इंदौर
इंदौर पुलिस का एक शर्मनाक चेहरा सामने आया है। वाकया गुरुवार रात का है। खरगोन से आई कालीबाई तीन इमली ब्रिज के पास बेटे को बचाने में ट्रक का शिकार हो गई। मौके पर ही महिला की मौत हो गई। देर तक 16 साल का बेटा अमित मां के शव के पास एक घंटे तक बैठा बिलखता रहा। कोई मदद को आगे नहीं आया। इसी बीच बेटे ने इंदौर में रहने वाले चाचा जगदीश को खबर की, वह पहुंच गए, लेकिन एम्बुलेंस और डायल 100 नहीं आई। हारकर जगदीश लोडिंग में भाभी का शव लेकर जिला अस्पताल पहुंच गए। यहां से रिपोर्ट लिखवाने का कहा तो शव वहीं छोड़कर जगदीश भंवरकुआं थाने पहुंचा।
यहां रिपोर्ट तो लिख दी गई, लेकिन एफआईआर की कॉपी देने से मना कर दिया। ड्यूटी पर तैनात एसआई ने कहा, कागज नहीं है। बाहर से कागज लाओ तो ही कॉपी मिल पाएगी। तब तक 9 बज चुके थे, आसपास की सारी दुकानें बंद हो गई थीं। जगदीश कागज के लिए देर तक भटकता रहा। डेढ़ किमी दूर टॉवर चौराहे के आगे 25 रुपए में कुछ कागज खरीद कर लाया तब कहीं जाकर एफआईआर की कॉपी मिल सकी।

जिला अस्पताल में भी जगदीश सुबह से दोपहर तक पुलिस का इंतजार करता रहा। डायरी 1 बजे आई।
हालांकि मुश्किल यहीं खत्म नहीं हुई। अगली सुबह पोस्टमार्टम के लिए भी उसे घंटों इंतजार करना पड़ा। थाने से डायरी 1 बजे पहुंची। तब कहीं जाकर पोस्टमार्टम हो पाया। जगदीश ने भास्कर से कहा- भाभी की दुर्घटना के बाद पुलिस का जो रूप देखने को मिला है, वह बहुत अमानवीय है। रात को थाने में एफआईआर और सुबह जिला अस्पताल में पुलिस डायरी के लिए घंटों इंतजार करना पड़ा। मैंने एसआई से कहा भी कि इतने बड़े थाने में क्या कागज ही नहीं हैं।
गुरुवार शाम 6 बजे तीन इमली पर हुई दुर्घटना
- 01 घंटे तक बेटा मां के शव के पास बैठा बिलखता रहा। कोई मदद को नहीं आया।
- 100 डायल और एम्बुलेंस फोन करने के बाद भी नहीं पहुंची।
- 02 घंटे बाद खुद ही लोडिंग में शव जिला अस्पताल लाना पड़ा।
दोषी एसआई को लाइन भेजेंगे
^मृतक के परिवार को कागज के लिए भटकाना शर्मनाक बात है। मैं थाने में पता करवा रहा हूं कि वह कौन सा सब इंस्पेक्टर है, जिसने ऐसी हरकत की है। उसे लाइन भिजवाऊंगा।
– संतोष दूधी, टीआई, भंवरकुआं
थानों पर स्टेशनरी की किल्लत नहीं
^पुलिस को शासन से काफी स्टेशनरी मिलती है। हादसों के मामलों में मृतक के परिजन को कोई परेशानी ना हो, उसका ध्यान रखा जाता है। मामले की जांच करवाएंगे।
दिशेष अग्रवाल, सीएसपी जूनी इंदौर





