
( परवेज़ इक़बाल)
“उन का जो फ़र्ज़ है वो अहल-ए-सियासत जानें
मेरा पैग़ाम मोहब्बत है जहाँ तक पहुँचे”
इस देश में कट्टरवादी संगठन/ मीडिया द्वारा फैलाई जा रही सांप्रदायिकता..और सरकार के अघोषित समर्थन से फैलती नफरत से जब जब घुटन बढ़ती है..तब तब कुछ ऐसा होता है जो घुप्प अंधेरे में उम्मीद की किरण बन कर रोशनी फैला देता है…
अब देखिए न अहमदाबाद बोइंग विमान हादसे के दौरान मेडिकल हॉस्टल में मारे गए डॉक्टर्स (मेडिकल छात्रों) को एक ऐसे व्यक्ति ने आर्थिक मदद करके उनका दुःख कम करने की कोशिश की है जिसका इस हादसे से कोई लेना देना नहीं है…और मदद भी कोई मामूली मदद नहीं है…तस्वीर में नज़र आ रहे इस शख़्स का नाम डॉ.शमशीर वायलिल है…यह आबुधाबी UAE में रहते हैं… जहां उनकी कंपनी VPS हेल्थ और बुर्जील होल्डिंग्स कई हॉस्पिटल्स और फार्मा कंपनीज के ज़रिए स्वस्थ सेवाएं प्रदान करती है..
डॉ. शमशीर ने हादसे में मारे गए चार मेडिकल स्टूडेंट को एक एक करोड़, हादसे में गंभीर रूप से घायल पांच डॉक्टर्स को 20/20 लाख और हादसे में अपने 5 परिजन को खोने वाले डॉक्टर्स को भी 20/20 लाख रुपए यानी कुल 6 करोड़ की मदद करने का ऐलान किया है…
विदित रहे कि अहमदाबाद में बोइंग विमान मेडिकल हॉस्टल की बिल्डिंग पर गिरने से चार मेडिकल छात्रों जयप्रकाश चौधरी, मानव भादू, आर्यन राजपूत और राकेश दियारा की मौत हो गई..जबकि पांच छात्र गंभीर रूप से घायल हैं..हादसे में हॉस्टल परिसर में ही रहने वाले छात्रों के पांच परिजन भी मारे गए हैं…आपको बता दें कि शमशीर द्वारा दुर्घटना में मारे गए लोगों की मदद का यह कोई पहला मामला नहीं है…इससे पहले 2010 के हुए मंगलौर विमान हादसे में भी डॉ.शमशीर ने पीड़ितों की मदद की थी…
डॉ. शमशीर 1977 में केरल के मुस्लिम परिवार में पैदा हुए और उन्होंने मंगलौर के कस्तूरबा मेडिकल कॉलेज और चेन्नई के श्री रामचंद्र मेडिकल कॉलेज से शिक्षा प्राप्त की…बाद में वो दुबई चले गए…और आज उनकी कंपनी VPS हेल्थ और बुर्जील होल्डिंग्स कई हॉस्पिटल और फार्मा कंपनी संचालित करती है…
डॉ. शमशीर को जब मेडिकल हॉस्टल/विमान हादसे का पता चला तो उन्होंने अफसोस ज़ाहिर करते हुए कहा कि:- “हादसे में मारे गए युवा उस परिवार का हिस्सा थे, जिसका कभी मैं भी सदस्य था..हॉस्टल के गलियारे..बिस्तर..परीक्षा के दबाव के बीच अपने परिजनों की कॉल के इंतेज़ार करते छात्रों की दुनिया में कोई विमान इस तरह घुस जाएगा यह की कल्पना भी नहीं कर सकता, उन छात्रों ने उस दिन भी अपने दिन की शुरुवात लेक्चर… असाइमेंट और अपने मरीज़ों के बारे में सोचते हुए कि होगी..”।
एक सवाल मेरे ज़हन ने उठता है कि हर मामले में साम्प्रदायिक चश्मा लगा कर तथ्य तलाशने वाले भारतीय मीडिया को इस तरह की खबरें क्यूं नहीं दिखाई देतीं ?…या वो इस तरह की खबरें उनके नफरती एजेंडे में फिट नहीं होती..शायद इसी लिए वो इस तरह की खबरें दिखाना ही नहीं चाहते…किसी मुस्लिम द्वारा किए किसी व्यक्तिगत अपराध या गलती के बहाने सारी मुस्लिम क़ौम को कटघरे में खड़ा करने के लिए चीखने वाले चैनल/अख़बार किसी मुस्लिम डॉक्टर द्वारा बगैर किसी साम्प्रदायिक भेदभाव के विशुद्ध इंसानियत के नाम पर की जा रही इस मदद को खबरों में जगह क्यूं नहीं देना चाहते..?
बहरहाल…मीडिया में अहमदाबाद ने हुए विमान हादसे की खबरें सिकुड़ रही हैं…बहुत जल्द यह खबरें कुछ दावे/कुछ आश्वासन और किसी को भी ज़िम्मेदार न ठहराने वाली संभवतः कभी खत्म न होने वाली जांच संबंधी बयान पूरी तरह लुप्त हो जाएंगी…लेकिन इस हादसे के शिकार लोगों की ज़िन्दगी में छाया अंधेरा शायद बरसों उनकी पीढ़ियों की ज़िंदगी का दर्दनाक हिस्सा बना रहेगा….उस दर्द ..उस अंधेरे की कोई भरपाई नहीं हो सकती लेकिन डॉ.शमशीर की यह सहानुभूति उन्हें ज़रूर थोड़ी राहत देती रहेगी…राहत पैसों की नहीं…उस अहसास की होगी..जो उन्होंने इस हादसे से किसी भी तरह का सरोकार न होने के बावजूद बगैर किसी साम्प्रदायिक भेदभाव के विशुद्ध इंसानियत के लिए पीड़ितों का दुःख बांटने के लिए की है ।





