डॉ. विकास मानव
सबसे पहले बात करते हैं कि अगर आपको इंसोम्निया है, यानी के नींद आती ही नहीं है कैसे भी, दवाई भी ले ली, सब कुछ कर लिया फिर भी नींद नहीं आती तो क्या करें ?
इसका जवाब है योगनिद्रा।
योगनिद्रा योग का हिस्सा है, और अब तो इसे पूरी दुनिया में प्रैक्टिस किया जाता है, इवन न्यूरोसाइंटिस्ट्स द्वारा.
करना क्या होता है ?
आपको लेटना है बिस्तर पर या जमीन पर.
उदाहरण के लिए मैं गाडी में करता हूँ गाडी की सीट को पीछे खेंचकर और पीठ वाले हिस्से को recliner बनाकर। अब आपने इमेजिन करना है के आपके ऊपर कोई टोर्च लेकर खड़ा है।
वो टोर्च की रौशनी को आपके पैर के अंगूठे पर मारता है, फिर आपके टखनों पर, जननेंद्रिय पर, फिर पिंडलियों पर, फिर घुटनों पर, और ऐसे करते- करते रोशनी आपके सर तक आ जाती है. ये सब आपने इमेजिन करना है।
इस पूरे दौरान आपने डीप में inhale और exhale करना है. जहां जहां शरीर पर आप टोर्च की रौशनी महसूस कर रहे हैं वहाँ जो सेंसेशन हो रही है वो महसूस करते रहिये। बस इतना करना है आधे घंटे तक।
इस आधे घंटे में आपको अगर रात को खराब नींद आयी थी या बिलकुल नहीं आयी थी आप उसको कवरअप करने की कोशिश कर रहे हैं, जिनको बिलकुल नींद नहीं आती वो 01 घंटा भी कर सकते हैं।
योगनिद्रा को हिंदुस्तान में तो बहुत पहले से सिखाया जाता रहा है, लेकिन जापान से ये काफी मशहूर हुई 1900s में और फिर अमेरिकी योगिक स्कूल्ज के जरिये न्यूरोसाइंटिस्ट्स के हाथ लगी और फिर इसकी साइंस सबके सामने आयी।
साइंस क्या है इसकी ?
हमारे नर्वस सिस्टम में दो प्रमुख ब्रांचेज हैं, एक है Sympathetic Nervous System जो के जागने की अवस्था में एक्टिवेटिड रहता है. इसमें फाइट या फ्लाइट का रिस्पांस चलता रहता है. स्ट्रेस की स्थिति में ये एक्टिवेट होता है. बढे हुए हार्ट रेट की स्थिति में होता है. बढे ब्लड प्रेशर की स्थिति में होता है. जब कोर्टिसोल जैसे स्ट्रेस हॉर्मोन रिलीज़ होते हैं तब होता है।
दूसरी ब्रांच है Parasympathetic Nervous System जो के आराम करने के लिए पाचन क्रिया बेस्ट करने के लिए, रिलैक्स करने के लिए, हार्ट रेट को स्लो करने के लिए, ब्लड प्रेशर को लौ करने के लिए, और शरीर को एनर्जी संयोजित करने के लिए काम में आता है।
जब आप सोते हैं डीप स्लीप में तो यही Parasympathetic Nervous System काम कर रहा होता है, और ये हम एक्टिवेट करवा सकते हैं योगनिद्रा के जरिये भी.
