सरकार सभी जरूरतमंदों की नीतिगत मदद करे , दिखावेबाजी का पाखंड न करे
*अजय खरे*
रीवा। मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान को जरूरतमंद लोगों की मदद के लिए नीतिगत काम करना चाहिए , जिससे प्रदेश के गरीब तबके को इधर-उधर भटकना न पड़े। मुख्यमंत्री चौहान गरीबों का भला कम , दिखावेबाजी ज्यादा करते हैं। यह बराबर देखने को मिलता है कि मुख्यमंत्री चौहान हजारों जरूरतमंदों को मदद करने के बजाय किसी एक को खैरात बांटकर अपनी लोकलुभावन छवि बनाए रखने बीच-बीच में प्रायोजित तरीके से ड्रामा करते रहते हैं। देखने को मिलता है कि मुख्यमंत्री चौहान हजारों जरूरतमंदों में से किसी एक को खैरात बांट कर , झूठी वाहवाही लूटते नजर आते हैं। यह तौर तरीका अत्यंत आपत्तिजनक , अशोभनीय और पाखंडपूर्ण है।
एक तरफ कोरोना के चलते मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान के द्वारा जहां 2 गज दूरी के साथ साथ मॉस्क जरूरी की बात की जा रही है , वहीं वह खुद इस दूरी को एकदम नजरअंदाज करते हुए अपने आप को अत्यंत संवेदनशील मुख्यमंत्री के रूप में दिखाने की कोशिश करते नजर आते हैं। सामान्यतः मुख्यमंत्री की सुरक्षा व्यवस्था के कड़े इंतजाम के चलते आम आदमी का मिलना बहुत मुश्किल होता है लेकिन जहां मुख्यमंत्री का इशारा हो , वहां किसी एक को खैरात बांटने की सारी व्यवस्थाएं बना ली जाती हैं । इस तरह का एक वाकया गत दिवस मध्यप्रदेश के अशोकनगर जिले के मुंगावली में देखने को मिला जहां एक महिला अपनी परेशानियों को बताते हुए मुख्यमंत्री से लिपट कर रो रही है , जिस पर मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान उसके ऊपर हाथ रखकर तसल्ली देते हुए अनुदान कोष से ₹50000 देने की घोषणा करते हैं और आनन-फानन उसे मुख्यमंत्री स्वेच्छा अनुदान से उक्त राशि का चेक भी उपलब्ध करा दिया जाता है।विपत्ति की मारी ऐसी हजारों महिलाएं अशोकनगर जिले भर में नहीं , बल्कि प्रदेश के आधा सैकड़ा से अधिक जिलों में आर्थिक सहायता के लिए भटक रही हैं लेकिन इनमें से किसी को भी इस तरह का चेक उपलब्ध नहीं हुआ है . वैसे भी किसी का मुख्यमंत्री तक पहुंचना आसान नहीं है और न ही इस तरह की सहायता देने का सरकार का कोई इरादा नजर आता है . प्रदेश के मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान की लोकलुभावन छवि बनाने , इस तरह के प्रायोजित कार्यक्रम यदा-कदा देखने को मिलते हैं जिससे जरूरतमंद लोगों को यह लग्रने लगता है कि वे यदि मुख्यमंत्री के पास पहुंच जाएंगे तो उनको भी इस तरह का लाभ मिल जाएगा लेकिन यह बात मृग मरीचिका की तरह भ्रामक है .
सवाल यह है कि जनता के राज में क्या लोगों को गिड़गिड़ाने पर ही इस तरह की सहायता मिलेगी ? सरकार ऐसी व्यवस्था क्यों नहीं बनाती कि जरूरतमंद लोगों को अपना दुखड़ा सुनाने जगह जगह भटकना न पड़े और समय पर उनकी सहायता हो सके। प्रदेश की हालत यह है कि हर मंगलवार को प्रदेश के विभिन्न कार्यालयों में होने वाली जनसुनवाई में भी जनसाधारण को लंबी लाइन लगाकर और हाथ जोड़कर अधिकारियों से मिलना पड़ता है। यह् बात लोकतंत्र के लिए शर्मसार है , जहां न्याय जैसी कोई बात नजर नहीं आती है।
हजारों जरूरतमंदों में से किसी एक को खैरात बांट कर , झूठी वाहवाही लूटते हैं मुख्यमंत्री चौहान





