आनन्द पुरोहित
8 दिसम्बर को इन्दौर में अपने लाइव शो में गायक दिलजीत दोसांझ ने.. इन्दौरी श्रोताओं से दोनों हाथ उठवा पहले तो जय श्री महांकाल का उद्घोष करवाया… फिर राहत इंदौरी का एक शेर सुना इन्दौरी मीडिया पर ही निशाना साध उसे कटघरे में खड़ा करते हुए चेतावनी देते कहा कि मीडिया वालों मुझे न कोई बदनामी का भय है..ना ही टेंशन है।
विगत कुछ समय से पता नहीं क्या हो गया है इन्दौरी मीडिया को कि हर कोई ऐरा गैरा चाहे जब इस पर उंगली उठा इसे कटघरे में खड़ा कर देता है। सोचना मीडिया वालों को भी चाहिए और अपने आचरण में बदलाव लाना चाहिए…. क्योंकि किसी भी मीडिया सुर्खी पर आजकल संबंधित उस पर ही उंगली उठाने लगता है, शायद फैशन सा बन गया है आजकल…. लेकिन सिर्फ फैशन नहीं कहीं न कही मीडिया की भी कोई कमजोर कड़ी, कमजोर नस दिखाई देती है उन ऊंगली उठाने वालों को तभी तो ये बिना जाने समझे तड से मीडिया की और उंगली तान उसे कटघरे में खड़ा करते हैं… करना होगा विचार मीडिया को। दिलजीत के पहले भी इन्दौर में…. वो चौराहे पर नाचने वाली लड़की… और छपन्न पर अर्द्धनग्न घूमती युवती ने भी मीडिया को निशाना बनाया था।…. नेताओं की बात तो छोड़िए साहब।… अब ये दिलजीत भी इन्दौर के मीडिया पर उंगली उठा रहा… बगैर कुछ समझें जाने।
दिलजीत कह रहा कि मेरे शो की टिकट ब्लैक हो रही तो उसमें मेरा क्या कसूर। साथ ही वो मीडिया को निशाना बनाते राहत इन्दोरी का शेर सुना रहा। …. तों दिलजीत पहले तो तुम अच्छी तरह से यह जान लों कि तुमको इन्दौर के किसी भी मीडिया ने कसूरवार नहीं बताया है।…. किसी भी मीडिया ने तुमको ब्लेकर नहीं कहा है… तुम्हारे इस आयोजन के टिकट ब्लैक होने की खबरें जितनी भी मीडिया सुर्खियों में आई है उसमें आयोजकों की अव्यवस्था को इंगित करते उनके गैर जिम्मेदाराना रवैए को ही उजागर किया है।…. किसी भी मीडिया ने यह नहीं कहा कि दिलजीत इन्दौर में अपने आयोजित कार्यक्रम की टिकिट ब्लैक कर रहा …..फिर तुम क्यों इतना जबरन फड़फड़ा रहे ।….
जहां तक टिकट ब्लैक होने की बात है तो इसके लिए सीधे तौर पर आयोजकों का प्रबंधन ही जिम्मेदार है और इन्दौरी मीडिया ने उनकी ही इस गैर जिम्मेदाराना लापरवाही के साथ कई और अनियमितताओं के साथ गैर जिम्मेदाराना और असांस्कृतिक गतिविधियों को भी उजागर किया है…. चूंकि कार्यक्रम के मुख्य कलाकार तुम ही हो… कोई रशियन कुड़िया नहीं … और इस कार्यक्रम का प्रचार प्रसार भी तुम्हारे कार्यक्रम के रूप में ही हो रहा है जो कि स्वाभाविक ही है.. तो कार्यक्रम तुम्हारा ही माना जाएगा और लिखा तथा बोला तो यहीं जाएगा ना, कि दिलजीत के लाइव शो के टिकटों की कालाबाजारी हो रही है। या कुछ और लिखे तुम ही बताओ दिलजीत।
इन्दौरी मीडिया पर उंगली उठाने से पहले थोड़ा सा तो दिमाग लगाकर सोचते दिलजीत।…. वैसे एक बात बता दूं की शायद ऐसे ही बगैर सोचे समझे बोलने वालों के लिए इन्दौर में बोलते हैं…. कि भिया जो जबरन मुंह ज्यादा खोलता है ना तो उसके इस तरह जबरन मुंह खुलने से उपर दिमाग का दरवाजा बन्द हो जाता है।
वैसे दिलजीत तुम ने सिर्फ कार्यक्रम के टिकटों की कालाबाजारी के बारे में ही मीडिया पर उंगली उठाते कहा कि…. मीडिया वालों, ना तो मुझे कोई बदनामी का भय है, ना कोई टेंशन है…. जबकि कार्यक्रम परिसर में लगाएं जा रहे शराब कबाब के स्टालों को लेकर भी इन्दौर का मीडिया खबरें छाप उसे असांस्कृतिक बता देवी अहिल्या की इस पावन नगरी के आचरण के विरूद्ध बता रहा था।… तुमने दारू शारू कबाब शबाब के बारे में तो कुछ नहीं कहा,….. दो शब्द तो बोलते आयोजकों से पूछते ओपनली…. की ये यहां दारू शारू कबाब शबाब की दुकान लगाने का क्या मामला है…. परन्तु तुमने भी जबरन बोलाबाली के चक्कर में अपने दिमाग को खुलने ही नहीं दिया….. नहीं तो ये बात भी जेहन में आती और मीडिया पर ऊंगली उठाने से पहले आयोजकों की क्लास ले उनसे सवाल जवाब करते और हकीकत उजागर होती।….. खैर दिलजीत अभी भी बहुत से ऐसे मौके आने है तो अब ध्यान रखना… और मीडिया पर उंगली उठाने से पहले, आयोजकों की क्लास लेना मत भूलना….नहीं तो अगला कोई आयोजक तुमको अंधेरे में रखकर… तुम्हारे दिमाग की बत्ती ऐसे ही बंद कर… तुमको टिकटों की कालाबाजारी में उलझा…. मंच पर रशियन कुड़ियां नचवा देगा …. और तुम ऐसे ही बड़बोले बोलवचन बोलते रह जाओगे।
वैसे जिसने तुमको इन्दौरी मीडिया के बारे में जानकारी दी है ना उससे इन्दौर के एक थाने में फोन लगवा पुछवा लेना वहां गिरफ्तार दोनों टिकट ब्लेक करने वालों ने अपने संबंध आयोजकों से उजागर करतें बयान दे दिया हैं, मामला दर्ज हों गया है।…. चलते चलते तो बस इतनी ही सलाह देता हूं कि… अगली बार मुंह खोलने से पहले, दिमाग का दरवाजा खोलना और मीडिया को निशाना बनाने के पहले सोचना दस बार…. पूरी बात का पता कर लेना फिर बोलना.. दिलजीत।






