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 दिल्ली में ड्रग के बढ़ते मामले…दम तोड़ती जिंदगियां! दुनिया में 30 लाख करोड़ का है नशे का कारोबार

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 नशा जब सिर चढ़कर बोलता है तो नशेड़ी को कुछ दिखाई नहीं देता है। वो अपनों की जान लेने से भी नहीं चूकता है। नाबालिग भी इसकी चपेट में हैं। हत्या और रेप से लेकर स्ट्रीट क्राइम तक नशे के लिए अंजाम दिए जा रहे हैं। नशे के कारोबार और उससे पैदा हो रही सामाजिक बुराइयों के बारे में शंकर सिंह की रिपोर्ट।

नारकोटिक्स सेल के सूत्र बताते हैं कि नारकोटिक्स ड्रग्स एंड साइकोट्रॉपिक सब्सटेंस (NDPS) एक्ट 1985 के कड़े प्रावधान होने से नशे के ड्रग माफिया पैडलिंग के लिए नाबालिगों का इस्तेमाल करते हैं। इनसे होम डिलिवरी तक करवाई जाती है। उन्हें रोज के 500 से 700 रुपये देते हैं। कानूनी पचड़ों से बचाने का भरोसा देते हैं। मधु विहार के आईपी एक्सटेंशन स्थित जोशी कॉलोनी में 13 जनवरी 2022 को एक 17 साल के लड़के का मर्डर हुआ था। खुलासा हुआ कि इलाके में ड्रग्स सप्लाई के धंधे से जुड़े नाबालिगों ने इसे अंजाम दिया। मृतक का मां का दावा था कि उनका बेटा भी इसी सिंडिकेट का हिस्सा था, लेकिन उसने काम छोड़ा तो हत्या करवा दी गई।

सीसीटीवी से पुलिस पर रखते नजर

पुलिस अफसर बताते हैं कि ड्रग माफिया महिलाओं और बच्चों की आड़ में धंधा कर रहे हैं। भारी मुनाफा देखते हुए अवैध शराब के धंधे में भी कूद गए हैं। आरोपी की तलाशी लेने और गिरफ्तार करने के नियम काफी कड़े हैं, जिनका ड्रग्स माफिया फायदा उठाते हैं। नशे के लिए दिल्ली के हॉट-स्पॉट एरिया में सुबह से लेकर शाम तक लाइन लगी रहती है। माफियाओं ने घर से लेकर गलियों तक में सीसीटीवी कैमरे लगा रखे हैं, जिससे वो पुलिस की रेड पर नजर रखे रहते हैं। नशा बेचने का काम घर को बंद कर छोटी-छोटी खिड़कियों से होता है। इसलिए पुलिस के पहुंचने से पहले ही ये माफिया माल को ठिकाने लगा देते हैं।

दिल्ली में नशे का कारोबार
नशे में डूबे नाबालिग करते जुर्म

नैशनल क्राइम रिकॉर्ड ब्यूरो (NCRB) के आंकड़े बताते हैं कि दिल्ली में अपराध में शामिल होने वाले नाबालिगों और युवाओं की तादाद में बढ़ोतरी हो रही है। इसके मुताबिक, दिल्ली पुलिस ने 2020 में 2455 नाबालिगों को पकड़ा था, जबकि इनकी संख्या 2021 में 2643 तक पहुंच गई। ये कच्ची उम्र के लड़के हत्या जैसे संगीन अपराध से लेकर लूट, झपटमारी, रेप और चोरी तक में शामिल पाए गए। पहली बार पुलिस के हत्थे चढ़े नाबालिगों और युवाओं के बारे में तफ्तीश की गई तो खुलासा हुआ कि अधिकतर नशे के आदी होने से पढ़ाई छोड़ चुके थे। नशे की लत और अन्य जरूरतों के लिए अपराध की दुनिया में कूद गए।

खतरनाक कारोबार!

गांजा सस्ता तो कोकीन सबसे महंगी

कोकीन, हेरोइन (स्मैक), अफीम, गांजा और एमबीएम टैबलेट की काफी डिमांड है। हाई-प्रोफाइल रेव पार्टियों से लेकर झुग्गी झोपड़ी बस्तियों तक इनकी खपत होती है। कोकीन काफी महंगी होती है। गांजा सबसे सस्ता नशा है। कुछ नशेड़ी बीमारियों में काम आने वाली दवाइयां धड़ल्ले से लेते हैं।

