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मानपुर में पीतमपुर के केमिकल डम्पिंग करने से प्रदूषण का खतरा नर्मदा तक पहुंचा

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संभागायुक्त के आदेशों का भी नहीं हो रहा है पालन ,डंप किया गया केमिकल अभी तक नहीं हटा, नदी का पानी जल्द ही नर्मदा में मिलेगा जिससे पूरी नर्मदा प्रदूषित हो जाएगी

रामस्वरूप मंत्री

इंदौर। इंदौर जिले के मानपुर में पीथमपुर और अन्य उद्योगों का केमिकल डंप किए जाने से खेती, पानी और नदी तथा पेयजल स्रोत दूषित हो गए हैं  । अभी तक खतरा मानपुर और आसपास के 40- 50 गांव तक ही था  लेकिन अब  नदी का पानी बहकर  नर्मदा के किनारे के गांवों तक पहुंच गया है  और वह एक-दो दिन में ही नर्मदा में मिल जाएगा जिससे नर्मदा नदी  निमाड़ में तो प्रदूषित होगी ही, साथ ही वह कर सरदार सरोवर तक  यह प्रदूषण पहुंचेगा जिससे  नदी में रहने वाले मछलियां और अन्य जंतु के मरने का खतरा है साथ ही मछुआरों की आजीविका की खत्म होने वाली है ।
संभागायुक्त ने 24 जून को मेधा पाटकर के नेतृत्व में मिले प्रतिनिधिमंडल को आश्वस्त किया था की प्रदूषण फैलाने वालों और केमिकल डंब करने वालों के खिलाफ सख्त कार्यवाही होगी । साथ ही डंप किए गए केमिकल को वहां से हटाया जाएगा और प्रदूषण निववारण मंडल दूषित जल को ठीक करने के प्रयास करेगा लेकिन संभागायुक्त के यह वादे और अधिकारियों को दिए गए निर्देश हवा हवा ही निकले हैं।केमिकल डंप किया जाना तो बंद हुआ है लेकिन ना तो मुख्य आरोपी की गिरफ्तारी हुई है और ना ही गांव में शुद्ध पेयजल की आपूर्ति शुरू हुई है।  साथ ही प्रदूषण निवारण मंडल का कोई दल ही मानपुर और आसपास के गांव में  पहुंचा है। ग्रामीण परेशान हैं पूर्व सरपंच गोवर्धन भाई कहते हैं कि कमिश्नर ने भले ही आदेश दिया हो लेकिन अपराधियों का रसूख इतना बड़ा है कि उसके आगे सारा प्रशासनिक अमला नतमस्तक है ।
 नदियों और जलाशयों का पानी बिल्कुल काला हो गया है खेती दूषित हो गई है और यह पानी बहकर नर्मदा के तट तक पहुंच गया है । अभी भी प्रशासन नहीं चेत रहा है जिससे लाखों जल जीव और आम इंसान प्रदूषण खतरे में पड़ गया है । गौरतलब है कि  इस समस्या को लेकर  नर्मदा बचाओ आंदोलन की नेता मेधा पाटकर के नेतृत्व में एक प्रतिनिधि मंडल 24 जून को संभागायुक्त पवन कुमार शर्मा से मिला था तथा 1 घंटे की चर्चा में उन्हें पूरी स्थिति से अवगत कराया ।
 गौरतलब है कि इसी समस्या को लेकर जून के पहले पखवाड़े में भी  इंदौर कलेक्टर को भी गांव के लोगों ने ज्ञापन देकर लोगों के जन जीवन से खिलवाड़ करने और नदी और पेयजल स्रोतों को दूषित करने वाले आरोपियों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की थी तथा कृषि भूमि को दूषित करने वालों तथा वहां केमिकल की डंपिंग भी बंद करने की मांग की थी, लेकिन अभी तक कोई कार्यवाही नहीं होने से ग्रामीणों ने आज संभाग आयुक्त से मुलाकात की।
