14 सितंबर यानी आज हिंदी दिवस है। हिंदी दिवस हमें यह याद दिलाता है कि अपनी मातृभाषा को अपनाना और उसे आगे बढ़ाना हमारी जिम्मेदारी है। बच्चों के व्यक्तित्व निर्माण और परवरिश में भाषा की भूमिका बेहद अहम होती है। इसके अलावा, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी आज असम में 18,530 करोड़ रुपये से अधिक की लागत वाली प्रमुख बुनियादी ढांचा और औद्योगिक विकास परियोजनाओं का उद्घाटन और शिलान्यास करेंगे। इनमें दरांग मेडिकल कॉलेज एवं अस्पताल, जीएनएम स्कूल और बी.एससी. नर्सिंग कॉलेज शामिल हैं। वह नुमालीगढ़ रिफाइनरी लि. (एनआरएल) में असम बायोएथेनॉल संयंत्र का उद्घाटन करेंगे। इसके अलावा, सूर्यकुमार यादव की अगुआई वाली भारतीय टीम रविवार को एशिया कप में चिर प्रतिद्वंद्वी पाकिस्तान के खिलाफ होने वाले मुकाबले में प्रबल दावेदार होगी। दिलचस्प बात है कि पिछले कुछ महीनों में सीमा पर बढ़े तनाव के बावजूद इस मुकाबले को लेकर किसी तरह की हाइप नहीं है और भारत में इस मैच के बहिष्कार की मांग की जा रही है। इन सब चीजों के बीच दोनों टीमों के खिलाड़ियों ने इस मैच के लिए कमर कस ली है। इसके अलावा, भारत की सात नई प्राकृतिक धरोहरों को यूनेस्को की विश्व धरोहर की टेंटेटिव लिस्ट (अस्थायी सूची) में शामिल किया गया है। इनमें महाराष्ट्र के पंचगनी और महाबलेश्वर के डेक्कन ट्रैप्स तथा आंध्र प्रदेश की तिरुमला पहाड़ियां प्रमुख हैं। इन सात स्थलों के जुड़ने के बाद भारत की कुल धरोहरों की संख्या 69 हो जाएगी। इनमें 49 सांस्कृतिक, 3 मिश्रित और 17 प्राकृतिक श्रेणी की धरोहरें शामिल हैं।
हिंदी दिवस 2025: बच्चों को हिंदी सिखाने से मिलते हैं ये 5 जीवनभर के लाभ
14 सितंबर यानी आज हिंदी दिवस है। हिंदी दिवस हमें यह याद दिलाता है कि अपनी मातृभाषा को अपनाना और उसे आगे बढ़ाना हमारी जिम्मेदारी है। बच्चों के व्यक्तित्व निर्माण और परवरिश में भाषा की भूमिका बेहद अहम होती है। आजकल बच्चे अंग्रेजी में संवाद करते हैं। हिंदी के साधारण शब्द या आम बोलचाल की भाषा में भी हिंदी का उपयोग बच्चे कम ही करते हैं।
ऐसे में अगर हम बच्चों को हिंदी सिखाते हैं, तो केवल उन्हें अपनी जड़ों से नहीं जोड़ते हैं, बल्कि उनकी सोच, भावनाओं और अभिव्यक्ति को भी मजबूती देते हैं। आज के दौर में जहां अंग्रेजी का दबदबा है, वहां हिंदी को बच्चों की परवरिश में शामिल करना समय की मांग है। हिंदी को बच्चों को सिखाना केवल भाषा की शिक्षा देना नहीं है, बल्कि उन्हें एक ऐसी विरासत सौंपना है जो जीवनभर उनका साथ देगी। इस हिंदी दिवस पर हमें संकल्प लेना चाहिए कि हम अगली पीढ़ी को हिंदी की ताकत और सुंदरता से परिचित कराएंगे। बच्चों को हिंदी सिखाने के कई फायदे हैं। माता-पिता को बच्चों की परवरिश में हिंदी को शामिल क्यों करना चाहिए, ये जरूर जानें।

बच्चों को हिंदी सिखाना क्यों है जरूरी?
