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फेफड़ाें के कैंसर की अलग–अलग स्टेज और उनका उपचार

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      डॉ. प्रिया ‘मानवी’

लैंसेट की रिपोर्ट  के अनुसार साल 2020 में भारत में लंग्स कैंसर (lung cancer) के 72510 मरीज मिले थे, जिसमें से 66279 लोगों को अपनी जान गँवानी पड़ी थी। आप सोच कर देखिए लंग्स कैंसर के क्या कारण होते होंगे? पहला कारण जो आपके दिमाग़ में आता होगा, उसका नाम स्मोकिंग या ओरल सेक्स है। लेकिन एक दूसरी रिपोर्ट भी है जो अन्य कारण की ओर भी इशारा करती है।

     इंडियन जर्नल ऑफ कैंसर की ये रिपोर्ट कहती है कि लंग्स कैंसर से पीड़ित तकरीबन 32.4 प्रतिशत लोग ऐसे थे जिन्होंने अपनी जिंदगी में कभी सिगरेट नहीं पी थी, ओरल सेक्स से भी दूर थे। तो अब आपके दिमाग में तीसरा कारण क्या आ रहा है? 

हम बताते हैं. वो है – प्रदूषण। 

 अब सवाल ये है कि फेफड़ों के इस कैंसर से कैसे निपटा जाए, जब प्रदूषण धीरे धीरे पूरे देश में पाँव पसार चुका है? क्या हैं लंग्स कैंसर  के अलग अलग स्टेज और किस स्टेज पर जा कर इसका इलाज नामुमकिन हो सकता है। आज समझेंगे इसे.

*कैंसर के कितने स्टेज?*

लंग्स कैंसर के चार स्टेज हैं। लेकिन इसकी गम्भीरता के हिसाब से इन्हें तीन कैटेगरीज में बांटा जा सकता है।

   अर्ली स्टेज जिसमें स्टेज 1 और 2 आते हैं। दूसरी कैटेगरी है लोकली एडवांस्ड स्टेज, जिसमे स्टेज 3 आता है। चौथा है एडवांस्ड स्टेज जो कैंसर का फोर्थ और आखिरी स्टेज होता है।

*स्टेज 1 :*

यह लंग कैंसर का सबसे शुरुआती स्टेज है। इस बात के पूरे चांस हैं कि इस स्टेज में लंग्स का कैंसर केवल फेफड़े तक सीमित रहता है और किसी भी ऑर्गन को प्रभावित नहीं करता।

 लक्षण :

अमूमन यह देखा गया है कि स्टेज 1 के कोई विशेष लक्षण नहीं होते, जिस वजह से लोग अक्सर इसे नजरंदाज कर देते हैं। हल्की खांसी आना, कभी-कभी सांस लेने में परेशानी होना या सीने में कभी कभार दर्द उठना – ये लंग्स कैंसर स्टेज 1 के लक्षण हो सकते हैं।

 उपचार :

*1. सर्जरी :*

अक्सर स्टेज 1 के लंग्स कैंसर में पाया जाता है कि कैंसर केवल फेफड़ों में है। ऐसी स्थिति में सर्जरी से कैंसर को हटा दिया जाता है। या फेफड़ों का वो हिस्सा जो कैंसर से प्रभावित है उसे हटा दिया जाता है।

*2. रेडियोथेरेपी :*

कई केसेस ऐसे भी होते हैं जब मरीज का शरीर सर्जरी के लिए तैयार नहीं होता। ऐसे में रेडियोथेरेपी काम आती है और रेडियोथेरेपी के जरिए कैंसर को हटाया जाता है।

*3. कीमोथेरेपी :*

कीमोथेरेपी का इस्तेमाल तब होता है जब ऊपर के दोनों तरीके काम नहीं आते और कैंसर का खतरा बढ़ा हुआ होता है।

*स्टेज 2 :*

स्टेज 2 में कैंसर अक्सर फेफड़ों में तो अपना कब्जा जमा चुका होता है लेकिन शरीर के बाकी हिस्सों तक नहीं फैला होता। इस वजह से इसका इलाज भी मुमकिन है अगर वक्त रहते कैंसर डायग्नोस हो जाए।

 लक्षण :

1. दवाइयों के बाद भी अगर खांसी नहीं जा रही है तो ये लंग कैंसर  के लक्षण हो सकते हैं।

नॉर्मल खांसी तो इसके लक्षणों में है ही, लेकिन कई केसेस में खांसी के साथ खून भी आ सकता है. इसके अलावा अगर आपको सांस लेने में परेशानी हो रही हो और ये लक्षण लगातार बना रहे तो ये भी लंग्स कैंसर के लक्षण हो सकते हैं।

2. अगर आपके सीने में अक्सर दर्द जैसा या प्रेशर जैसा महसूस होता है।

3. बार बार थकान और अचानक वजन घट जाना भी स्टेज 2 लंग्स कैंसर के लक्षण हो सकते हैं।

उपचार :

*1. सर्जरी :*

कैंसर के दूसरे स्टेज पर डॉक्टरों की कोशिश होती है कि वे सर्जरी के जरिए कैंसर से इंफेक्टेड फेफड़े का हिस्सा निकाल दें। कई बार जब पूरा फेफड़ा ही इंफेक्टेड होता है तो डॉक्टरों को पूरा फेफड़ा ही शरीर से हटाना पड़ता है।

