रीवा । शहर के अंदर कई तरह का प्रदूषण का बोलबाला है जिसमें ध्वनि प्रदूषण बड़े पैमाने पर है । डीजे के साथ साथ हजारों गाड़ियों के कोलाहल का ध्वनि प्रदूषण भी कम नहीं है । हालत इतनी बदतर हो चुकी है कि जिला प्रशासन को इसके लिए बैठक लेते हुए आवश्यक निर्देश देने पड़ रहे हैं लेकिन वे भी पर्याप्त नहीं हैं ।
इस सवाल को उठाते हुए समाजवादी जन परिषद के नेता अजय खरे ने कहा है कि डीजे की ध्वनि तरंगे इतनी अधिक कानफोड़ू और जानलेवा हैं कि उस पर पूरी तरह प्रतिबंध लगाया जाना चाहिए । दिन में डीजे को अनुमति दिए जाने से सिर्फ यातायात प्रभावित नहीं होता बल्कि आसपास से गुजर रहे लोगों के स्वास्थ्य पर भी बुरा असर होता है । सामान्यत: डीजे जिस भी कार्यक्रम स्थल में चालू होगा , वहां निश्चित रूप से भारी ध्वनि प्रदूषण होगा । श्री खरे ने कहा कि आमतौर पर सरकारी कार्यालयों के आसपास किसी भी तरह का शोरगुल प्रतिबंधित है । इसके अलावा अधिकारियों के आवासीय स्थल सिविल लाइन शांति क्षेत्र घोषित है , जहां किसी तरह का हार्न बजाने की मनाही है । ऐसी स्थिति में जनता के बीच में डीजे जैसे भयंकर ध्वनि प्रदूषण वाले वाद्य यंत्रों को अनुमति देना सरासर नाइंसाफी है ।
समाजवादी जन परिषद के नेता श्री खरे ने कहा कि जिला प्रशासन रीवा द्वारा केवल रात 10:00 बजे के बाद डीजे का इस्तेमाल बंद कर देने से जनसाधारण को पर्याप्त राहत नहीं मिलने वाली है . रात के समय किसी खास कार्यक्रम स्थल पर डीजे बजता है , जिससे वहां उपस्थित लोग ही प्रभावित होते हैं लेकिन जब दिन में सड़कों पर डीजे का इस्तेमाल होता है तो पूरा यातायात ही प्रभावित नहीं होता बल्कि उसके शोरगुल से रास्ते पर चल रहे हजारों लोग परेशान होते हैं । डीजे की भारी ध्वनि तरंगों से अच्छे खासे आदमी के शरीर में कंपन होने लगता है । श्री खरे ने कहा कि हृदय रोगों और रक्तचाप के मरीजों के लिए डीजे की भारी ध्वनि तरंगे जानलेवा साबित हो सकती हैं । डीजे के शोरगुल से जहां आपस में बात कर रहे लोगों को एक दूसरे की आवाज सुनाई नहीं देती वहीं उसकी ध्वनि तरंगों से लोगों के दिलों की धड़कन बढ़ जाती हैं । ऐसे हानिकारक इलेक्ट्रानिक वाद्य यंत्र का इस्तेमाल को जनहित में पूरी तरह रोक दिया जाना चाहिए
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