संस्कार और संस्कृति से जुड़ाव
हिंदी बच्चों को अपनी परंपराओं, लोककथाओं और धार्मिक मूल्यों से जोड़ती है। अभिभावक बच्चों को हिंदी से जोड़कर संस्कार और संस्कृति से जोड़ सकते हैं।
भावनात्मक अभिव्यक्ति
मातृभाषा में बच्चे अपने दिल की बात आसानी से कह पाते हैं। यह भावनात्मक अभिव्यक्ति का सरल तरीका है। इससे माता-पिता, दादा-दादी या घर के अन्य लोगों के साथ बच्चों को भावनात्मक जुड़ाव मजबूत होता है।
आत्मविश्वास का विकास
भले ही अंग्रेजी का चलन काफी बढ़ गया हो लेकिन आज भी भारत मे सार्वजनिक मंच पर हिंदी भाषा का उपयोग अधिक प्रभावी होता है। अंग्रेजी से अधिक हिंदी का भाव समझ में आता है। हिंदी सीखने से बच्चे सार्वजनिक मंचों पर बिना झिझक बोल पाते हैं।
परिवारिक रिश्तों में मजबूती
परिवार में सभी लोगों से जुड़ाव तब तक संभव नहीं, जब तक उनकी भाषा में समानता न हो। दादा-दादी और माता-पिता से संवाद हिंदी में ही सबसे गहरा और सहज होता है।
दोहरी भाषा का लाभ
अंग्रेजी का ज्ञान आवश्यक है। लेकिन अंग्रेजी के साथ हिंदी सीखने से बच्चों की बौद्धिक क्षमता और समझ और भी बढ़ जाती है।
परवरिश में भाषा की अहमियत
भाषा केवल पढ़ाई की चीज नहीं, बल्कि परवरिश का अहम हिस्सा है। जिस भाषा में बच्चा सोचता और सपने देखता है, वही भाषा उसकी मानसिक और सामाजिक जड़ों को मजबूत करती है। अगर हम हिंदी को बच्चों की रोजमर्रा की जिंदगी में शामिल करेंगे, जैसे कहानियों, कविताओं, खेलों और बातचीत के जरिए तो वे इसे गर्व के साथ अपनाएंगे।
आज पीएम असम में, करोड़ों की विकास परियोजनाओं का शुभारंभ होगा
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी आज असम में 18,530 करोड़ रुपये से अधिक की लागत वाली प्रमुख बुनियादी ढांचा और औद्योगिक विकास परियोजनाओं का उद्घाटन और शिलान्यास करेंगे। इनमें दरांग मेडिकल कॉलेज एवं अस्पताल, जीएनएम स्कूल और बी.एससी. नर्सिंग कॉलेज शामिल हैं। वह नुमालीगढ़ रिफाइनरी लि. (एनआरएल) में असम बायोएथेनॉल संयंत्र का उद्घाटन करेंगे।
असम के बाद कोलकाता और बिहार दौरे की योजना
इसके बाद सशक्त, सुरक्षित और आत्मनिर्भर भारत की प्रतिबद्धता के अनुरूप प्रधानमंत्री मोदी 15 सितंबर को कोलकाता में 16वें संयुक्त कमांडर्स कांफ्रेंस-2025 का उद्घाटन करेंगे और सैन्य बलों के कमांडरों को संबोधित करेंगे। दो साल में एक बार आयोजित होने वाला 16वां संयुक्त कमांडर सम्मेलन 15 से 17 सितंबर तक कोलकाता में आयोजित किया जा रहा है।
एक माह में दूसरा बिहार दौरा, राष्ट्रीय मखाना बोर्ड का करेंगे शुभारंभ
प्रधानमंत्री एक माह के भीतर ही दूसरी बार 15 सितंबर को बिहार दौरे पर पहुंचेंगे, जहां वह राष्ट्रीय मखाना बोर्ड का शुभारंभ करेंगे। यह बोर्ड उत्पादन और नई तकनीक के विकास को बढ़ावा देगा, कटाई के बाद के प्रबंधन को मजबूत करेगा, मूल्य संवर्धन और प्रसंस्करण को बढ़ावा देगा और मखाना के बाजार, निर्यात और ब्रांड विकास को सुगम बनाएगा।
पूर्णिया में हवाईअड्डा टर्मिनल का उद्घाटन
