इंदौर के भागीरथपुरा इलाके में पानी खराब होने के कारण हुई 25 मौतों के लगभग तीन हफ्ते बाद भी डायरिया के मामले सामने आ रहे हैं. मौतों के बाद, राज्य सरकार और जिला प्रशासन ने इलाके में पानी की सप्लाई रोक दी, नई पाइपलाइन बिछाने और संदिग्ध लीकेज पॉइंट्स को ठीक करने का काम तेज कर दिया है. इंदौर नगर निगम (IMC) के अनुसार, लगभग 15000 लोगों को टैंकरों से साफ पानी दिया जा रहा है. हालांकि, इसके बावजूद अस्पतालों में डायरिया के मरीज आ रहे हैं. स्वास्थ्य विभाग के रिकॉर्ड के अनुसार, पिछले 10 दिनों में 65 डायरिया के मामले सामने आए हैं.
अस्पताल में अब कैसी स्थिति
मीडिया रिपोर्टस के मुताबिक, आपको बता दें, बुधवार को छह लोग उल्टी और डायरिया के लक्षण के साथ भागीरथपुरा डिस्पेंसरी गए, जिन्हें दवा दी गई. किसी भी मरीज को अस्पताल रेफर करने की जरूरत नहीं पड़ी. मंगलवार को लोकल प्राइमरी हेल्थ सेंटर में 122 OPD मरीज आए, जिनमें से 3 डायरिया के थे. CMHO डॉ. माधव हसानी ने बताया कि डायरिया खराब पानी या खाने से फैल सकता है. उन्होंने लोगों से पानी उबालकर पीने और सब्जियां धोकर खाने की सलाह दी.
हाईकोर्ट का आदेश
मध्य प्रदेश हाईकोर्ट की इंदौर बेंच ने डिस्ट्रिक्ट कलेक्टर और म्युनिसिपल कमिश्नर को आदेश दिया कि वे भागीरथपुरा में पानी खराब होने के मामले से जुड़े सभी रिकॉर्ड सुरक्षित रखें. कोर्ट ने यह कदम पिटीशनर्स की संभावित हेराफेरी की चिंता के मद्देनजर उठाया.
हाल की मौत और बोरवेल की स्थिति
बुधवार को डायरिया से प्रभावित इलाके में 51 साल के हेमंत गायकवाड़ की मौत हुई. हेल्थ डिपार्टमेंट ने बताया कि मौत का कारण कार्डियो-पल्मोनरी अरेस्ट था, और मरीज़ पहले से कैंसर के इलाज में थे. IMC कमिश्नर क्षितिज सिंघल ने कहा कि अब 30% इलाके में हर दूसरे दिन नर्मदा का पानी आता है और बाकी इलाकों में टैंकर तभी भेजे जाते हैं जब पानी का टेस्ट सुरक्षित होता है. इलाके के 100 बोरवेल में से लगभग 60% को बंद कर दिया गया है. हेल्थ डिपार्टमेंट ने लोगों को जागरूक करने के लिए प्रयास जारी रखे हैं. अब तक 6365 घरों और 26,977 लोगों तक ORS, जिंक और हेल्थ कंसल्टेशन पहुंचाया गया है. लोगों से उबला हुआ पानी पीने की अपील की जा रही है.