अब जो मैंने योगनिद्रा का तरीका बताया है ये वो है जो मुझे पसंद है, योगनिद्रा के लिए असल में गाइडेड मैडिटेशन होती है जिसमे के एक गुरु होता है जो के आपको बताता रहता है के अब ये करो अब वो करो, लेकिन मैंने ये सब सीखने और करने के बाद ये जो टोर्च इमेजिन वाला तरीका है ये भी उतना ही कारगर पाया।
असल में गुरु की आवयश्यकता इसलिए रहते है ताकि आपके दिमाग को ना जोर डालना पड़े स्टेप्स याद करने के लिए, आप केवल फोलो करते जाएँ. इसलिए जब आप रट्टा मारते हैं स्टेप्स के तो आपको याद करना पड़ता है स्टेप और आपका रिलैक्सेशन का स्टेट बाधित होता है, लेकिन जब आपको अपने शरीर पर केवल टोर्च को पैर से ऊपर सर तक लेकर आना है और सभी सेंसेशंस फील करने हैं तो आपको कुछ भी याद रखने की जरूरत नहीं पड़ती, और आप एकदम रिलैक्सेशन के स्टेट में रहते हैं।
इसके फायदों में कोर्टिसोल लेवल का कम होना, ब्लड प्रेशर और हार्ट रेट का कम होना, digestion और इम्यून सिस्टम का बेहतर होना शामिल है।
और ये मैं अपने हार्ट वाले प्रोग्राम में भी लोगों से करवाने वाला हूँ, इसमें कुछ और स्टेप्स जोड़कर जो के हार्ट के सम्बन्ध में इसे और असरदार करे।
इसका एक फायदा जापानीज साइंटिस्ट Hiroshi Motoyama ने ढूंढा था, के ये हमारे ब्रैनवेव की फ्रीक्वेंसी को बदल देता है. हमारे ब्रेनवेव की फ्रीक्वेंसी चेतना के अलग अलग लेवल होते हैं असल में, जिनमे के 0 से 30 हर्ट्ज़ तक रहती है फ्रीक्वेंसी। जब आप शुरू करते हैं तो 14 से 30 हर्ट्ज़ की फ्रीक्वेंसी में रहते हैं, जिस से के आप कुछ ही देर में 8-13 हर्ट्ज़ तक पहुँच जाते हैं जिन्हे के अल्फा वेव कहते हैं, यहां आप रिलैक्स हो चुके होते हैं। जब आप डेड्रीमिंग करते हैं तब आप इसी फ्रीक्वेंसी पर होते हैं।
फिर कुछ देर में आप थीटा वेव्स पर पहुँचते हैं जो के 4-7 हर्ट्ज़ तक होती है, यहां से आपका सबकॉन्सियस एक्सेसिबल हो जाता है।
ये है जो के आप जब डीप रिलैक्स्ड होते हैं तब होती है, इस समय में जो साइंटिस्ट लोग बोलते हैं के एक्वेशन अपने आप सॉल्व हो गयी ये वो स्टेट होती है, इस समय पर आपकी मेमोरी या इमोशनल प्रोसेसिंग सब पीक कर रही होती है, क्रिएटिविटी पीक कर रही होती है।
नशे वाली स्टेट है ये। जो के आप छोटी सी झपकी या डीप मैडिटेशन से भी हासिल कर सकते हैं। फिर आती है आखिरी स्टेट, जिसे के डेल्टा वेव बोलते हैं 0.5-3 हर्ट्ज़ तक की, ये स्लोवेस्ट ब्रेन वेव हैं, और बेहद गहरी नींद में आप इन्हे महसूस करते हैं, आपकी बॉडी की रेस्टोरेशन और हीलिंग इसी फ्रीक्वेंसी पर शुरू होती है।