प्रधानमंत्री पूर्णिया में हवाईअड्डे के अंतरिम टर्मिनल भवन का उद्घाटन करेंगे, जिससे क्षेत्र में यात्री संचालन क्षमता में वृद्धि होगी। प्रधानमंत्री पूर्णिया में लगभग 36,000 करोड़ रुपये की लागत वाली कई विकास परियोजनाओं का शिलान्यास और उद्घाटन करेंगे।
बिहार में निजी क्षेत्र का सबसे बड़ा 25,000 करोड़ रुपये का निवेश
भागलपुर के पीरपैंती में ताप विद्युत परियोजना का शिलान्यास करेंगे, जो बिहार में निजी क्षेत्र का सबसे बड़ा 25,000 करोड़ रुपये का निवेश होगा। इस दौरान पीएम 2680 करोड़ रुपये से अधिक की लागत वाली कोसी-मेची अंतर-राज्यीय नदी संपर्क परियोजना के पहले चरण की आधारशिला भी रखेंगे।
रेल परियोजनाओं के उद्घाटन और शिलान्यास की भी योजना
रेल संपर्क में सुधार की अपनी प्रतिबद्धता के अनुरूप प्रधानमंत्री रेल परियोजनाओं का उद्घाटन और शिलान्यास करेंगे और कई ट्रेनों को हरी झंडी दिखाएंगे। अन्य परियोजनाओं के अलावा वह प्रधानमंत्री आवास योजना (ग्रामीण) के अंतर्गत35,000 ग्रामीण लाभार्थियों और प्रधानमंत्री आवास योजना (शहरी) के अंतर्गत 5,920 शहरी लाभार्थियों के लिए गृह प्रवेश समारोह में हिस्सा लेंगे और कुछ लाभार्थियों को चाबियां सौंपेंगे।
एक बार फिर भारत-पाकिस्तान मैच की मेजबानी करेगा दुबई
सूर्यकुमार यादव की अगुआई वाली भारतीय टीम रविवार को एशिया कप में चिर प्रतिद्वंद्वी पाकिस्तान के खिलाफ होने वाले मुकाबले में प्रबल दावेदार होगी। दिलचस्प बात है कि पिछले कुछ महीनों में सीमा पर बढ़े तनाव के बावजूद इस मुकाबले को लेकर किसी तरह की हाइप नहीं है और भारत में इस मैच के बहिष्कार की मांग की जा रही है। इन सब चीजों के बीच दोनों टीमों के खिलाड़ियों ने इस मैच के लिए कमर कस ली है।
टी20 विश्व कप को देखते हुए अहम है मैच
चार महीने बाद भारत में होने वाले टी20 विश्व कप को देखते हुए मुकाबला महत्वपूर्ण है, लेकिन कई वर्ष में पहली बार भारत और पाकिस्तान के बीच होने वाले क्रिकेट मैच को लेकर उस तरह के उत्साह का अभाव है जो दोनों देशों के बीच मैच में अक्सर होता है, जबकि यह रविवार को खेला जा रहा है। इतना ही नहीं कई पूर्व खिलाड़ी भी पाकिस्तान के साथ मैच खेलने के पक्ष में नहीं हैं।
इस साल दूसरी बार होगी भिड़ंत
आमतौर पर भारत और पाकिस्तान के बीच मैच के लिए फैंस को इंतजार रहता है। इस वर्ष दूसरी बार होगा जब भारत और पाकिस्तान की टीमें एक दूसरे के खिलाफ होंगी। इससे पहले इस साल की शुरुआत में चैंपियंस ट्रॉफी के दौरान भी दोनों देशों के बीच मुकाबला हुआ था। दिलचस्प बात है कि पिछली बार भी भारत और पाकिस्तान दुबई में खेली थी और एक बार फिर यह मैदान इस महामुकाबले की मेजबानी के लिए तैयार है।
भारत और पाकिस्तान के बीच एशिया कप मुकाबले की लाइव स्ट्रीमिंग की जानकारी इस प्रकार है…
भारत और पाकिस्तान के बीच एशिया कप 2025 का मुकाबला कब खेला जाएगा?
भारत और पाकिस्तान के बीच एशिया कप 2025 का मुकाबला 14 सितंबर यानी रविवार को खेला जाएगा।
भारत और पाकिस्तान के बीच एशिया कप 2025 का मुकाबला कहां खेला जाएगा?
भारत और पाकिस्तान के बीच एशिया कप 2025 का मुकाबला दुबई के दुबई इंटरनेशनल क्रिकेट स्टेडियम में खेला जाएगा।
भारत और पाकिस्तान के बीच एशिया कप 2025 का मुकाबला कितने बजे शुरू होगा?
