राकेश श्रीवास्तव
दीपावली हर्ष और उल्लास का पर्व है। प्रकृति भी इस समय परिवर्तन की सकारात्मक उर्जा का संदेश देती है। भारतवर्ष के अधिकांश क्षेत्रों मे मौसम खुशनुमा हो जाता है।जाती हुई गर्मी और आती हुई सर्दी के बीच की गुलाबी ठंड मन मष्तिक को प्रफुल्लित करती है।इसी फ़िज़ा मे दूर दूर से अपने प्रिय जनों का आने – जाने का सिलसिला परिवारों और दोस्तों को भरपूर मस्ती का अवसर देता हैं।
धनतेरस, नरकचौदस, दीपोत्सव, हनुमान जयंती, गोवर्धन पूजा, अन्नपूर्णा पूजा, भाईदूज, यमुना जी पूजन, कलम -दवात पूजन आदि अनेक अनुष्ठान इन पांच दिनों मे मनाये जाते हैं। दीपावली पर्व की विविधता के अनेक आयाम इसे विशिष्ट बनाते हैं। बच्चों के लिए मुख्यतः पटाखे और मिठाई आकर्षण का केंद्र होते हैं तो वहीं व्यवसायियों के लिए लक्ष्मीजी का पूजन। अधिकतर परिवार अपनी परंपराओं के पालन के लिए प्रयासरत रहते हैं।
उत्सवधर्मिता की भावना हमे उच्चतर जीवन के लिए उत्प्रेरित करती रहती है।यह एक ओर मनुष्य के सतत् आध्यात्मिक और भौतिक प्रगति का मार्ग प्रशस्त करती है तो वहीं हमारे कृषि और व्यवसाय को भी सशक्त करती है। बहुत सारे लोग छोटी-छोटी दुकानें लगाकर अगले कुछ महीनों के लिए अपनी आमदनी का बन्दोबस्त कर लेते हैं।
पर इन सबके बीच हमारे आस-पास कुछ ऐसे लोग भी होते हैं जिनके लिए यह सब परीकथा जैसा ही रहता है। हमारा उत्सव वास्तव मे तभी सही अर्थों मे उत्सव होता है जब हम अपने आस-पास किसी परिवार को त्यौहार मनाने मे सहयोग कर सकें,किसी की रसोई मे सुगंध बिखेर सकें,किसी पराये बच्चे के मुख पर मुस्कुराहट ला सकें, किसी की खुशियों का जरिया बन सकें, किसी की उम्मीदें जगा सकें,किसी के सपनों को पंख दे सकें।अपने से बड़ों को, रसूखदार को तो सभी भेंट-उपहार देते हैं, भले ही उनके लिए उसका कोई महत्व न हो। आप अपने से छोटों को, जिनको आपसे उम्मीद न हो उनको भेंट देकर देखिए। आपको वास्तव मे एक विशेष खुशी मिलेगी और उनके साथ ही साथ आपको भी अगणित आनंद की अनुभूति होगी।
आज सबसे अधिक आवश्यकता इस बात की है कि हम देखें कि हम सकारात्मक रूप से क्या कार्य कर सकते हैं।इसके लिए हमें अपने मन से समस्त आडंबर और आवरण को हटाकर शुद्ध चित्त से चिंतन करना होगा।यदि आडंबर रहा तो हम किसी कार्य में सफल नहीं होते हैं। यही सच्चा धर्म है, सुख है। यही कर्मयोग से राजयोग की यात्रा है। सभी के जीवन मे उजाला करने के लिए हमे दीप अपने घर परिवार के दायरे से बाहर निकल कर भी जलाने होंगे। यही दीपावली का संदेश है। आप सब को हार्दिक बधाई एवं शुभकामनाएँ।
आइये दीवाली पर तोहफ़े ठीक से छाँटे, इस बार मिठाई नहीं, भरपूर मिठास बाँटे।।
चलो मिलकर दीवाली ऐसे मनायें,इस बार दिल नहीं गैरों के घर दिये जलायें।।
चलो मिलकर रोशनी करने का ढंग बदलें, दिया जलाकर नहीं, दिया बनकर जलें ।।
नये दिये जलाने से पहले ,जो दिये बुझ रहे हैं, उन्हे बचायें।।