योगनिद्रा का मकसद यही आखिरी स्टेट पाना होता है, और कुछ दिन की प्रैक्टिस के बाद आप पाने भी लग जाते हैं।
ये योगनिद्रा इमोशनल ट्रामा से भी बाहर निकालने के लिए इस्तेमाल की जाती है, इसमें विभिन्न स्टेज पर आपको कुछ इमेजेज दिमाग में लाने को बोला जाता है, कुछ विज़ुअल्स कुछ आवाज़ें, जो के हीलिंग प्रोसेस का हिस्सा है, लेकिन वो गहराई वाली चीज़ है और स्पेसिफिक प्रॉब्लम के लिए है।
डीप स्लीप की दिक्कत के लिए जो मैंने तरीका बताया वो काफी रहेगा।
मिर्गी वाले लोगों को ये नहीं करनी चाहिए, ऐसा जिस से मैंने सीखा था उसका कहना था।
डीप स्लीप क्यों जरूरी है और ना आये तो क्या करना चाहिए।
पिछली पोस्ट योगनिद्रा वाली में हमने जिक्र किया के कैसे हमारी brainwave अलग अलग फ्रीक्वेंसी पर अलग अलग काम करती है, और डेल्टा वेव 0.5-3 हर्ट्ज़ तक की जब होती है तब आपकी बॉडी की रिकवरी शुरू होती है।
अब ये जब आप डीप स्लीप में जाते हैं तो आटोमेटिक होता है। डीप स्लीप से आपकी ब्रेन की एजिंग स्लो होगी, आपकी याददाश्त बची रहेगी, dementia का रिस्क कम हो जाएगा, मूड अच्छा रहेगा अगले दिन, इंफ्लमैशन कम हो जायेगी।
जब हम सोते हैं तो glymphatic system हमारा एक्टिवेट हो जाता है जिस से पूरा दिन जो waste प्रोडक्ट्स आप इकट्ठे कर रहे थे दिन में वो साफ़ हो जाते हैं। लेकिन अगर आपको डीप स्लीप नहीं आ रही तो पता है क्या होगा ?
ब्रेन श्रिंक होगा, अगले दिन मूड अच्छा नहीं होगा, लॉन्ग टर्म में एंग्जायटी डिप्रेशन इत्यादि घर करने लग जाएगा, करियर को नुक्सान होगा सो अलग।
तो कैसे लें डीप स्लीप ?
1. Circadian Clock :
डीप स्लीप की साइंस ये है के हमें अच्छी नींद आये ये निर्भर करता है सूर्य पर.
आप जब उगते हुए लाल पीले सूर्य को देखते हैं या शाम को लाल पीले सूर्य को देखते हैं तो आपका सिरकाडियन क्लॉक सेट हो जाता है। सुबह का देखते ही ये पक्का हो जाता है के शाम को 4 बजे के करीब स्लीप हॉर्मोन secrete होना शुरू हो जाएगा जिसे मेलाटोनिन बोलते हैं। इसलिए पहला और सबसे जरूरी स्टेप ये है के इन दोनों समय 2-2 मिनट के लिए लाल पीले सूर्य को देखें।
2. Skip Dinner and Gym Routine :
मैं सभी को बोलता हूँ के डिनर स्किप करें, और उसका कारण है के जब आप सोने से 4 घंटे पहले खा लेते हैं यानी के सोते समय तक खाना हजम हो चुका होता है तो सोते समय आपका मेलाटोनिन आपको नेचुरल डीप स्लीप प्रदान करेगा, आपकी फैट बर्निंग और मेटाबोलिज्म बूस्ट होगा, इवन टिश्यू रिपेयर और प्रोटीन सिंथेसिस बेहतर होगा। मैं सग्गेस्ट करता हूँ के आप सुबह खाली पेट gym करें, और