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*राष्‍ट्र से पहले राज्‍यों में मजबूत करनी होगी कांग्रेस*

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*हिंदी भाषी राज्‍यों पर करना होगा फोकस**संगठन को भी मतबूत करने की जरूरत**कमलनाथ, अरूण यादव, सचिन पायलट, टीएस सिंहदेव, चरणदास महंत जैसे कर्मठ नेताओं को सौंपी जाये राज्‍यों की कमान*

*विजया पाठक, एडिटर, जगत विजन*

देश की सबसे पुरानी पार्टी कांग्रेस का एक समय था जब वह संपूर्ण देश में पार्टी का राज हुआ करता था। पूर्व से पश्चिम और दक्षिण से उत्‍तर तक कांग्रेस की सत्‍ता हुआ करती थी। लेकिन समय के साथ हालात बदल चुके हैं। कांग्रेस धीरे-धीरे एक सीमित क्षेत्र में सिमटती नजर आ रही है। खासकर दक्षिण के अलावा अन्‍य क्षेत्रों में कांग्रेस का वर्चस्‍व खत्‍म होता दिख रहा है। जबकि देश के हिंदी भाषी राज्‍यों में कांग्रेस का पतन लगातार जारी है। कांग्रेस आलाकमान को इस पर विचार करने की आवश्‍यकता है। हालांकि यह भी सच है कि अभी भी कांग्रेस देश की नंबर दो पार्टी है। लोकसभा में पार्टी के 99 सांसद हैं और कई राज्‍यों में सरकार भी है लेकिन यह ग्राफ बढ़ाना होगा। खासकर राज्‍यों में तो पार्टी को मजबूती प्रदान करनी होगी। क्‍योंकि जब तक राज्‍यों में कांग्रेस मजबूत नहीं होगी तब तक देश में मजबूत नहीं होगी। इसलिए कांग्रेस को राष्‍ट्र से पहले राज्‍यों पर फोकस करना होगा। इसके अलावा संगठन को भी मजबूत बनाना होगा। राहुल गाँधी अपनी कांग्रेस पार्टी को धर्मनिरपेक्ष विचारधारा वाले ख़ेमे में रखते हैं जो उनके अनुसार ‘आरएसएस-बीजेपी जैसी नफ़रत फैलाने वाली ताक़तों’ के ख़िलाफ़ खड़ी है।

*हिंदी भाषी राज्‍यों की अनदेखी पड़ रही भारी*

कांग्रेस को हिंदी भाषी राज्‍यों की अनदेखी भी भारी पड़ रही है। उप्र, मप्र, राजस्‍थान, गुजरात, छत्‍तीसगढ़, बिहार जैसे राज्‍यों में अभी भी कांग्रेस, बीजेपी या अन्‍य पार्टियों को कड़ी टक्‍कर देने की काबिलियत रखती है। वोट प्रतिशत में ज्‍यादा कम नही है। सिर्फ सीटों के गणित में ही अन्‍य पार्टियां भारी हैं। यदि पार्टी एक मिशन को लेकर और स्‍थानीय स्‍तर पर बेहतर प्रबंधन कर ले तो अपने खोये जनाधार को वापस ला सकती है। उल्‍लेखित यह राज्‍य ऐसे हैं जहां एक दो बार नहीं बल्कि कई बार कांग्रेस सत्‍ता में रही है। लेकिन आपसी खींचतान और आलाकमान की अनदेखी के कारण यह राज्‍य कांग्रेस से हाथों से फिसल गये। ऐसा भी नहीं है कि इन राज्‍यों में कांग्रेस दोबारा जीवित नहीं हो सकती है। बिल्‍कुल सत्‍ता में वापसी हो सकती है। केवल राज्‍यों में ऐसे नेताओं का चयन करना होगा जो पार्टी के प्रति पूरी कर्मठता और‍ निष्‍पक्षता के साथ खड़े हों।

