में सक्रियता पर नजर डालें तो संघ प्रमुखों ने बैतूल में ज्यादा रुचि दिखाई है,
यही नहीं उसी बैतूल में जिस जिले के ग्रामीणों ने प्रधानमंत्री से वैक्सीन के बारे में भ्रम फैलने की वजह से वैक्सीन न लगवाने की बात कही थी उसी बैतूल में शिवराज सिंह सरकार के प्रशासनिक मुखिया के पुत्र कलेक्टर हैं, तो वहीं मुफ्त में वैक्सीन लगाने का दौर शुरू होने के पहले भाजपा के नेता पीले चावल लेकर लोगों को वैक्सीन लगवाने के लिये प्रेरित करने के लिये घूमने की भी खूब खबरें सुर्खियों में रही हैं, यही नहीं बैतूल भाजपा का गढ़ रहा है, बैतूल में यह सब परिस्थितियां होने के बाद भी ऐसा क्या कारण है कि न तो जिले के कलेक्टर जिले के प्रशासनिक मुखिया के पुत्र हैं वह और उनके अधिकारी ही नहीं भाजपा के वह नेता जो वैक्सीन लगवाने के लिये पीले चावल देकर न्योता देने का ढिंढोरा पीट रहे हैं और जिस जिले में संघ अपना मुख्यालय नागपुर से हटाकर बैतूल में स्थापित करने की योजना बनाये हुए हो इन सब परिस्थितियों के बाद ऐस कौन सा इस जिले ही नहीं बल्कि गांव के ग्रामीणों पर जिन राहुल गांधी को वैक्सीन को लेकर कोसने वाले शिवराज सिंह और उनके नेता यह समझ रहे हैं कि उनके द्वारा वैक्सीन के बारे में जो भ्रम पैदा किया गया उसका प्रभाव उस गांव के रहवासियों पर पड़ गया जिससे यह सारी मोदी और शिवराज की फौज इस भ्रम को तोड़ नहीं पाई, इसको लेकर भी तरह-तरह की चर्चायें व्याप्त हैं तो लोग यह भी कहने से नहीं चूक रहे हैं कि लगता है मुफ्त-मुफ्त वैक्सीन लगवाने का जो प्रचार प्रधानमंत्री मोदी से लेकर भाजपा के नेता करते नजर आ रहे हैं उससे लोग ज्यादा भयभीत हैं, हालांकि जानकार लोग यह भी कहने से नहीं चूक रहे हैं कि बैतूल के ग्रामीणों ने वैक्सीन को लेकर जो बात प्रधानमंत्री से कही उससे तो यही लगता है कि प्रदेश में दमोह उपचुनाव में भाजपा को मिली पराजय के बाद जो भाजपाईयों में भय व्याप्त है और उस भय को लेकर वह कांग्रेस को कोसने में लगे हुए हैं उससे तो यही स्पष्ट होता है कि भाजपा की साख अब शिवराज के मुख्यमंत्री रहते भाजपा के ग्राफ में गिरावट आ रही है यही वजह है कि सत्ता के गलियारे में मुख्यमंत्री शिवराज को बदले जाने की चर्चायें सुर्खियों में बनी हुई हैं, कुल मिलाकर प्रधानमंत्री के द्वारा बैतूल के ग्रामीणों को वैक्सीन को लेकर की गई चर्चा के बाद प्रदेश में तरह-तरह की चर्चायें लोग चटकारे लेकर करते नजर तो आ ही रहे हैं साथ ही दबी जुबान से वह यह भी कहने से नहीं हिचक रहे हैं कि प्रदेश में बैतूल की घटना ने जहां मुख्यमंत्री, भाजपा के मुखिया और उनके संगठन के साथ-साथ प्रशासनिक मुखिया और उसकी कार्यशैली को भी उजागर कर दिया है इन सभी के चलते बैतूल जैसे जिले के ग्रामीणों का वैक्सीन के बारे में भ्रम तोडऩे में यह सभी फौज नहीं कर सकी?