gym के बाद पहली चीज़ खाएं। इसके ढेरों फायदे हैं और साइंस है इस लॉजिक के पीछे। ना तो आपको सोने से 2 घंटे पहले gym की मैं सलाह देता हूँ ना खाने की। ऐसे समझिये के अगर आपने सोने से 4 घंटे पहले कुछ नहीं खाया, और आप 8 घंटा सोये, और सुबह आपने खाली पेट gym किया तो जो ऑटोफैगी initiate होगी फास्टिंग की वजह से वो फास्टिंग के दौरान gym की वजह और बेहतर रिजल्ट देगी, क्यूंकि आपको शरीर को दो सर्वाइवल के क्राइसिस आप एक साथ दे रहे हैं एक फास्टिंग का दूसरा एक्सरसाइज का।
इंटरमिटेंट फास्टिंग में gym आजकल ट्रेंड में है तो ऐसा भी नहीं होगा के आपको कोई अजीब कहेगा। जो लोग फैट कम करना चाह रहे हैं मसल्स बढ़ाना चाह रहे हैं और अच्छी नींद भी उनके लिए ये रामबाण तरीका है। आप चाहें तो सोने से आधे एक घंटे पहले लीचड़ वाक करके आ सकते हैं बाहर।
3. Pre-Sleep Routine :
अब जब आपका सिरकाडियन क्लॉक सेट है, आपने सोने से 4 घंटे पहले में कुछ नहीं खाया है तो आप तैयार हैं सोने के लिए।
सोने से पहले नहाएं जो के आपकी बॉडी को रिलैक्स कर देगा, ये आपके ऊपर है के 1 घंटा पहले नहाएं या आधा घंटा पहले।
किताब पढ़ें 1 घंटा पहले या खय्याम का शांत करने वाला संगीत सुने।
मेडिटेशन के लिए भी सोने से 1 घंटा पहले बेहतरीन समय है, क्यूंकि इन सभी से आप अपने शरीर को शांत कर रहे हैं दिन भर की भागदौड़ से।
जो नहीं करना वो है के सोने से 1 घंटा पहले फ़ोन या टीवी या लैपटॉप कैसी भी इलेक्ट्रॉनिक डिवाइस दूर रख दें, स्क्रीन नहीं देखनी है आपने। क्योंकी स्क्रीन की ब्लू लाइट मेलाटोनिन को सप्रेस करती है।
अब जब आप तैयार हैं सोने के लिए तो या तो एकदम अँधेरा कर के सोएं कमरे में, या अगर दूर किसी कोने में कोई लाइट जलती रखना चाहते हैं तो डिम रेड लाइट जला सकते हैं क्यूंकि रेड लाइट ब्लू या वाइट लाइट के मुकाबले कम सप्रेस करती है मेलाटोनिन को, बहुत लोग आँख का मास्क भी इस्तेमाल करते हैं ताकि रौशनी उन्हें परेशान ना करें।
कमरा शांत और ठंडा हो तो बहुत बढ़िया रहेगा, और कोशिश करें के रोज़ एक ही समय पर सोएं, क्यूंकि जितनी कंसिस्टेंसी रहेगी उतनी गहरी नींद आएगी।
4. Diet Changes :
अब बात करते हैं खाने पीने में क्या बदलें ताकि डीप स्लीप ले सकें।
पहली चीज़ है के अगर आपको डीप स्लीप की दिक्कत है तो चाय या कॉफी को सबसे पहले लात मारें। कैफीन यूँ समझ लीजिये के ब्लेंक चेक है जिसकी के एनर्जी की वसूली शरीर करता है बाद में, यानी के आपने अभी चाय पि है तो जो फेक एनर्जी आपको मिली है हार्मोनल छेड़छाड़ से वो आपकी नींद को प्रभावित करेगी !
