इन्दौर । जहां दवा काम नहीं आती है वहां दुआ काम आती है, क्यों न पहले से ही दुआ ले लें जिससे दवा की आवश्यकता ही न पडे़। एक सच्ची खटना है आचार्य श्री महावीरकीर्तिजी मुनिमहाराज के समक्ष की। संभवतः घटना केशरियाजी के आसपास की है। आचार्य श्री महावीरकीर्तिजी के कानों में आवाज पड़ती है- ‘‘राम नाम सत्य है’, वे पूछते हैं यह कैसी आवाज आ रही है? उन्हें बताया जाता है- एक 22-23 वर्ष के नौजवान का देहान्त हो गया है, उसका दाह संस्कार करने श्मसान घाट ले जा रहे हैं, आचार्य महाराज ने कहा वह नौजवान अभी मरा नहीं है, उसे यहां ले आयें। उसे लाते हैं, उसके पिता के हाथों उसका कफन हटवाया जाता है। आचार्य श्री महावीरकीर्तिजी अपने कमण्डलु से चुल्लू में जल लेकर उसके ऊपर छिड़कते हैं और पिच्छी उठाकर उसे आश्ीर्वाद देते हैं, वह नौजवान मृत्युशैय्या से उठकर खड़ा हो जाता है, चारों ओर जयकारे के नारे गूंज उठते हैं। जब किसी का रोग असाध्य हो जाता है, डाॅक्टर भी कह देता है मेरे पास अब इसका इलाज नहीं बचा है आप भगवान से दुआ कीजिये, और वाकई कभी कभी यह दुआ, सन्तो का आशीर्वाद काम कर जाता है। ऐसीं अनेकों घटनायें हुईं हैं जब जब अस्पतालों से किसी मरीज को जबाब दे दिया गया हो और सन्तों के शरण में उसका रोग चमत्कृत रूप से ठीक हो गया, आगे वह व्यक्ति वर्षों तक जीवित रहा। ये विचार दिनां क 27 फरवरी को खातीवाला टैंक इन्दौर में श्रमणाचार्य श्री विमदसागर जी मुनिमहाराज ने। स्थानीय समाज के अध्यक्ष ने बताया कि पुलक जन चेतनामंच, श्री दिगम्बर जैन ट्रस्ट खतीवाला टैंक, समस्त गिम्बर जैन समाज, श्री नाभिनंदन महिला मण्डल इन्दौर, जैन जाग्रति महिला मंच इन्दौर आदि संस्थाओं ने मिलकर आज आचार्यश्री का भव्य नगर प्रवेश करवाय। भंवरकुआ से खातरवाला टैंक जैन मंदिर तक विशाल शोभायात्रा के साथ आचार्य संघ पधारा। यहां पहुंचकर यह शोभायात्रा धर्मसभा में परिवर्तित हो गई। जिसमें आचर्यश्री ने प्रवचन दिये। स्थानीय समाज के श्री अनिल जी, प्रवीन जैन, कैलाश जी, विद्वत् परिषद् के महामंत्री डाॅ. महेन्द्रकुमार जैन ‘मनुज’, जैन विभव पत्रिका के संपादक अनुभव जैन, पं सुरेश मारौरा, डी डी.के जैन, समाजनों के अतिरिक्त रतलाम के पंकज आदि बाहर से पधारे महानुभावों ने आचार्य श्री को श्रीफल भेंटकर आशीर्वाद प्राप्त किया।
डाॅ. महेन्द्रकुमार जैन ‘मनुज’,
जहां दवा काम नहीं आती है वहां दुआ काम आती है : आचार्य विमदसागर