हेरोइन या स्मैक: मणिपुर, राजस्थान, मध्य प्रदेश, यूपी और झारखंड से आती है। विदेश से पाकिस्तान और अफगानिस्तान और म्यांमार से तस्करी होती है। यूपी के बरेली या बदायूं और पंजाब के जरिए इसे देश भर में सप्लाई किया जाता है।

उड़ती दिल्ली

गांजा: ये सबसे सस्ता नशा है, जिसका इस्तेमाल भी ज्यादा होता है। आंध्र प्रदेश, ओडिशा और पश्चिम बंगाल के माफिया इसके सबसे बड़े सप्लायर हैं। ये ट्रकों के जरिए दिल्ली भेजी जाती है।

कोकीन: पश्चिमी अफ्रीका और साउथ अमेरिका से इसे बनाने का सामान आता है। इससे कोकीन बना कर देश भर में तस्करी की जाती है।

नारकोटिक्स सेल एक्टिव

चरस-अफीम: हिमाचल, ईस्टर्न यूपी, राजस्थान, मध्य प्रदेश, बिहार और झारखंड से इसकी सप्लाई होती है। इसके बाद दिल्ली-एनसीआर के इलाकों में इसे बेचा जाता है।

पार्टी ड्रग्स: तेज दर्द होने या नींद नहीं आने पर इस्तेमाल होने वाली जैसी दवाइयों में अफीम की मिलावट की जाती है। टैबलेट के तौर पर इनका इस्तेमाल हाई-प्रोफाइल या रेव पार्टियों में किया जाता है।

दिल्ली के कुख्यात हॉट-स्पॉट

यमुनापार: सीलमपुर, वेलकम, शास्त्री पार्क, न्यू उस्मानपुर, जाफराबाद, खजूरी खास, नंद नगरी, सीमापुरी, गाजीपुर, कल्याणपुरी, लक्ष्मी नगर, आनंद विहार बस और रेलवे स्टेशन के करीब

साउथ दिल्लीः ओखला, महरौली, मालवीय नगर, हौज खास, छतरपुर, नेब सराय, ओखला, गोविंदपुरी, जैतपुर, खानपुर गांव, सरिता विहार, निजामुद्दीन
वेस्ट दिल्ली: पालम गांव, सागरपुर, जाफरपुरकलां, उत्तम नगर, जनकपुरी, द्वारका, इंद्रपुरी, कीर्ति नगर, मायापुरी, मंगोलपुरी, सुल्तानपुरी, अमन विहार, नांगलोई

दिल्ली पुलिस लगातार यह सुनिश्चित करने की दिशा में काम कर रही है कि शहर में नशीले पदार्थों का कारोबार जड़ नहीं जमा पाए। यह हमारी सर्वोच्च प्राथमिकता है, इसलिए ड्रग्स के कारोबार में शामिल लोगों को बुक करने के लिए हर संभव कोशिश की जा रही है। दिल्ली पुलिस नशा मुक्त भारत के संकल्प के साथ खड़ी है।

डीसीपी सुमन नलवा, दिल्ली पुलिस प्रवक्ता
सेंट्रल दिल्ली: पहाड़गंज और नई दिल्ली रेलवे स्टेशन के आसपास, शकूर बस्ती, कमला मार्केट, चांदनी महल, डीबीजी रोड, करोल बाग, सराय रोहिल्ला, सदर बाजार, कश्मीरी गेट बस अड्डे के करीब,

नॉर्थ दिल्लीः आजादपुर सब्जी मंडी, बुराड़ी, तिमारपुर, मजनूं का टीला, जहांगीरपुरी, भलस्वा डेरी, स्वरूप नगर, समयपुर बादली, अलीपुर

नशे में शव के टुकड़े

श्रद्धा मर्डर केस : पुलिस जांच में सामने आया की 18 मई 2022 को श्रद्धा का मर्डर कर उसके शव को 35 टुकड़ों में तब्दील करना वाला आरोपी आफताब गांजा पीने का आदी है, जो मारपीट भी करता था।

पांडव नगर मर्डर: अंजन दास नशे का आदी था। कई महिलाओं से रिश्ते थे, जिसे 30 मई 2022 को पत्नी और बेटे ने मारा। पिता के शव के 12 टुकड़े करने से पहले सौतेले बेटे ने खूब नशा किया। फिर पार्क में रोज फेंकने लगा।