भारत और पाकिस्तान के बीच एशिया कप 2025 का मुकाबला भारतीय समयानुसार रात आठ बजे से शुरू होगा। टॉस इससे आधे घंटे पहले यानी शाम 7.30 बजे होगा।
भारत और पाकिस्तान के बीच एशिया कप 2025 का मुकाबला कहां देख सकेंगे?
भारत और पाकिस्तान के बीच एशिया कप 2025 मुकाबले के प्रसारण अधिकार सोनी स्पोर्ट्स नेटवर्क के पास हैं। इस मैच की लाइव स्ट्रीमिंग सोनी लिव एप पर होगी। आप amarujala.com पर इस मैच की लाइव कवरेज देख सकते हैं।
भारत की सात और संपत्तियां यूनेस्को विरासत बनीं
भारत की सात नई प्राकृतिक धरोहरों को यूनेस्को की विश्व धरोहर की टेंटेटिव लिस्ट (अस्थायी सूची) में शामिल किया गया है। इनमें महाराष्ट्र के पंचगनी और महाबलेश्वर के डेक्कन ट्रैप्स तथा आंध्र प्रदेश की तिरुमला पहाड़ियां प्रमुख हैं। इन सात स्थलों के जुड़ने के बाद भारत की कुल धरोहरों की संख्या 69 हो जाएगी। इनमें 49 सांस्कृतिक, 3 मिश्रित और 17 प्राकृतिक श्रेणी की धरोहरें शामिल हैं।

समृद्ध सांस्कृतिक और प्राकृतिक विरासत के संरक्षण की प्रतिबद्धता
यूनेस्को के स्थायी प्रतिनिधिमंडल भारत की इन जगहों के चयन पर बताया कि इन धरोहरों को सूची में शामिल किया जाना देश की समृद्ध सांस्कृतिक और प्राकृतिक विरासत के संरक्षण के प्रति प्रतिबद्धता को दर्शाता है।
सूची में शामिल सात नए स्थलों पर एक नजर:
- डेक्कन ट्रैप्स (पंचगनी और महाबलेश्वर, महाराष्ट्र)
- सेंट मैरी आइलैंड क्लस्टर का भूवैज्ञानिक धरोहर (उडुपी, कर्नाटक)
- मेघालयन एज गुफाएं (ईस्ट खासी हिल्स, मेघालय)
- नगा हिल ओफियोलाइट (किफाइरे, नगालैंड)
- एर्रा मट्टी डिब्बालु (विशाखापत्तनम, आंध्र प्रदेश)
- तिरुमला हिल्स का प्राकृतिक धरोहर (तिरुपति, आंध्र प्रदेश)
- वरकला का प्राकृतिक धरोहर (केरल)
सात प्राकृतिक धरोहरें सूची में जोड़ी गई
विगत 12 सितंबर को किए गए औपचारिक एलान में कहा गया कि कुल सात प्राकृतिक धरोहरें सूची में जोड़ी गई हैं। यूनेस्को की प्रक्रिया के अनुसार, किसी भी धरोहर को विश्व धरोहर सूची में शामिल करने से पहले उसका टेंटेटिव लिस्ट (अस्थायी सूची) में होना अनिवार्य है। यूनेस्को में भारत के प्रतिनिधिमंडल ने भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (एएसआई) को उनके इस कार्य के लिए धन्यवाद दिया है।
छठी बार प्रमुखविहीन हुआ आयोग
मुख्य सूचना आयुक्त हीरालाल समारिया के सेवानिवृत्त होने के बाद केंद्रीय सूचना आयोग (सीआईसी) एक बार फिर प्रमुखविहीन हो गया है। यह स्थिति वर्ष 2014 के बाद छठी बार बनी है, जब आयोग के पास कोई प्रमुख नहीं है।

सीआईसी आरटीआई अधिनियम, 2005 के तहत गठित सर्वोच्च अपीलीय संस्था है। कानून के अनुसार इसमें एक मुख्य सूचना आयुक्त और अधिकतम 10 सूचना आयुक्त होने चाहिए। लेकिन पिछले कुछ वर्षों से नियुक्तियों में लगातार देरी हो रही है, जिससे आयोग अधूरा बना हुआ है और अपीलीय मामलों के निपटारे की गति प्रभावित हो रही है। सूचना कार्यकर्ता कमोडोर लोकेश बत्रा (सेवानिवृत्त) के अनुसार, अदालतों की तरह यहां कार्यवाहक प्रमुख का प्रावधान नहीं है। ऐसे में मुख्य सूचना आयुक्त का पद खाली रहने से कई प्रशासनिक और वित्तीय फैसले लंबित हो जाते हैं।
