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*संयुक्त किसान मोर्चे के आह्वान पर 26 नवंबर को होंगे जिला स्तरीय प्रदर्शन*

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*किसानों के प्रति भेदभावपूर्ण नीति अपना रही है भाजपा सरकार*

*मक्का, सोयाबीन, धान की एमएसपी पर खरीद करें सरकार* 

*गेंहू,धान की खरीद न करने के फैसले को रद्द करें मुख्यमंत्री* 

*हिम्मत है तो विधायकों और कर्मचारियों का वेतन आधा करके दिखाएं मुख्यमंत्री*–     *- डॉ सुनीलम*

      किसान संघर्ष समिति की प्रदेश कार्यकारिणी की बैठक आज राष्ट्रीय अध्यक्ष डॉ सुनीलम की अध्यक्षता में एवं राष्ट्रीय प्रवक्ता एड शिवसिंह, प्रदेश अध्यक्ष एड आराधना भार्गव, कार्यकारी प्रदेश अध्यक्ष इंद्रजीत सिंह की उपस्थिति में संपन्न हुई। संयुक्त किसान मोर्चा द्वारा आगामी 26 नवंबर को देशभर में प्रदेश की राजधानी और जिला मुख्यालयों पर आयोजित कार्यक्रमों की जानकारी देते हुए डॉ सुनीलम ने कहा कि संयुक्त किसान मोर्चा द्वारा 26 नवंबर 2025 को पूरे देश में एमएसपी की कानूनी गारंटी, किसानों की कर्जा मुक्ति, आंदोलन के दौरान मारे गए किसानों के परिजनों को उचित मुआवजा और नौकरी दिलाने, किसानों के खिलाफ दर्ज मामलों को वापस लेने आदि लंबित मांगों को लेकर ‘चेतावनी रैलियां’ आयोजित करने का निर्णय लिया गया है। 

उन्होंने कहा कि भाजपा की डबल इंजन सरकार किसानों के प्रति भेदभावपूर्ण नीति अपना रही हैं। मक्का और सोयाबीन समर्थन मूल्य से आधे दाम पर बिक रहे हैं लेकिन सरकार  मौन है।

डॉ सुनीलम ने कहा कि मुख्यमंत्री में हिम्मत है तो विधायकों और कर्मचारियों का वेतन आधा करके दिखाएं।

   एड शिवसिंह ने कहा कि केंद्र सरकार किसानों से वायदा करके मुकर गई है इसका खामियाजा सरकार को भुगतना पड़ेगा। उन्होंने मक्का, धान, सोयाबीन की एमएसपी पर खरीद करने की मांग की।

   एड आराधना भार्गव ने कहा कि प्रदेश सरकार किसानों पर जबरन भावांतर योजना थोप रही है जबकि 2017 में बेंची गई उपज का भावांतर योजना का  पैसा राज्य सरकार अभी तक किसानों को दे नहीं सकी है। 

उन्होंने कहा कि सरकार 10 घंटे से अधिक बिजली देने वाले अधिकारियों को वेतन कटौती का नोटिस देकर धमका रही है। पूरे प्रदेश में इस तुगलकी फरमान का विरोध किया गया गया फलस्वरूप सरकार को आदेश वापस लेना पड़ा। 

    इंद्रजीत सिंह शंखू ने कहा कि विंध्य के किसानों को धान का न तो उचित दाम मिल रहा है न ही समय पर खाद मिल रहा है। धान की प्रोत्साहन राशि भी सभी किसानों को नही मिल सकी है। 

   उन्होंने  प्रदेश और जिला पदाधिकारियों से संयुक्त किसान मोर्चा द्वारा आयोजित 26 नवंबर के चेतावनी धरने को सफल बनाने की अपील की। 

प्रदेश सचिव और इंदौर संभाग के संयोजक रामस्वरूप मंत्री ने कहा कि भावांतर योजना धोखा है, प्रदेश के लाखों किसानों और इंदौर के 30,000 किसानों का भावांतर का  बकाया है लेकिन उनका भुगतान सरकार नहीं कर रही है।

उन्होंने कहा कि इंदौर में 26 नवंबर को संयुक्त किसान मोर्चे से जुड़े सभी संगठनों और केंद्रीय श्रमिक संगठनों की संयुक्त अभियान समिति द्वारा संयुक्त रूप से सुबह 11:30 से 1:00 बजे तक संभाग आयुक्त कार्यालय पर धरना दिया जाएगा। 