*2. कीमोथेरेपी :*

कीमोथेरेपी अक्सर सर्जरी के बाद दी जाती है। दरअसल सर्जरी के बाद भी जो कैंसर सेल्स बॉडी में बचे रह जाते हैं, उन्हें खत्म करने के लिए ये थेरेपी दी जाती है।

*3. रेडियोथेरेपी :* 

यह कैंसर सेल्स को शरीर से कम करने के लिए की जाने वाली थेरेपी है। जब डॉक्टर को ये लगता है कि मरीज की सर्जरी संभव नहीं है तब वो अक्सर रेडियोथेरेपी का सहारा लेते हैं।

*स्टेज 3 :*

लंग कैंसर का स्टेज 3 अक्सर खतरनाक होता है क्योंकि कैंसर लंग से निकलकर कई बार लिम्फ नोड्स तक फैल चुका होता है। कई बार कैंसर एक ही फेफड़े में और कई बार दोनों फेफड़ों को भी प्रभावित कर चुका होता है।

लक्षण :

1. लगातार खांसी और खांसी के साथ खून आना, स्टेज 3 लंग कैंसर के लक्षणों में से एक है।

2. स्टेज 3 लंग कैंसर में सांस लेने में कठिनाई बढ़ती चली जाती है।

3. अगर आपके सीने में तेज दर्द होता है और उस दर्द के साथ अक्सर बुखार भी हो जाता है तो वो भी स्टेज 3 लंग कैंसर के लक्षणों में से एक हो सकता है।

4. अचानक वजन कम हो जाना और बार बार थकान महसूस करना भी स्टेज 3 के ही लक्षणों में से एक है।

 उपचार :

स्टेज 3 में स्टेज 2 या स्टेज 1 के मुकाबले कैंसर ज्यादा फैल चुका होता है। इसी वजह से इलाज थोड़ा मुश्किल हो सकता है।

    हालांकि कैंसर के पूरी तरह ठीक हो जाने की संभावना रहती है। इस स्टेज में कैंसर के इलाज के ये तरीके हो सकते हैं :

*1. कम्बाइन्ड थेरेपी :*

कम्बाइन्ड थेरेपी का मतलब ये है कि कीमोथेरेपी, सर्जरी और रेडियोथेरेपी को मिला कर इलाज देना। इसमें सर्जरी से पहले कीमोथेरेपी और रेडियोथेरेपी दी जाती है ताकि शरीर में जो भी कैंसर सेल्स हैं वो सिकुड़ जाएं ताकि सर्जरी आसानी से हो सके। सर्जरी के बाद भी कीमोथेरेपी और रेडियोथेरेपी को कुछ दिन तक कन्टिन्यू रखा जाता है।

*2. इम्यूनोथेरेपी :* 

ये थेरेपी शरीर के इम्यून सिस्टम को मजबूत करने के लिए दी जाती है ताकि हमारा शरीर कैंसर सेल्स से लड़ सके।

    यह उस वक्त काम आती है जब सारे इलाज के रास्ते बंद हो जाएं या इलाज के तमाम जतनों का असर शरीर पर कम हो रहा हो।

*स्टेज 4 :*

लंग कैंसर का ये स्टेज भयानक और अंतिम स्टेज है। इस स्टेज में लंग का कैंसर लंग्स से बाहर निकलकर शरीर के अन्य हिस्सों में भी फैल जाता है।

लक्षण :

1. स्टेज 4 लंग कैंसर से जूझ रहे लोगों को भयानक खांसी आती है और कई बार खांसी में खून भी आता है।

2. सांस लेने में दिक्कत होना भी इस स्टेज के लक्षणों में से एक है।

3.  कैंसर के मरीजों को शरीर में भयानक दर्द से जूझना पड़ सकता है। सिर में और हड्डियों में दर्द इस दौरान और कॉमन है।

4. इस दौरान वजन का कम होना, कमजोरी और थकान महसूस होना भी बहुत कॉमन है।

5. शरीर के अंगों में सूजन होने लगती है। लीवर और पेट के अन्य हिस्सों में सूजन इलाज के बावजूद भी नहीं जाती है।

 उपचार :

*1.कीमोथेरेपी :*

ये इलाज शरीर से कैंसर सेल्स को खत्म करने के लिए किया जाता है। खास कर स्टेज 4 में जब कैंसर शरीर में फैल चुका होता है। को नष्ट करने के लिए एक प्रमुख उपचार है, खासकर जब कैंसर शरीर के अन्य हिस्सों में फैल चुका हो।

*2. इम्यूनोथेरेपी :* 

इम्यूनोथेरेपी में कैंसर सेल्स की पहचान कर के उन्हें नष्ट किया जाता है और इम्यून सिस्टम को मजबूत करने की कोशिश की जाती है। कई बार स्टेज 4 में इलाज का ये तरीका कारगर हो सकता है।

*3. टार्गेटेड थेरपी :*

इस इलाज में दवाओं का इस्तेमाल होता है जो शरीर से कैंसर सेल्स खत्म करने के काम आती हैं। कैंसर भले ही इससे पूरी तरह ठीक ना हो सके लेकिन ये थेरेपी कैंसर को शरीर में बढ़ने से जरूर रोक देती है।

*4. पेलियटिव केयर :*

जब ये लगने लगता है कि किसी व्यक्ति का लंग कैंसर इलाज से पूरी तरह ठीक नहीं हो सकता तब ये तरीका आजमाया जाता है ताकि मरीज अपनी बची हुई जिंदगी कम दर्द में काट सके। उसे ज्यादा तकलीफ ना हो।

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