राजेन्द्र के.गुप्ता
*आबकारी AC संजीव कुमार दुबे और अधिकारियों की सांठ गांठ से हुए रुपए 71 करोड़ 58 लाख 52 हजार 047 का आबकारी घोटाले की शिकायत CBI को हुई है*
*हाईकोर्ट ने अपने आदेश में “आबकारी अधिकारियों की संलिप्तता से इंकार नहीं किया जा सकता है” लिख कर संजीव दुबे की याचिका खारिज कर दी थी, रिवीजन अपील में जारी आदेश दिनांक 20/12/2023 पर विभागीय जांच का सामना कर रहे AC संजीव कुमार दुबे ने दिनांक 25/01/2024 को शासन के समक्ष अभ्यावेदन प्रस्तुत किया था, जिस पर 30 दिन में निर्णय जारी करना था किंतु आबकारी आयुक्त ने आज दिनांक तक निर्णय जारी नहीं किया है*
*इसलिए सवाल उठ रहा है कि हाईकोर्ट के आदेश के बावजूद आबकारी आयुक्त अभिजीत अग्रवाल के द्वारा (11 महीने में) अब तक दुबे के अभ्यावेदन पर निराकरण जारी नहीं करना, शासन को मोटे राजस्व का चूना लगाने वाले दागी अफसरों का बचाव करने, अत्यधिक समय देने, भ्रष्टाचार को और ऐसे अफसरों को संरक्षण देने की श्रेणी में क्यों नहीं आता है ?*
*दिनांक 04/07/2024 को आबकारी आयुक्त के द्वारा विधानसभा को दी गई विभागीय टीप (लिखित जानकारी) में दुबे के अभ्यावेदन पर निर्णय प्रक्रियाधीन बताया गया था, जबकि उसी जवाब (टीप) में आबकारी आयुक्त ने स्वयं बताया है कि हाईकोर्ट ने दुबे के अभ्यावेदन पर 30 दिन में निराकरण जारी करने का आदेश दिया है*
*अब सवाल यह भी उठता है कि दुबे की ही याचिका पर हाईकोर्ट के द्वारा जारी आदेश के तहत आबकारी आयुक्त 30 दिन में अभ्यावेदन पर निराकरण जारी क्यों नहीं कर पाए है, इस प्रकरण से भी आबकारी आयुक्त पर विभाग के कनिष्ठ अधिकारियों की धमक साबित हो रही है*