प्रधानमंत्री की अध्यक्षता वाली चयन समिति की सिफारिश पर राष्ट्रपति करते नियुक्ति
कार्मिक एवं प्रशिक्षण विभाग (डीओपीटी) के अनुसार, मई 2024 में मुख्य सूचना आयुक्त पद के लिए जारी विज्ञापन पर 83 आवेदन आए थे। वहीं अगस्त 2024 में सूचना आयुक्त पदों के लिए जारी विज्ञापन पर 161 आवेदन प्राप्त हुए। नियुक्ति प्रक्रिया के तहत नाम पहले खोज समिति को भेजे जाते हैं और फिर प्रधानमंत्री की अध्यक्षता वाली चयन समिति की सिफारिश पर राष्ट्रपति नियुक्ति करते हैं। आयोग के प्रमुख पद खाली रहने से अपीलीय मामलों के निपटारे की गति भी प्रभावित होती है। पारदर्शिता कानून के तहत जानकारी मांगने वाले नागरिकों को अंतिम स्तर पर न्याय देने वाला यह संस्थान लगातार क्षमता संकट से जूझ रहा है।
नेतन्याहू ने कतर में रह रहे हमास नेताओं को धमकाया
इस्राइली प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने शनिवार (स्थानीय समयानुसार) को कतर में रह रहे हमास नेताओं को चेतावनी दी। उन्होंने आरोप लगाया कि यही नेता गाजा युद्ध समाप्त करने में सबसे बड़ा रोड़ा हैं, जिसके चलते संघर्ष लंबा खिंच रहा है।

नेतन्याहू ने कहा कि दोहा स्थित हमास पोलित ब्यूरो युद्ध को अंतहीन रूप से खींच रहा है और बंधकों की रिहाई रोक रहा है। उन्होंने एक्स पर पोस्ट में लिखा, ‘कतर में बैठे हमास के आतंकी सरगना गाजा के लोगों की परवाह नहीं करते। वे हर युद्धविराम की कोशिश को रोकते रहे हैं, ताकि युद्ध को अंतहीन रूप से खींचा जा सके। अगर इनसे छुटकारा मिल जाए तो बंधकों की रिहाई और युद्ध का अंत संभव हो सकेगा।’
जब तक कतर हमास नेताओं को बाहर नहीं करता, इस्राइल कार्रवाई करेगा
द टाइम्स ऑफ इस्राइल के अनुसार, नेतन्याहू का यह बयान कतर की हमास के शीर्ष नेतृत्व की मेजबानी के लिए इस्राइल द्वारा की गई बार-बार की आलोचना के बीच आया है। इस हफ्ते की शुरुआत में नेतन्याहू ने कतर में बैठके हमास नेताओं की तुलना 9/11 हमले के बाद अमेरिका की कार्रवाई से की थी। एक वीडियो संदेश में उन्होंने कहा कि जब तक कतर इन्हें देश से बाहर नहीं करता या न्याय के कटघरे में नहीं लाता, तब तक इस्राइल चाहे वे कहीं भी हों उनके खिलाफ कार्रवाई करेगा। नेतन्याहू ने कहा, ‘उन्हें न्याय के कटघरे में लाओ, क्योंकि अगर तुम नहीं लाओगे, तो हम लाएंगे।’
कतर ने नेतन्याहू की टिप्पणियों को लापरवाह बताया
कतर ने नेतन्याहू की इन टिप्पणियों को ‘लापरवाहीपूर्ण’ करार दिया और कहा कि हमास नेताओं की मेजबानी उसकी अंतरराष्ट्रीय मध्यस्थता की भूमिका का हिस्सा है, जिसमें अमेरिका और इस्राइल भी शामिल रहे हैं।
कतर में हमास का दफ्तर इस्राइल-US के अनुरोध पर खुला
