भोपाल। प्रदेश में सर्वाधिक वाहन दुर्घटनाएं भले ही चारों महानगरों में होती हैं, लेकिन सड़क हादसों में सर्वाधिक मौतों के मामले में धार जिला पहले स्थान पर बना हुआ है। इस जिले में कम सड़क हादसे होने के बाद सर्वाधिक मौत हुई हैं। यह खुलासा हुआ है सरकारी आंकड़ों से। वाहन दुर्घटनाओं के मामले में भोपाल जिला तीसरे स्थान पर है। इस मामले में पहले दो स्थानों पर क्रमश: जबलपुर और इंदौर है।
इन सड़क हादसों पर रोक लगाने के लिए प्रशासन द्वारा प्रदेश में खरगोन के बाद धार जिले में सर्वाधिक दुर्घटना वाले स्थलों को चिहिन्त कर उन्हें ब्लैक लिस्टेड किया गया है। पुलिस आंकड़ों के मुताबिक 2019 की अपेक्षा 2020 में सड़क हादसों में 5403 की कमी आई है। यह आंकड़ा बीते साल की तुलना में करीब पौने ग्यारह फीसद कम है। इस वजह से सड़क हादसों में होने वाली मौतों में भी 2019 की तुलना में 108 लोगों की कम मौत हुई है।
हादसे कम होने की वजह से घायलों की संख्या में 6360 की कमी दर्ज की गई है। जो बीते साल की तुलना में 12 फीसद कम है। इन हादसों में कमी और उनका शिकार होने वाले लोगों की संख्या में कमी की वजह पुलिस की जगह कोरोना बना है। दरअसल कोरोना के चलते लागू किए गए लॉकडाउन की वजह से करीब 2 माह वाहनों का न चलना है। इसकी वजह से भोपाल जिले में दुर्घटनाओं के साथ ही मृतकों की संख्या में भी कमी आई है। भोपाल में सड़क हादसों का आंकड़ा 2295 रहा जो कि 2019 में 3287 था। भोपाल में 2019 में 259 लोगों की मौत हुई थी जबकि बीते साल यह संख्या 237 रही। इसी तरह से जबलपुर में बीते साल 3226 दुर्घटनाओं में 422 लोगों की मौत हुई, जबकि 2019 में 3397 दुर्घटनाओं में 406 लोगों की मौत हुई थी। इस तरह लॉकडाउन के बाद भी इस जिले में मृतकों की संख्या में वृद्धि हुई है। इंदौर में 2019 में 3383 दुर्घटनाओं में 328 लोगों की मौत हुई थी , जबकि बीते साल वहां 3036 दुर्घटनाओं में 449 लोगों की जान गई। इस तरह से दुर्घटनाओं में कमी के बाद भी इंदौर में अधिक मौत हुई हैं। धार जिले में साल 2020 में 1853 दुर्घटनाओं में 561 लोगों की मौत हुई है। यह संख्या प्रदेश में सर्वाधिक है। इसी तरह से इंदौर के बाद खरगोन, छिंदवाड़ा ,रीवा, सतना ,सागर जिलों में हर साल 300 से ज्यादा लोग वाहन दुर्घटनाओं में जान गवां देते हैं।
करना पड़ चुका है नाराजगी का सामना: जनवरी 2019 से सितंबर 2019 की अवधि की तुलना में जनवरी 2020 से सितंबर 2020 के बीच प्रदेश में सड़क हादसों और उसमें हुई मौत और घायलों की संख्या में 38 फीसदी की कमी दर्ज हुई है। इससे प्रदेश के लिए राहत बताने पर सुप्रीम कोर्ट रोड सेफ्टी कमेटी के सदस्य बेहद नाराज हो गए थे। इसके बाद उनके द्वारा दो टूक कहा गया कि कोरोना काल में वाहनों के पहिया जाम होने से इसे आप अपनी उपलब्धि समझ रहे हैं। दरअसल केंद्र द्वारा मोटर व्हीकल एक्ट 1988 में संशोधन को लागू किया गया है , लेकिन इसे प्रदेश में लागू नहीं किया गया है। संशोधन एक्ट की हर राज्य में मॉनिटरिंग के लिए सुप्रीम कोर्ट ने हाई पावर रोड सेफ्टी कमेटी गठित की है। इसमें सुप्रीम कोर्ट के सेवानिवृत्त न्यायाधीश अभय मनोहर सपरे को अध्यक्ष बनाया गया है। यह कमेटी प्रत्येक राज्य में जाकर केंद्र सरकार द्वारा जारी गाइडलाइन के संबंध में जानकारी लेती है। अक्टूबर माह में कमेटी के सदस्यों ने भोपाल में अफसरों के साथ मीटिंग कर उनसे संशोधित एक्ट यातायात व्यवस्था सुधारों को लेकर चर्चा की थी।उस समय मप्र के अफसरों ने जनवरी 2019 से सितंबर 2019 के दौरान वाहन दुर्घटनाओं के जनवरी 2020 से सितंबर 2020 के तुलनात्मक आंकड़े पेश किए थे , जिसकी वजह से कमेटी के सदस्यों ने नाराजगी जाहिर की थी।





