हरनाम सिंह
प्रतिवर्ष अनुसार आगामी वर्ष 2026 के लिए देश की प्रमुख कला, संस्कृति, अध्ययन को समर्पित मध्य प्रदेश के इंदौर में स्थित रूपांकन * संस्था ने बिना किसी औपचारिकता के अपना कैलेंडर जारी कर दिया है।
कैलेंडर की थीम के बारे में प्रबुद्ध पाठकों के मन में सदैव जिज्ञासा बनी रहती है। रूपांकन की टीम ने वर्ष 2026 के कैलेंडर को देश-विदेश की विभिन्न भाषाओं, बोलियों की कहावतों से सजाया है। रूपांकन के कैलीग्राफी स्टूडियो में कैलेंडर के लिए जे राज दासानी, मुकेश बिजौले ने पेंटिंग की है। ग्राफिक्स पवन वर्मा की है। मार्कर्ट्स प्रिंट द्वारा प्रकाशित कैलेंडर की परिकल्पना की टीम में श्री प्रकाश, पिंकल हार्डिया, और कनक खंडेलवाल की भी महत्वपूर्ण भूमिका रही है। सर्व विदित है कि इस टीम के निर्देशक अशोक दुबे हैं, जो सदैव पाश्र्व में रहकर काम करने में भरोसा रखते हैं।
रूपांकन कैलेंडर की लोकप्रियता कलात्मक अभिव्यक्ति के साथ ही उसकी थीम भी है। वर्ष 2026 के लिए थीम “कहावतें हैं। पीछे मुड़कर देखें तो गत वर्ष 2025 में भारत के संतो की इबादते थी। बुल्ले शाह, रैदास, तिरुवल्लुवर, गरीबदास, हाली, मलूक दास, चंडी दास, महावीर, नरसी मेहता, कबीर, मीरा, अमीर खुसरो के उद्दरण प्रकाशित हुए थे।
इसी तरह वर्ष 2024 में रचनाकार थे महमूद दरवेश, हो ची मिन्ह, गुलजार, मार्क ट्वेन, भवानी प्रसाद मिश्र।
वर्ष 2023 की इबारत में सहायक बने क्रांतिकारी कवि पाश, चिनुआ अचेब, मायकोवस्की, शैलेंद्र, कैफ़ी आज़मी, कवि प्रदीप, जानिसार अख्तर, वाल्टर क्रोकोइल, थिकनात हान, जिगर मुरादाबादी, कबीर, कृष्ण चंद्र, पाइथागोरस, साहिर लुधियानवी, अब्राहम लिंकन, पाब्लो नेरुदा, गुरु ग्रंथ साहब, मार्टिन इस्कोशेसी, नाजिम हिकमत।
कैलेंडर के संपादकीय में कहा गया है कि कहावतें लोगों के अनुभव व समझ से बनी छोटी-छोटी सी अभिव्यक्तियां होती है जो जीवन के गहरे अर्थों को बहुत आसान शब्दों में बनाती है। पूरी दुनिया में फैली कहावतों के अध्ययन और संकलन की विधा को कहावत शास्त्र (पारेमियोलॉजी) कहा जाता है।
लिखित भाषा से अधिक बोलचाल की संस्कृति में जीवित ये कहावतें बड़े बुजुर्गों के जरिए सहज ही कुछ सीख सी देती हुई हमारे जीवन में रच बस चुकी है। एक अरबी कहावत है-
की।
कम तहताज अलतआमा इला मिल्ह,
तहताज अल कलमात इलल अम्बाला
यानी बातों में कहावतों की उतनी ही जरूरत है जितनी की खाने में नमक
2026 के कैलेंडर को भारतीय, नावें, फांसीसी, अफ्रीकी, अंग्रेजी, चीनी, आइरिश, अमेरिकी, यूनानी, तुर्की, जापानी के अलावा सार्वभौमिक कहावतों से सजाया गया है। हर माह के लिए दो कहावतें हैं जो क्रम से जनवरी से
दिसंबर तक निम्न है-
लिए
दो कान और एक जबान का मतलब बोलने से दूना सुनना
जानकारी इल्म नहीं होती
सुंदरता से प्यार करने वाला कभी बूढ़ा नहीं होता
रात कितनी भी लंबी क्यों न हो सुबह होकर ही रहेगी
आनंद जुड़वा पैदा हुआ है
खुशी सबसे अच्छा सौंदर्य प्रसाधन है
जिस दिन हंसें नहीं, वह दिन बर्बाद
अपने दिल में एक हरा पौधा रखो, शायद कोई गाती हुई चिड़िया आए
नाराज करो तो माफी मांगो, नाराज हो तो माफ करो
बुरे आदमी की रूह में भी आदमीयत होती है
जहां संगीत है वहां प्यार हो सकता है
पैसा कमाना अलग बात है खुशी कमाना अलग
मैंने सुना भूल गया, मैंने देखा याद रहा, मैंने किया समझ गया
पूछने वाला पांच मिनट के लिए बेवकूफ न पूछने वाला जिंदगी भर के
वह दाम हर चीज के जानता है, पर मूल्य किसी का नहीं
उल्टे पक्ष का भी एक उल्टा पक्ष होता है
चुप रहने का कोई भी अच्छा मौका मत छोड़ो
नाजुक शब्दों और कठोर तकों का प्रयोग करो
आश्चर्य, समझदारी की शुरुआत
नए कानून- नई बदमाशियां
गलत काम करने का कोई सही तरीका नहीं
अच्छी तलवार वह जो म्यान में रह गई
यदि तुम अपने सारे पढ़े पर विश्वास करते हो तो बेहतर है मत पढ़ो
कागज के पन्ने के भी दो पक्ष होते हैं
उल्लेखनीय है कि इस कैलेंडर की बिक्री से प्राप्त सहयोग राशि बच्चों की शिक्षा और सार्वजनिक निःशुल्क वाचनालय के संचालन में काम आती है। रूपांकन लाइब्रेरी अनवरत 24 घंटे खुली रहती है।





