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सर्वनाशी काल सर्वाइकल : हल्के में नहीं लें जान के जंजाल को

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डॉ. प्रिया (पुडुचेरी)

 _गर्दन में दर्द होना, गर्दन अकड़ जाना और हिलान-डुलाने में परेशानी होना कई बार लोगों को आम समस्या लगती है। कई लोग इस दर्द के साथ लंबे समय तक जीते रहते हैं और इसे नजर~अंदाज कर देते हैं, लेकिन यह दर्द खतरनाक साबित हो सकता है। गर्दन के ये दर्द सर्वाइकल पैन के लक्षण होते हैं। यह दर्द गर्दन की हड्डी से लेकर पीठ और कमर यानी सारी रीढ़ की हड्डी तक को अपनी गिरफ्त में ले लेता है। यह मौत का कारण भी बनता है।  "सर्वाइकल स्पाइन यानी गर्दन के हिस्से वाली रीढ़ की हड्डी"  के जोड़ों और डिस्क में समस्या होने से इस पैनिक अटैक की स्थिति बनती है।_

गर्दन की हड्डी शरीर की उन हड्डियों में शामिल है, जिनका सबसे ज्यादा इस्तेमाल होता है। यह पूरे सिर के वजन को संभालती है। यह भी याद रखना होगा कि गर्दन बाकी रीढ़ की हड्डी की तुलना में कमजोर होती है, इसलिए भी इसकी विशेष देखभाल जरूरी है।

सर्वाइकल पेन क्या है? सर्वाइकल पेन का घरेलू उपचार, कारण और लक्षण!

पैनिक सर्वाइकल के मामले बढ़ने के कारण :
समय रहते इलाज न कराया जाए, तो सर्वाइकल पैन केवल गर्दन तक ही नहीं रहता है, बल्कि शरीर के दूसरे हिस्सों में भी फैल जाता है : जननांग के बैक साइड यानी गुदा के पिछले हिस्से तक।
गर्दन में दर्द की शिकायत करने वालों की संख्या आजकल तेजी से बढ़ रही है जिसका कारण है वर्क कल्चर यानी कामकाज के आधुनिक तौर-तरीके।
आज लोग घंटों कम्प्यूटर के सामने बैठते हैं। मोबाइल को कान और कंधे के बीच फंसा कर बात करते हैं। डांस वैगेरह में होश खोते हैं। सेक्सुअल ऐक्टिविटी में सही तरीके की अवहेलना करते हैं। महिलाओं के संदर्भ में यौनिक असंतुष्टि या ठंडापन भी इसका एक बड़ा कारण है।

पहचानें लक्षण :
बेहतर यही होता है कि इसके लक्षणों को सही समय पर पहचान लिया जाए।
इसके लक्षणों में गर्दन में दर्द होना, गर्दन अकड़ जाना और हिलाने-डुलाने में परेशानी होना, पीठ-कमर में दर्द, हाथ-पैर और पंजों में झुनझुनी और जलन तथा सुन्न महसूस होना या उसमें कमजोरी लगना, जननेन्द्रिय में सेंसिटिविटी की कमी, सिर के पिछले भाग और कंधों में दर्द, शरीर में असंतुलन और चलने में दिक्कत, मांसपेशियों में ऐंठन शामिल हैं।
अगर सर्वाइल पैन आरंभिक, सामान्य और मामूली है तो इसे सही किया जा सकता है। ऑर्थोपेडिक सर्जन को दिखाएं। सीटी स्कैन, एक्स रे और एमआरआई से इसकी समस्या और गंभीरता का पता लगाया सकता है और उस हिसाब से इलाज की प्रक्रिया शुरू होती है।
समस्या के मूल का पता लगने के बाद इलाज की प्रक्रिया के तहत फिजियोथैरेपी भी विशेषज्ञ की देखरेख में की जाती है। इसे नियमित चिकित्सकीय सेवा से नियंत्रित रखा जा सकता है।
आधुनिक चिकित्सा पद्धति में इसका स्थायी औषधीय इलाज नहीं है। सर्जरी भी कई बार सफल नहीं होती। यानी अमूमन पूर्णतः ठीक नही होता यह रोग। मेडिटेटिवथेरेपी, प्राणिकहीलिंग, मसाजथेरेपी वैगेरह से कम्प्लीट समाधान मिलता है, लेकिन ये पद्धतियाँ प्रयोगकर्ता को कमर्शियली बेनिफिट नहीं देती, इसलिए इसके दक्ष चिकित्सक नहीं के बराबर हैं।
चेतना मिशन ये सेवाएँ निःशुल्क प्रोवाईड कराता है। व्हाट्सप्प 9997741245 पर संपर्क किया जा सकता है. न्यूनतम 15 दिन में इन सेवाओं के जरिये रोगमुक्त हुआ जा सकता है। ये सेवाएँ ध्यान- शिविर में दी जाती हैं या पुडुचेरी/हिमांचल/नासिक के किसी मेडिटेशन पॉइंट/हास्पिटल में। होम सर्विस भी प्रोवाईड कराई जाती है, लेकिन यह निःशुल्क नहीं है।

सर्वाइकल का एक रूप स्पाइनल टुबर्क्यलोसिस :
यह भी एक खतरनाक स्थिति है। हड्डियों में फ्रैक्चर होने के कारण रीढ़ की हड्डियों में इन्फेक्शन हो सकता है।
स्पाइनल टुबर्क्यलोसिस के कारण एक से ज्यादा हड्डियां क्षतिग्रस्त हो सकती हैं। इसके कारण स्पाइवल कैनल भी संकरी हो सकती है। इससे नर्वस सिस्टम से संबंधित परेशानियां हो जाती हैं।
समय रहते इलाज जरूरी है वरना स्पाइनल कॉर्ड में नसों के दबने से शरीर के निचले भाग को लकवा मार सकता है। डेथ भी संभव है।

सर्वाइकल की जद में न आने के लिए बरतें सावधानियां :
बहुत जरूरी है कि हमेशा ही गर्दन को स्वस्थ रखने के उपाय अपनाएं।
बैठने, उठने, चलने से लेकर कम्प्यूटर पर काम करने का पॉश्चर यानी बैठने का तरीका सही होना चाहिए।
मोबाइल फोन पर लंबे समय तक बात एक ही स्थिति में तिरछा न करें। देर तक फोन पर बात करनी भी पड़े तो इसे कान और कंधे के बीच में रखकर न करें।
सामने की तरफ भी गर्दन झुका कर मोबाइल स्क्रिन देखने की बजाए आंखों की ऊंचाई के बराबर रखकर देखें।
हड्डियों को स्वस्थ रखने के लिए कैल्शियम और विटामिन डी का सेवन करें।
सोने का तकिया या कुशन सही आकार का होना चाहिए।
नियमित रूप से एक्सरसाइज करने से इस स्थिति से बच सकते हैं।
(लेखिका चेतना विकास मिशन से संबद्ध चिकित्सिका हैं)

Ramswaroop Mantri

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