दिल्ली में ड्रग की जब्ती

नार्को टेरर पर कसा शिकंजा

दिल्ली पुलिस की स्पेशल सेल ने केंद्र सरकार के निर्देश पर पिछले साल नार्को टेरर को लेकर गैरकानूनी गतिविधियां (रोकथाम) कानून (UAPA) का मुकदमा दर्ज किया। विदेश से भारत में ड्रग्स की तस्करी करने और उसका इस्तेमाल आतंकी गतिविधियों में करने की बात सामने आई। स्पेशल सेल ने 3 सितंबर 2022 को दिल्ली से छह से साल भारत में रिफ्यूजी के तौर पर रह रहे अफगानी नागरिक मुस्तफा और रहीमुल्लाह को गिरफ्तार किया। इनकी निशानदेही पर दिल्ली और लखनऊ से 1200 करोड़ की ड्रग्स रिकवर की। रिमांड पर पूछताछ के बाद दोनों ने मुंबई बंदरगाह से 1725 करोड़ की 20 टन हेरोइन एक कंटेनर से बरामद की गई। नशे के ये खेप अफगानिस्तान से पाकिस्तान और फिर ईरान पहुंचती थी, जिसे पानी के जहाज के जरिए भारत पहुंचा जाता था। पैसे की आवाजाही हवाला के जरिए से की जीती है।

दुनिया में 30 लाख करोड़ का है नशे का कारोबार, देश की 20 प्रतिशत आबादी गिरफ्त में

बॉलीवुड में उधड़ी नशे की परतों ने देश में एक नई बहस छेड़ दी है। कई नामी गिरामी हस्तियों के नाम सामने आने के बाद नारकोटिक्स कंट्रोल ब्यूरो (एनसीबी) ने समन जारी कर इनसे पूछताछ शुरू कर दी है।

इस पूछताछ में लगातार नए-नए खुलासे हो रहे हैं। द्वारा की जा रही इस पूछताछ में आगे और भी खुलासे होने की संभावना है। हालांकि बॉलीवुड से नशे का यह कनेक्शन नया नहीं है। इंडस्ट्री के शुरुआती दिनों से ही बड़े अभिनेता और अभिनेत्रियों के नशे के किस्से चर्चित रहे हैं, लेकिन इस चर्चा ने एक बार फिर समाज में गहरे तक फैल चुकी नशे की जड़ोें को खंगालने का अवसर दे दिया है।

ड्रग वार डिस्टॉर्सन और वर्डोमीटर की रिपोर्ट के अनुसार पूरी दुनिया में मादक पदार्थों का अवैध व्यापार सालाना लगभग 30 लाख करोड़ रुपए का है। वहीं नेशनल ड्रग डिपेंडेंट ट्रीटमेंट (एनडीडीटी), एम्स की वर्ष 2019 की रिपोर्ट बताती है कि अकेले भारत में ही लगभग 16 करोड़ लोग शराब का नशा करते हैं। इसमें बड़ी संख्या महिलाओं की भी है।

रिपोर्ट के अनुसार लगभग 1.5 करोड़ महिलाएं देश में शराब,अफीम और कैनबिस का सेवन करती हैं। रिपोर्ट के आंकड़े बताते हैं कि देश की लगभग 20 प्रतिशत आबादी (10-75 वर्ष के बीच की) विभिन्न प्रकार के नशे की चपेट में है। कुछ रिपोर्ट्स बच्चों के भी बड़ी संख्या में नशे की चपेट में आने की जानकारी देती हैं।

‘ग्लोबल बर्डन ऑफ डिजीज स्टडी 2017’ के आंकड़ों के अनुसार दुनिया भर में लगभग 7.5 लाख लोगों की मौत अवैध ड्रग्स की वजह से हुई। इनमें से लगभग 22000 मौतें भारत में हुईं। गंभीर बात यह है कि देश में पारंपरिक नशे जैसे कि तम्बाकू, शराब, अफीम के अलावा सिंथेटिक ड्रग्स स्मैक, हिरोइन, आइस, कोकीन, मारिजुआना आदि का उपयोग तेजी से बढ़ा है। आइये इस रिपोर्ट में जानते हैं देश और दुनिया में नशे के उपयोग और उसके गंभीर परिणामों के बारे में।

6 बिंदुओं के आधार पर समझिए नशे के कारोबार और दुष्परिणामों को

1. भारत में नशे का कितना बड़ा बाजार है?

यूएन ऑफिस ऑफ ड्रग एंड कंट्रोल की रिपोर्ट के अनुसार वर्ष 2016 में पूरी दुनिया भर में सप्लाई होने वाले कुल गांजा का 6 प्रतिशत यानी लगभग 300 टन गांजा अकेले भारत में जब्त किया गया था। यही नहीं 2017 में यह मात्रा बढ़कर 353 टन हो गई। वहीं चरस की यदि बात की जाए तो 2017 में 3.2 टन चरस सीज की गई। नशे के कारोबार का सटीक आंकड़ा तो उपलब्ध नहीं है, लेकिन विभिन्न एजेंसियों से जुड़े अधिकारियों का अनुमान है कि भारत में इसका सालाना अवैध कारोबार लगभग 10 लाख करोड़ रुपए का है।

2. गैर-कानूनी ड्रग्स के मामले में भारत की स्थिति क्या है?

