अब कोई शांति वार्ता नहीं होती, न कोई देश किसी संकट के लिए संयुक्त राष्ट्र की तरफ भागता है. अब तो अपना हाथ जगन्नाथ है. जिसका हित जब जिसके साथ होता है, वह उसी का हाथ थामता है. अमेरिका के राष्ट्रपति तो किसी भी नैतिक बंधन...
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*बंगाल एसआईआर : जातीय-राज्य के निर्माण के लिए एक गठजोड़*
*(आलेख : समिक लाहिड़ी, अनुवाद : संजय पराते)* भारतीय संविधान की प्रस्तावना में शामिल ‘लोकतांत्रिक गणराज्य’ के सामने अस्तित्व का संकट है। हाल के सालों में, चुनाव प्रणाली पर एक सोचा-समझा हमला सामने आया है...














