शशिकांत गुप्ते
कौन बनेगा? आपके पास कौन सा चेहरा है? विपक्षी एकता पर प्रश्न उपस्थित करते हुए,यह सवाल खड़ा किया जाता है कि,विपक्षी दलों के पास कौन सा व्यक्ति है? जो प्रधामंत्री बनाने लायक है?
उपर्युक्त प्रश्नों को उपस्थित करने वाले स्वयं को बुद्धिजीवी तो समझते लेकिन उक्त प्रश्न उपस्थित करने के पूर्व भूल जातें हैं कि, लोकतांत्रिक व्यवस्था में चयन को महत्व होता है ना की थोपने को।
उक्त प्रश्न उपस्थित करने वाले बुद्धिजीवियों के लिए प्रख्यात व्यंग्यकार स्व.हरिशंकर परसाई जी का यह व्यंग्य एकदम सटीक है।
एक अस्पताल के जनरल वार्ड में,लगभग दस मरीज भर्ती थे,उनमें से एक मरीज की हालत ज्यादा ही बिगड़ती देख, उस वार्ड में कार्यरत नर्स जोर से चिल्लाई डॉक्टर, वार्ड में भर्ती मरीजों में से छः सात मरीज उठ बैठे,कारण वे सभी हिंदी के डॉक्टर ( हिंदी में पी एच डी किए हुए) थे।
चुनाव पूर्व यदि कोई दल किसी एक व्यक्ति को प्रदेश के मुखिया या देश के मुखिया के रूप में प्रस्तुत करता है,इसका सीधा सा मतलब है,उस दल के आंतरिक लोकतंत्र पर गंभीर प्रश्न है?
चुनाव पूर्व किसी व्यक्ति को प्रस्तुत करना मतलब ही थोपना होता है,लोकतंत्र में चयन होना चाहिए।
किसी भी दल के आलाकमान के द्वारा दल के किसी एक व्यक्ति चुनाव पूर्व थोपना, अलोकतांत्रिक परंपरा का द्योतक है।
थोपे गए व्यक्ति में तानाशाही प्रवृत्ति जागृत होती है,ऐसा व्यक्ति अपने साथ करने वाले सहयोगियों को अपना मातहत समझने लगता है। ऐसा व्यक्ति जनता की मूलभूत समस्याओं से कोई सरोकार नहीं रखता है।
ऐसा व्यक्ति सामंती तरह से जीवन यापन करता है।
ऐसा व्यक्ति स्वयं के व्यक्तित्व को स्वयं के द्वारा महिमंडित करने में व्यस्त होने से वह भ्रष्ट आचरण से बेखबर हो जाता है। या यूं कहा जा सकता है कि जान बूझ कर बेखबर हो जाता है।
तानाशाह प्रवृत्ति का व्यवहारिक अर्थ होता है,भय ग्रस्त मानसिकता?
फिल्मों खलनायक को कितना ही क्रूर दर्शाया जाए लेकिन वह हमेशा सुरक्षा कर्मियों से घिरा रहता है?
ऐसे व्यक्ति के लिए शायर अकबर इलाहाबादी का यह शेर एकदम सटीक है।
क़ौम के ग़म में डिनर खाते हैं हुक्काम के साथ
रंज लीडर को बहुत है मगर आराम के साथ
शशिकांत गुप्ते इंदौर