भारत में ओपिओड का नशे के रूप में इस्तेमाल ग्लोबल और एशियाई औसत से भी काफी ज्यादा है। हालांकि कैनबिस, एटीएस और कोकीन जैसे नशे के उपयोग का चलन यहां कम है।

3. देश में इसे रोकने के लिए क्या कानून हैं?

देश में मुख्यत: एनडीपीसी एक्ट 1985 की विभिन्न धाराओं के तहत कार्रवाई की जाती है। इसमें नशीले पदार्थ का सेवन करना, रखना, बेचना या उसका आयात निर्यात करना या फिर इस कारोबार में किसी की सहायता करना, सभी में गंभीर सजाओं के प्रावधान हैं। जुर्म के हिसाब से इसमें सजाएं तय है। इस कानून के अंतर्गत सरकार विशेष न्यायालयों की स्थापना त्वरित मुकदमा चलाने के लिए कर सकती है और जितने विशेष न्यायालयों की व्यवस्था की जरूरत हो स्थापना कर सकती है। ऐसे अपराध जिनमें तीन वर्ष से अधिक का कारावास होता है, इनका ट्रायल विशेष न्यायालयों में होता है। इस प्रकार के अपराध के आरोपियों को मजिस्ट्रेट के समक्ष पेश किया जाता है।

4. देश मे कितनी आबादी नशे के जाल में फंसी है?

5. एनसीबी क्या है, यह कैसे काम करती है?

नारकोटिक्स कंट्रोल ब्यूरो (एनसीबी) गृह मंत्रालय के अधीन काम करने वाली एक एजेंसी है जो ड्रग्स से जुड़े मामलों की जांच करती है। इसका मुख्य उद्देश्य राष्ट्रीय स्तर पर मादक पदार्थों की तस्करी को रोकना है। यह एजेंसी सीमा शुल्क और केंद्रीय उत्पाद शुल्क/जीएसटी, राज्य पुलिस विभाग, केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई), केंद्रीय आर्थिक खुफिया ब्यूरो (सीईआईबी) और अन्य राष्ट्रीय एवं राज्य स्तर की खुफिया एजेंसियों के साथ मिलकर काम करती है। वर्तमान में इस एजेंसी में लगभग 1000 कर्मचारी हैं। इसका काम सीमा शुल्क समन्वय परिषद, इन्टरपोल, यूएनडीसीपी, आईएनसीबी, आरआईएलओ जैसी अंतरराष्ट्रीय एजेंसियों से सम्पर्क बनाना भी है।

6. 14 साल में पांच गुना बढ़ा अफीम का उपयोग

फरवरी 2019 में आई नेशनल ड्रग डिपेंडेंस ट्रीटमेंट (एनडीडीटी) एम्स की एक रिपोर्ट के अनुसार 2004 से 2018 के बीच देश में अफीम का उपयोग पांच गुना बढ़ चुका है। वहीं रिपोर्ट यह भी बताती है कि देश में 90 लाख महिलाएं शराब, 40 लाख महिलाएं कैनबिस और 20 लाख महिलाएं अफीम का सेवन करती हैं। हर 16 में से एक महिला को शराब की इतनी लत लग चुकी है कि वो शराब के बिना रह नहीं सकती है। वहीं, पुरुषों में ये आंकड़ा 5 में से 1 है।

दुनिया भर में नशे के कुछ भयावह आंकड़े

  • 27.5 करोड़ लोग दुनिया भर में गैर कानूनी रूप से नशे का उपयोग करते हैं।
  • 19.2 करोड़ लोग इसमें से गांजा को नशे के रूप में दुनिया भर में उपयोग करते हैं।
  • 33 लाख लोगों की मौत हर साल अकेले नुकसानदायक एल्कोहल से हो जाती है।
  • 1.1 करोड़ लोग इंजेक्शन से नशा करते हैं, जिसमें से 13 लाख को एचआईवी है। 55 लाख को हेपेटाइटिस सी की बीमारी है। और लगभग 10 लाख लोग ऐसे हैं जिन्हें एचआईवी और हेपेटाइटिस सी दोनो है।

Ramswaroop Mantri

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