कतर के विदेश मंत्रालय ने बयान जारी कर कहा, ‘नेतन्याहू भली-भांति जानते हैं कि हमास का दफ्तर कतर में अमेरिका और इस्राइल के अनुरोध पर मध्यस्थता प्रयासों के तहत खोला गया था। बातचीत हमेशा आधिकारिक और पारदर्शी ढंग से हुई, जिनमें अमेरिकी और इस्राइली प्रतिनिधि भी मौजूद रहे। नेतन्याहू का यह आरोप कि कतर ने गुपचुप तरीके से हमास को पनाह दी, दरअसल अपनी निंदा झेल रही कार्रवाई को सही ठहराने की हताशा है।’
इस्राइल ने दोहा में हमास के शीर्ष नेतृत्व को बनाया था निशाना
टाइम्स ऑफ इस्राइल की रिपोर्ट के अनुसार, मंगलवार (स्थानीय समयानुसार) को इस्राइल ने दोहा में एक हवाई हमला किया, जिसका निशाना हमास का शीर्ष नेतृत्व था। माना जा रहा था कि हमास नेता उस समय गाजा में युद्धविराम और बंधकों की रिहाई के लिए अमेरिका समर्थित नए प्रस्ताव पर चर्चा कर रहे थे।
पहली बार काशी के छह मंदिरों से आज शुरू होगी निशुल्क ऑनलाइन पूजा
देश में पहली बार काशी से छह मंदिरों में निशुल्क ऑनलाइन पूजन की शुरुआत होने जा रही है। श्रद्धालु घर बैठे कहीं से भी बनारस के प्रमुख मंदिरों में पूजन करा सकेंगे। बड़ी शीतला मंदिर के महंत परिवार ने इसकी शुरुआत की है। पहली बार जीवित्पुत्रिका व्रत पर 14 सितंबर को मां संतान लक्ष्मी के पूजन से इसकी शुरुआत की जाएगी।
श्रद्धालुओं को महालक्ष्मी, बाबा कालभैरव, गौरीकेदारेश्वर, लोलार्केश्वर महादेव, बड़ी शीतला और अन्नपूर्णा मंदिर में इस सुविधा का लाभ मिलेगा। शीतला मंदिर के महंत पं. शिवप्रसाद पांडेय लिंगिया महाराज की प्रेरणा से उनके पुत्र पं. अवशेष पांडेय कल्लू महाराज ने इसकी शुरुआत की है। उन्होंने बताया कि उनके परिवार की कालभैरव मंदिर में महीने में चार बार, अन्नपूर्णा मंदिर में तीन से चार बार, बड़ी शीतला मंदिर, गौरीकेदारेश्वर और महालक्ष्मी मंदिर में वर्ष भर पारी रहती है।

उन्होंने श्रद्धालुओं की परेशानी को देखते हुए ऑनलाइन निशुल्क पूजन की शुरुआत की है। इसमें देश-विदेश से कोई भी श्रद्धालु अपनी सुविधा के अनुसार पूजन करा सकेंगे। काशी के छह प्रमुख मंदिरों में श्रद्धालुओं के परिवार की सुख-समृद्धि और शांति के लिए नाम व गोत्र के साथ ऑनलाइन पूजन कराया जाएगा। इसका कोई भी शुल्क नहीं लिया जाएगा। बाहर के श्रद्धालुओं को प्रसाद और पूजन का वीडियो कूरियर के जरिये भेजा जाएगा। वहीं स्थानीय श्रद्धालुओं को मंदिर में बुलाकर प्रसाद और पूजन का वीडियो दिया जाएगा। इसकी शुरुआत सोरहिया मेले में मां संतान लक्ष्मी के ऑनलाइन पूजन से 14 सितंबर को होगी।
मोबाइल के जरिये करा सकेंगे बुकिंग
पं. अवशेष पांडेय ने बताया कि श्रद्धालुओं की ऑनलाइन पूजा की बुकिंग के लिए मोबाइल नंबर 7459016660 जारी किया गया है। इस पर श्रद्धालु अपना नाम, गोत्र का नाम और स्थान का पता भेज कर निशुल्क ऑनलाइन पूजन की बुकिंग करा सकेंगे। पूजन और पंजीकरण की निगरानी महंत परिवार द्वारा की जाएगी।
छह मंदिरों में नियुक्त किए गए हैं 24 पुजारी