*कांग्रेस को आज कमलनाथ जैसे समर्पित नेताओं की जरूरत*

कांग्रेस में कमलनाथ एक बड़ा नाम है। ये केंद्रीय मंत्री के अलावा मध्‍यप्रदेश के मुख्‍यमंत्री भी रह चुके हैं। इन्‍होंने अपनी पूरी राजनीति कांग्रेस के लिए समर्पित की। आज पार्टी को ऐसे ही कर्मठ और ईमानदार नेताओं की जरूरत है। यदि आज भी मध्‍यप्रदेश में कमलनाथ को सर्वेसर्वा बनाया जाता है तो पार्टी में नई उर्जा का संचार होगा। कार्यकर्ताओं में नया जोश आयेगा। इसका एक कारण भी है क्‍योंकि कमलनाथ के नेतृत्‍व में ही प्रदेश में कांग्रेस की सरकार बनी थी। 18 माह के शासन में कमलनाथ ने प्रदेश में एक अलग ही छाप छोड़ी है। आज भी लोग कमलनाथ के शासन को याद करते हैं और उनके फैसलों की सराहना करते हैं। लेकिन सूत्रों का मानना है कि मप्र में कांग्रेस पार्टी बीजेपी की पेड वर्कर पार्टी बन गई है। कांग्रेसी बीजेपी के लिए काम करते हैं। दूसरी तरफ राजस्‍थान की बात करें तो यहां भी सचिन पायलट प्रदेश की राजनीति में बड़ा नाम है। सचिन पायलट प्रदेश में काफी लोकप्रिय हैं। प्रदेश में जब अशोक गहलोत की सरकार बनी थी तब सचिन पायलट का काफी योगदान रहा था। उस समय मुख्‍यमंत्री पद के यही प्रबल दावेदार थे। अब भी यदि कांग्रेस आलाकमान सचिन पायलट के नेतृत्‍व में चुनाव लड़ती है या इन्‍हें प्रदेश की कमान सौंपती है तो निश्चित रूप से राज्‍य में कांग्रेस की वापसी हो सकती है। वहीं छत्‍तीसगढ़ में चरणदास महंत और टीएस सिंहदेव ऐसे नाम हैं जो अपने दम पर प्रदेश में पार्टी को खड़ा कर सकते हैं। पिछली सरकार में भी यह महत्‍वपूर्ण पदों पर आसीन रहे हैं। लेकिन आज छत्‍तीसगढ़ को इनके जैसे नेतृत्‍वकर्ताओं की जरूरत है जो कांग्रेस की पुन: सत्‍ता में वापसी करा सकें।

*राज्‍यों से निकलती है केंद्रीय सत्‍ता की चाबी*

हम देख रहे हैं कि 2014 से केंद्र में मोदी सरकार की सत्‍ता है। नरेन्‍द्र मोदी को प्रधानमंत्री बनाने में राज्‍यों का बहुत बड़ा योगदान है। खासकर हिंदी भाषी राज्‍यों का तो महत्‍वपूर्ण योगदान रहा है। आज देश के लगभग 70 प्रतिशत राज्‍यों में बीजेपी का शासन है। जिसकी ही बदौलत केंद्र में मोदी की सरकार है। राज्‍यों में अपनी सरकार बनाने में बीजेपी पूरी मेहनत करती है। विधानसभा के चुनावों को भी काफी महत्‍वपूर्ण मानती है। बीजेपी आलाकमान की सत्‍ता और संगठन पर हर समय पैनी नजर रहती है। पार्टी आलाकमान के बगैर प्रदेश में पत्‍ता भी नहीं हिलता है। मतलब साफ है कि राज्‍यों पर अंकुश शीर्ष नेतृत्‍व का रहता है। यही कारण है कि आज बीजेपी लगभग पूरे देश में सत्‍ता में है। कांग्रेस को भी अगर केंद्र में सत्‍ता में आना है तो पहले राज्‍यों पर पूरा फोकस करना होगा। यदि राज्‍यों में पार्टी कमजोर रहेगी तो केन्‍द्र में भी कमजोर रहेगी।

*कमलनाथ की दूरदर्शिता और मौजूदा सोच*

कमलनाथ की दूरदर्शिता आज के युवा नेताओं के लिए एक मिसाल है। मध्यप्रदेश में विकास की अपार संभावनाएं हैं। यहां संसाधन हैं, युवाशक्ति है और कृषि व उद्योग का विशाल आधार है। हमें एक ऐसी योजना बनानी होगी, जिसमें युवाओं को रोजगार मिले, महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाने के लिए संसाधन उपलब्ध हों, बच्चों को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा मिले, किसानों को आधुनिक खेती की तकनीक सीखने का अवसर मिले। यदि हमें स्वर्णिम भारत के साथ-साथ स्वर्णिम मध्यप्रदेश की ओर बढ़ना है तो कमलनाथ जैसे दूरदर्शी नेता की जरूरत है।

Ramswaroop Mantri

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