   प्रदेश उपाध्यक्ष राधेश्याम काकोड़िया ने कहा कि विकास के नाम पर पूंजीपतियों और बहुउद्देशीय कंपनियों ने  प्रकृति को उजाड़ने का काम किया है जिसके परिणामस्वरूप बेमौसम बारिश और पर्यावरणीय परिवर्तन के कारण किसानों की फसलों के साथ साथ जन धन को नुक़सान हो रहा है।

सिवनी से प्रदेश सचिव डॉ राजकुमार सनोडिया ने कहा कि सुपर सीडर हर किसान के पास नहीं है एवं लागत भी अधिक है। किसानों की लागत कम करने और पराली प्रबंधन हेतु सरकार द्वारा सुपर सीडर उपलब्ध कराया जाना चाहिए।

 प्रदेश कार्यकारिणी सदस्य पवन सनोडिया ने कहा कि केंद्र सरकार सरकार ने कारपोरेट का 16 लाख करोड़ रुपए माफ करके यह साबित कर दिया है कि वह किसान हितैषी नहीं कारपोरेट की पक्षधर है। 

छिंदवाड़ा से प्रदेश सचिव विजय बिजौलिया ने कहा कि जो सरकार किसानों को फसल का उचित दाम, हर खेत को पानी और बिजली नही दे सकती उसे सत्ता में रहने का कोई अधिकार नही है। मुख्यमंत्री को इस्तीफा दे देना चाहिए।

  उन्होंने कहा कि किसान की आर्थिक स्थिति बहुत खराब है किसान की प्रतिदिन की आय 27 रूपये है जबकि अकुशल श्रमिक की दैनिक मजदूरी 393 रूपये है।

     रायसेन से प्रदेश सचिव श्रीराम सेन ने कहा कि करो या मरो की नीति पर संघर्ष करना होगा तब जाकर किसानों को  हक मिल सकता है।

    सागर से किसान नेता संदीप ठाकुर ने कहा कि पराली जलाने पर किसानों पर भारी जुर्माना लगाया जा रहा है। उन्होंने कहा कि सरकार पराली के निपटान की उचित व्यवस्था करें, क्यों पराली को जलाने के अलावा किसानों के पास दूसरा विकल्प नहीं है।

   ग्वालियर से प्रदेश कार्यकारिणी सदस्य शत्रुघन यादव ने कहा कि अति वृष्टि से ग्वालियर के आलू उत्पादक किसानों की फसल पूरी चौपट हो गई है लेकिन अभी तक सरकार की ओर से किसी भी प्रकार की मदद नही मिली है।

      विदिशा के जिला अध्यक्ष राजेश तामेश्वरी ने कहा  मुख्यमंत्री किसानों को बड़े बड़े ख्वाब दिखा रहे हैं। 50 क्विंटल प्रति बीघा उत्पादन वाले जिस गेंहू का जिक्र वे करते हैं उस गेहूं का बीज सभी किसानों को उपलब्ध कराया जाना चाहिए। 

    भिंड से अशोक सिंह बघेल ने कहा कि सरकार की किसान विरोधी नीतियों के चलते किसान आत्महत्या को मजबूर है। किसानी संकट के दौर से गुज़र रही है।

  मुलताई से भागवत परिहार ने कहा कि किसान संघर्ष समिति द्वारा धान, मक्का, सोयाबीन की एमएसपी पर खरीद कराने, पर्याप्त खाद और बिजली उपलब्ध कराने सहित 11 सुत्रीय मांगों को लेकर 4 नवंबर को मुख्यमंत्री के नाम एस डी एम को ज्ञापन सौंपा गया था लेकिन अभी तक किसी भी मांग पर सरकार ने ध्यान नहीं दिया है। इसलिए 11 नवंबर से 13 नवंबर तक तहसील मुख्यालय पर तीन दिवसीय चेतावनी धरना दिया जाएगा।

    बैठक को रीवा से प्रदेश सचिव संत कुमार पटेल, प्रदीप बंसल, सतना जिला अध्यक्ष नंदलाल सिंह, मऊ जिला उपाध्यक्ष अजय सिंह आदि ने भी संबोधित किया।

भागवत परिहार 

कार्यालय सचिव, किसंस, मुलतापी 

9752922320

Ramswaroop Mantri

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