निशुल्क ऑनलाइन पूजन के लिए महालक्ष्मी, बाबा कालभैरव, गौरीकेदारेश्वर, लोलार्केश्वर महादेव, बड़ी शीतला और अन्नपूर्णा मंदिर में 24 पुजारियों की नियुक्ति की गई है। हर मंदिर में चार पुजारी ऑनलाइन पूजन कराएंगे।
एलन मस्क बोले- बेकाबू आव्रजन ब्रिटेन की पहचान के लिए खतरा
ब्रिटेन के दक्षिणपंथी कार्यकर्ता टॉमी रॉबिन्सन की अगुवाई में शनिवार (स्थानीय समयानुसार) को लंदन में हुई रैली में एक लाख से ज्यादा लोग शामिल हुए। पुलिस के मुताबिक, यह प्रदर्शन उस वक्त कुछ हद तक बेकाबू हो गया, जब उनके कुछ समर्थकों की पुलिस अधिकारियों से झड़प हो गई। अधिकारी दोनों गुटों को अलग करने की कोशिश कर रहे थे। इस रैली में टेस्ला के सीईओ एलन मस्क ने भी वीडियो के जरिये हिस्सा लिया और ब्रिटिश सरकार की आलोचना की। उन्होंने कहा, ‘ब्रिटेन की खूबसूरती खतरे में है। बेकाबू आव्रजन ने ब्रिटेन को तेजी से बदलना शुरू कर दिया है।’

ब्रिटेन के दक्षिणपंथी कार्यकर्ता टॉमी रॉबिन्सन की अगुवाई में शनिवार (स्थानीय समयानुसार) को लंदन में हुई रैली में एक लाख से ज्यादा लोग शामिल हुए। पुलिस के मुताबिक, यह प्रदर्शन उस वक्त कुछ हद तक बेकाबू हो गया, जब उनके कुछ समर्थकों की पुलिस अधिकारियों से झड़प हो गई। अधिकारी दोनों गुटों को अलग करने की कोशिश कर रहे थे। इस रैली में टेस्ला के सीईओ एलन मस्क ने भी वीडियो के जरिये हिस्सा लिया और ब्रिटिश सरकार की आलोचना की। उन्होंने कहा, ‘ब्रिटेन की खूबसूरती खतरे में है। बेकाबू आव्रजन ने ब्रिटेन को तेजी से बदलना शुरू कर दिया है।’
अब तक नौ लोगों की गिरफ्तारी, कई और उपद्रवी पुलिस के निशाने पर
मेट्रोपॉलिटन पुलिस ने बताया कि रैली के दौरान झड़प में कई अधिकारियों पर बोलतें फेकी गईं और उन्हें घूंसे और लात मारी गईं। हालात को संभालने के लिए हेलमेट और दंगारोधी ढाल से लैस अतिरिक्त पुलिस बल तैनात करना पड़ा। पुलिस ने कम से कम नौ लोगों को गिरफ्तार किया है, जबकि कई और लोगों की पहचान कर ली गई है।

रॉबिन्सन की रैली में जुटे 1.10 लाख लोग, जवाबी प्रदर्शन में पांच हजार लोग
पुलिस के मुताबिक, रॉबिन्सन द्वारा आयोजित ‘यूनाइट द किंगडम’ रैली में लगभग 110,000 लोग जुटे, जबकि स्टैंड अप टू रेसिज्म द्वारा आयोजित ‘मार्च अगेंस्ट फासीवाद’ विरोध प्रदर्शन में लगभग 5,000 लोग शामिल हुए। टॉमी रॉबिन्सन, जिनका असली नाम स्टीफन याक्सली-लेनन है, ने राष्ट्रवादी और इस्लाम-विरोधी इंग्लिश डिफेंस लीग की स्थापना की और ब्रिटेन के सबसे प्रभावशाली दक्षिणपंथी नेताओं में से एक हैं।

रैली में प्रवासन के विरोध पर केंद्रित रहे भाषण
यह रैली भले ही ‘अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता’ के समर्थन में बताई गई, लेकिन इसमें ज्यादातर भाषण प्रवासन के विरोध पर केंद्रित रहे। फ्रांस के दक्षिणपंथी नेता एरिक जेमोर ने कहा, ‘हम सब एक ही प्रक्रिया से गुजर रहे हैं, जहां यूरोपीय लोगों की जगह दक्षिण से आने वाले और मुस्लिम संस्कृति वाले लोग ले रहे हैं। यह उपनिवेशवाद का उल्टा रूप है।’ वहीं, टेस्ला के सीईओ मस्क ने कहा, ‘ब्रिटेन की खूबसूरती खतरे में है। बेकाबू आव्रजन ने ब्रिटेन को तेजी से बदलना शुरू कर दिया है।’