मेधा पाटकर के नेतृत्व में मिले प्रतिनिधिमंडल में रामस्वरूप मंत्री, डॉक्टर हीरोले,  उपसरपंच गोवर्धन, ओंकार  कटारा, सालम ढाबर,  रंजीत मकवाना, सोनू शर्मा, राजेश बैरागी सहित बड़ी संख्या में ग्रामीण और जन संगठनों के कार्यकर्ता शरीक थे। कमिश्नर को प्रतिनिधिमंडल ने खेतों में खराब हुई फसल के बैंगन और बिल्कुल काला हो चुका नदी और पेयजल स्रोतों के पानी की भरी बाटले भी बताई मेधा पाटकर ने कहा कि यह अति गंभीर मुद्दा है और पहाड़ी आदिवासियों पर अत्याचार ही है । महू तहसील के काली कराए और ढाल, धार जिले की पंचायतों के करीबन 40 गांव के आदिवासी को पीने का पानी भी नहीं मिल पा रहा है । नदी प्रदूषित होने के कारण सभी निवासी और मवेशी को पीने लायक पानी भी नहीं मिल रहा है । इस प्रदूषण जिससे पानी लाल काला हो चुका है वह मवेशियों की मृत्यु का कारण बन रहा है ।  कचनार नदी आगे जाकर नर्मदा में मिलती है और नर्मदा के जल प्रदूषित होने का खतरा बढ़ गया है  ।
 पीतमपुर की कारखानों से निकलने वाले प्रदूषित केमिकल को डंप करने से खेती भी खराब हो गई है । अजनार नदी और पेयजल  जहरीला बन चुका है । यह  कचनार नदी में पहुंचकर अब नर्मदा की ओर जा रहा है जो कि मृत्यु की घंटी बजा रहा है । अगर इसे रोका नहीं गया तो इंदौर और खरगोन जिले के सैकड़ों गांव हजारों हजार परिवारों के लिए जानलेवा साबित होगा । केमिकल की डंपिंग करने के जिम्मेदार प्रकाश राठौड़ और उन पर अभी तक भी कोई कार्यवाही नहीं होना आश्चर्य में डालता है।
  प्रतिनिधि मंडल को संभागायुक्त ने आश्वस्त किया था कि किसी भी आरोपी को बख्शा नहीं जाएगा तथा डंपिंग पर भी रोक लगेगी  । उन्होंने तत्काल अधीनस्थ अधिकारियों को निर्देशित किया कि वे कल से ही इस डंपिंग को रोकने, आरोपियों को गिरफ्तार करने और डंपिंग वाले स्थान की सफाई की व्यवस्था करें तथा पेयजल स्त्रोतों की भी जांच करें तथा उन्हें किस तरह से उपयोगी बनाया जा सकता है इसकी व्यवस्था करें  ।साथ ही जब तक यह व्यवस्था नहीं होती है तब तक प्रभावित सभी गांव को पेयजल की आपूर्ति टैंकरों के जरिए कराई जाए  । लेकिन यह सभी आश्वासन भी हवा हवाई साबित हुए हैं ।
 कमिश्नर के आदेश के अनुसार मुख्य आरोपी की तत्काल गिरफ्तारी होना थी, लेकिन वह आज भी आजाद घूम रहा है दूसरी ओर पीतमपुर से केमिकल आना तो बंद हो गया है ,लेकिन जिन खेतों को खोद करके केमीकल डंप किया गया था , उसे अभी तक नहीं हटाया गया है ।नदी का प्रदूषित पानी लगातार आगे बढ़ रहा है और वह नर्मदा के किनारे के गांवों तक पहुंच गया है ,जो जल्द ही नर्मदा में मिल जाएगा । यदि नर्मदा में पानी मिल गया तो जो संकट मध्य प्रदेश की जनता को और गुजरात की जनता को भुगतना पड़ेगा उसका शायद प्रशासनिक अफसरों को अंदाजा भी नहीं है ।
नर्मदा बचाओ आंदोलन की नेता मेधा पाटकर से आज हुई चर्चा के अनुसार यह प्रदूषित पानी बिल्कुल नर्मदा के किनारे पर पहुंच गया है और एक दो दिन में ही नर्मदा में मिल जाएगा । जिससे नर्मदा का पानी भी काला हो जाएगा और यह गुजरात के सरदार सरोवर तक पहुंचने में भी ज्यादा वक्त नहीं लेगा  ।यदि ऐसा हुआ तो फिर नर्मदा किनारे के हजारों मछुआरों का जीवन और व्यवसाय संकट में पड़ जाएगा । साथ ही नर्मदा में पलने वाली हजारों किस्म की मछलियां और जीव-जंतुओं के जीवन पर भी संकट आ जाएगा । साथ ही जो नर्मदा का पानी पीते हैं उनका जीवन भी खतरे में पड़ जाएगा । मेधा पाटकर ने इंदौर के संभाग आयुक्त सहित सभी अधिकारियों से आग्रह किया है कि वे राजनीति और अन्य तरह के दबाव से मुक्त होकर लोगों के  जीवन को बचाने का प्रयास करें ।

Ramswaroop Mantri

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