या अगर एकदम नहीं छोड़ सकते तो एटलीस्ट दोपहर 2 बजे के बाद ना पिएं चाय या कॉफ़ी। शाम को हर्बल टी पी सकते हैं क्यूंकि उसमे कैफीन नहीं रहती।
खाने में दो चीज़ें हैं जो के नींद में मदद करती है वो है केला और अखरोट, ये दोनों आप दिन में खा सकते हैं।
इन दो के अलावा मेलाटोनिन रिच खानों का इस्तेमाल कर सकते हैं जैसे के टमाटर और मशरुम।
दिन में खूब पानी पिए, लेकिन सोने से 2 घंटे पहले बंद कर दें पीना ताकि आपको पेशाब बीच में ना जगाये।
5. Supplements : आखिरी स्टेप है सप्लीमेंट का। मैग्नीशियम बेहद जरूरी है खाने में अगर आप अच्छी नींद लेना चाहते हैं तो, काफी सप्लीमेंट आते हैं खासकर मैग्नीशियम सिट्रट और मैग्नीशियम glycinate वाले, लेकिन नेचुरल चीज़ों से लेंगे मैग्नीशियम तो भी बढ़िया काम करेगा अगर नींद की ज्यादा दिक्कत नहीं है तो। मैग्नीशियम GABA एक्टिविटी को रेगुलेट करता है और मसल्स को रिलैक्स करने में भी मदद करता है जो के आपको नींद में मददगार साबित होंगी दोनों ही चीज़ें। बादाम खा सकते हैं बहुत बढ़िया रहेगा मैग्नीशियम सोर्स के तौर पर, पालक, पम्पकिन सीड्स भी बढ़िया हैं।
एक जो आयुर्वेद का सप्लीमेंट है वो है अश्वगंधा, वो आप ले सकते हैं लेकिन अपने डॉक्टर से जरूर सलाह लें के कितना लेना है क्यूंकि इसके साइड इफेक्ट्स भी हैं। 300 mg को सेफ माना जाता है लेकिन अपने आयुर्वेदिक डॉक्टर की सलाह के बिना ना लें मेरा मानें तो।
स्पोर्ट्स साइंस के हिसाब से अगर आप सोने से 1 घंटा पहले व्हेय प्रोटीन लेते हैं तो आपको नींद बहुत बढ़िया आएगी, क्यूंकि जैसा के पहले भी जिक्र किया हुआ है के मसल्स टूटती gym में है लेकिन बनती सोते समय है, तो आप जब सो रहे हों और आपकी मसल्स भी बिल्ड हो रही हों तो बॉडी आपको डीप स्लीप में भेजती है काफी घंटों के लिए। व्हेय वाला आपको gym वाले बताएँगे क्यूंकि इसका साइंटिफिक एविडेंस नहीं मिलेगा आपको जल्दी से, तो इसे मेरी तरफ से दी गयी सलाह मानिये ना के पूरी तरह से किसी साइंस की टेस्टेड, मैंने अपना एक्सपीरियंस शेयर किया है इस मामले में।
व्हेय लें तो 20 ग्राम isolate लें मीठा नहीं होना चाहिए, और साथ में केवल ले सकते हैं क्यूंकि जैसा के डाइट वाले हिस्से में बताया ये स्लीप में मदद करता है सेरोटोनिन और मेलाटोनिन प्रोडक्शन को बढ़ा के।
6. Conclusion :
कोशिश करें के 8 बजे सो जाएँ, 8 बजे ना सो सकते हों तो 11 से पहले तो सो ही जाएँ, इसके बाद सोयेंगे तो डीप स्लीप पूरी नहीं आएगी।
एक जो चीज़ समझने की है के हमारे विभिन्न बॉडी पार्ट्स की रिकवरी और सर्विस विभिन्न घंटों में होती है, तो आप अगर इसे छोटा करते हैं तो अगले दिन रिकवरी पूरी नहीं हुई मिलेगी।
और अगर आप 1 बजे तक जगे रहे हैं तो पक्का है के आपकी नींद बाधित हो चुकी है, इसलिए 8 घंटे सोना ही जरूरी नहीं है बल्कि कब सोना है ये भी काफी मैटर करता है।
7. Bonus :
जिसे इनमे से किसी से भी फायदा ना हो वो योगनिद्रा को इसमें शामिल कर सकता है अगले दिन ताकि नींद का अल्टरनेटिव रेस्ट आपको मिल जाए।
योगनिद्रा के साथ साथ स्ट्रेस कम रखने की #हम-सौ की प्रैक्टिस पूरा दिन में जब भी स्ट्रेस या एंग्जायटी हो तो प्रैक्टिस करें।