प्रवासियों को ब्रिटिश जनता से ज्यादा मिल रहे अधिकार
टॉमी रॉबिन्सन ने भीड़ से कहा कि प्रवासियों को अदालतों में अब ब्रिटिश जनता से ज्यादा अधिकार मिल रहे हैं। यह रैली ऐसे समय हो रही है जब इंग्लिश चैनल पार करके छोटी नावों से ब्रिटेन पहुंचने वाले शरणार्थियों पर देशभर में बहस तेज है।
प्रधानमंत्री स्टार्मर के खिलाफ जमकर हुई नारेबाजी
लंदन की सड़कों पर मार्च के दौरान एक समय ऐसा भी आया जब टॉमी रॉबिन्सन द्वारा आयोजित ‘यूनाइट द किंगडम’ और ‘स्टैंड अप टू रेसिज्म’ समूह आमने-सामने आ गए। प्रदर्शनकारियों ने ब्रिटेन, इंग्लैंड, अमेरिका और इज़राइल के झंडे तथा ट्रंप समर्थक टोपी पहनी और पीएम कीर स्टार्मर के खिलाफ नारे लगाए।

रॉबिन्सन समर्थकों ने पुलिस पर बोतलें फेंकी, शांतिपूर्ण प्रदर्शन के दौरान मामूली झड़प की भी खबरें
लंदन में प्रदर्शन से जुड़ी रिपोर्ट्स के मुताबित अधिकतर शांतिपूर्ण रहा लेकिन कुछ रॉबिन्सन समर्थकों ने पुलिस पर बोतलें फेंकी। शांतिपूर्ण प्रदर्शन के दौरान भीड़ में शामिल कुछ उपद्रवी तत्वों ने कानूनी एजेंसियों और पुलिस के अफसरों पर मुक्के भी बरसाए। हिंसा भड़काने की ताक में प्रदर्शनकारियों और पुलिस के बीच झड़पें भी हुईं। कई लोगों को गिरफ्तार भी किया गया। रॉबिन्सन और यूरोपीय अतिदक्षिणपंथी नेताओं ने प्रवासन के खिलाफ भाषण भी दिए।

आसमान से कैमरे ने दिखाया मंजर… बड़ी संख्या में दिखे पुलिसकर्मी
अंतरराष्ट्रीय समाचार एजेंसी रॉयटर्स के माध्यम से एएनआई ने जो वीडियो और तस्वीरें मुहैया कराईं, इनमें देखा जा सकता है कि लंदन की सड़कों पर आव्रजन विरोधी प्रदर्शनों में लोग भारी तादाद में उमड़े। प्रदर्शनकारियों की भीड़ ब्रिटिश संसद भवन, वेस्टमिंस्टर की तरफ बढ़ती दिखाई दी। विरोधी प्रदर्शनकारी संसद के मुख्य मार्ग, व्हाइटहॉल के दूसरे छोर पर जमा हुए। मार्च के दौरान पुलिस बड़ी संख्या में मौजूद रही। लंदन की मेट्रोपॉलिटन पुलिस ने कहा कि दोनों समूहों को अलग रखने के लिए पर्याप्त अवरोधक लगाए गए।
रॉबिन्सन के विरोधी खेमे की रैली से भी जमकर हुई नारेबाजी
‘स्टैंड अप टू रेसिज्म’ नारे के साथ लंदन की सड़कों पर उतरे रॉबिन्सन के विरोधी खेमे के हजारों प्रदर्शनकारी ब्रिटिश संसद के मुख्य मार्ग, व्हाइटहॉल के दूसरे छोर पर इकट्ठा हुए। समूह ने व्हाइटहॉल के दक्षिणी छोर तक मार्च किया। रैली के दौरान कड़ी निगरानी के लिए भारी पुलिस बल मौजूद रहा। मार्च में शामिल आक्रोशित लोगों ने अपने हाथों में नारे लिखी तख्तियों और देश के राष्ट्रीय ध्वज के अलावा कई अन्य प्रतीकों को भी थाम रखा था। सड़कों पर मौजूद जनता के बीच कौतुक के भाव भी दिखे।




