भोपाल। ज्योतिरादित्य सिंधिया व उनके समर्थकों से उधार के सिंदूर से सुहागन बन चौथी बार सत्ता पर काबिज हुए मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान की कार्यशैली में तो वही सबकुछ है जिसका खुलासा २००७ में तत्कालीन भारतीय जनशक्ति के राष्ट्रीय महामंत्री प्रहलाद पटेल ने किया था और उसके बाद जो पत्र उन्होंने शिवराज सिंह पर आरोप लगाते हुए लिखे थे उन पत्रों में जो आरोप उन्होंने शिवराज सिंह चौहान पर लगाये थे वह आज लगभग १४ वर्षों बाद भी प्रहलाद पटेल के वह आरोप अक्षरश: साबित होते नजर आ रहे हैं?
आज जब ज्योतिरादित्य सिंधिया के समर्थक ऊर्जा मंत्री प्रद्मुन सिंह तोमर शिवराज सरकार के १५ वर्षों में हुए ऊर्जा विकास के नाम पर बही भ्रष्टाचार की गंगोत्री के चलते जिस प्रकार से विद्युतीकरण का काम हुआ यही नहीं शिवराज के कार्यकाल में दीपावली, गर्मी और बरसात के पहले होने विद्युत लाइन की मरम्मत के नाम पर होने वाले करोड़ों रुपये का जो खेल हुआ उस सबकी पोल शिवराज मंत्रीमंडल के सदस्य प्रद्मुन सिंह तोमर खोलने में लगे हुए हैं, हालांकि वह जो कुछ कर रहे हैं वह लाइनमैन बनकर झाडिय़ां व घोंसले साफ करने का काम कर रहे हैं उससे तो यही साबित होता है कि शिवराज सरकार में बिजली मेंटनेंस के नाम पर जो करोड़ों रुपये कागजों में खर्च कर अधिकारी अपनी तिजोरियां भरने में लगे हुए हैं उसकी पोल खोलते नजर आ रहे हैं ऊर्जा विभाग के नियमों के अनुसार कायदे से ऊर्जा मंत्री जो कर रहे हैं वह नियम विरुद्ध है लेकिन वह अपने ही विभाग की और शिवराज सिंह चौहान के १५ सालों में ऊर्जा के नाम पर जिस तरह से घोटाले हुए और उन घोटालों के होने के बाद भी ऊर्जा विभाग हमेशा अपने को घाटे में बताकर विद्युत उपभोक्ताओं की जेब पर महंगी बिजली का करंट लगाने में लगा रहता है हालांकि इस तरह के शिवराज के राज की विकास की पोल प्रदेश के कद्दावर बुंदेलखण्ड के नेता गोपाल भार्गव ने भी उस समय गुणवत्ताविहीन निर्माण की पोल खोलकर रख दी थी जब उन्होंने सागर जिले के एक भवन का लोकार्पण किया था उस समय उन्होंने यह पाया था कि उस भवन की छत पर चलने से उसमें कंपन उत्पन्न होती थी इसके साथ ही वह भवन पूरी तरह से गुणवत्ताविहीन होने की बात सामने आई थी हालांकि उस भवन का निर्माण भोपाल विकास प्राधिकरण के द्वारा कराया गया था, शिवराज सिंह के कार्यकाल में विकास के नाम पर ऐसे कई भैरू बाबा खड़े हुए हैं जिन्हें देखकर यह कतई नहीं लगता कि यह दो-चार या पांच साल पूर्व के बने हुए हैं जबकि इसी प्रदेश में अंग्रेजों के जमाने के कई पुल, पुलिया व भवन ही नहीं बल्कि बांध भी मौजूद हैं जो १८०० और उसके आसपास के बने हुए आज भी मजबूती से खड़े हुए हैं और उनमें जरा भी दरारें नजर नहीं आतीं? लेकिन विकास के नाम पर शिवराज के द्वारा खड़ किये गये भैरूबाबाओं की यह स्थिति है तो यदि उनमें लात मारी जाये तो वह धराशायी हो जाते हैं इसका खुलासा प्रद्मुन सिंह तोमर ने अपने ग्वालियर में एक अमृत धारा योजना के अंतर्गत बनने वाले टैंक के निर्माण पर लात मारकर खुलासा किया था। प्रद्मुन सिंह तोमर के द्वारा किये जा रहे इस तरह के खुलासे से यह बात साफ हो जाती है कि भले ही शिवराज सिंह चौहान सबका साथ, सबका विकास, स्वर्णिम मध्यप्रदेश और अब आत्मनिर्भर मध्यप्रदेश का ढिंढोरा पीटकर जनता को गुमराह कर शासन के खजाने को खाली कर उस पर बोझ बढ़ाने में लगे हुए हैं लेकिन उन निर्माण कार्यों में गुणवत्ता नाम का इतना अभाव है कि वह एक लात मारने में भी धराशायी हो सकते हैं और इस सबके बावजूद अब देखना यह है कि शिवराज सिंह के आत्मनिर्भर मध्यप्रदेश में क्या ऐसे ही निर्माण किये जायेंगे जिनमें भ्रष्टाचार की गंगोत्री के चलते गुणवत्ता का तो ख्याल ही नहीं रखा जा रहा है, हालांकि ऊर्जा मंत्री प्रद्मुन सिंह तोमर जो कुछ कर रहे हैं तो कुछ भाजपाई उनकी आलोचना भी कर रहे हैं तो कुछ लोग शिवराज सरकार के विकास की पोल खोलने को लेकर विपक्षी दल के नेता ही नहीं बल्कि भाजपा के कुछ नेता काफी प्रफुल्लित नजर आ रहे हैं, अब देखना यह है कि शिवराज सरकार के मंत्रियों और भाजपा में और कितने नेता प्रद्मुन सिंह तोमर के पदचिन्हों पर शिवराज सरकार के विकास की पोल खोलने की हिम्मत जुटा पाएंगे





