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आखिरकार चपरासी के बेटे ने सिंहासन बदल दिया

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जेपी सेनानी अख्तर हुसैन की श्रद्धांजलि सभा संपन्न

रीवा । लोकनायक जयप्रकाश नारायण के नेतृत्व में चलाए गए संपूर्ण क्रांति आंदोलन के क्रांतिकारी साथी जेपी सेनानी दिवंगत अख्तर हुसैन की यादगार में स्थानीय विवेकानंद पार्क में रविवार दोपहर 12:30 बजे नारी चेतना मंच , विंध्यांचल जन आंदोलन एवं समाजवादी कार्यकर्ता समूह के संयुक्त तत्वावधान में एक श्रद्धांजलि सभा संपन्न हुई। सभा की अध्यक्षता लोकसभा के पूर्व सांसद बुद्धसेन पटेल ने की। विदित है कि बिहार आंदोलन के प्रखर नेता जेपी सेनानी श्री अख्तर हुसैन का गत 11 जनवरी की शाम 7:28 बजे रांची के एक निजी अस्पताल में इलाज के दौरान दुखद निधन हो गया था। संपन्न कार्यक्रम में क्रांतिकारी साथी अख्तर हुसैन के निधन पर गहरा दुख व्यक्त करते हुए उन्हें विनम्र श्रद्धांजलि अर्पित की गई एवं उनके परिवार में उनकी पत्नी एवं दो बेटियों को इस अपार दुख को सहने की क्षमता मिले ऐसी प्रार्थना की है। अख्तर हुसैन का प्रारंभिक राजनीतिक जीवन समाजवादी युवजन सभा एवं लोहिया विचार मंच के जरिए शुरू हुआ। पिता अब्दुल हाफ़िज़ सरकारी कर्मचारी के रूप में भृत्य पद पर कार्य करते थे। माता का नाम अजीज़न ख़ातून था ‌। अख्तर हुसैन की पत्नि – सबीहा नाज़ और दो बेटियां – तोहफ़ा रबाब और अनिक़ा हबाब उनकी स्मृति के रूप में मौजूद हैं। डॉ राम मनोहर लोहिया की विचारधारा से जुड़े अख्तर हुसैन ने समाजवादी चिंतक किशन पटनायक के मार्गदर्शन में लंबे समय तक कार्य किया। सन 1992 में बिहार के लालू मंत्रिमंडल के दौरान वह 15 सूत्री अल्पसंख्यक कमेटी के उपाध्यक्ष बने जिसमें उन्हें राज्यमंत्री का दर्जा प्राप्त था। दबाव में रहकर काम करना उनके स्वभाव में नहीं था जिसके चलते वह अधिक समय तक उस पद पर भी नहीं रहे। बिहार आंदोलन के सूत्रधारों में अख्तर हुसैन का नाम इतिहास में दर्ज है। बिहार आंदोलन को आगे ले जाने में रघुपति , शिवानंद तिवारी , लालू प्रसाद यादव , रघुनाथ गुप्ता, विजय कृष्ण, बजरंग सिंह , नीतीश कुमार के साथ अख्तर हुसैन अग्रणी रहे हैं। 27 मार्च 1974 को गांधी मैदान के चारों तरफ पुलिस का सख्त पहरा होने के बावजूद चकमा देते हुए अख्तर हुसैन और रघुपति ने वहां पहुंचकर 144 धारा तोड़ते हुए सभा की थी जिसके चलते उन्हे गिरफ्तार किया गया और तब कलेक्टर ने झल्लाते हुए अख्तर हुसैन से कहा था कि चपरासी का बेटा होकर तू राजनीति करेगा। पुलिस के द्वारा अख्तर हुसैन और रघुपति के साथ काफी मारपीट करने के बाद जेल भेजने की कार्यवाही की गई। बिहार आंदोलन के समय अख्तर हुसैन जब पटना के जेल में बंद थे तो नागार्जुन ने उन पर यह कविता लिखी थी कि अख्तर हुसैन बंद हैं पटना के जेल में , अब्दुल गफूर चूर है ,सत्ता के खेल में ।

श्रद्धांजलि सभा में विंध्यांचल जन आंदोलन के नेता अजय खरे ने साथी अख्तर हुसैन को संपूर्ण क्रांति आंदोलन का प्रखर नेता बताया । उन्होंने बताया कि आपातकाल में रीवा मध्य प्रदेश के केंद्रीय कारागार में मीसा के अंतर्गत 18 माह से अधिक समय तक मैं भी निरुद्ध था । 29 जनवरी 1977 को बिना शर्त जेल से रिहा होने के बाद फरवरी में बिहार के वैशाली जिला के दुल्लहपुर में लोहिया विचार मंच की विशेष बैठक में शामिल होने मैं वहां पहुंचा था जिसमें किशन पटनायक , रघुपति, अख्तर हुसैन आदि से मेरी मुलाकात हुई । वहां से लौटते समय मैं अख्तर हुसैन के साथ पटना आया था जहां लोकनायक जयप्रकाश जी से मिलकर उन्हें रीवा संसदीय चुनाव के लिए आमंत्रित करना था। पता चला कि जयप्रकाश जी कदम कुआं स्थित अपने निवास पर अस्वस्थ हैं और उन्हें इलाज के लिए दूसरे दिन जसलोक अस्पताल मुंबई ले जाना है। ऐसी स्थिति में जयप्रकाश जी से मिलना काफी कठिन था लेकिन अख्तर हुसैन के प्रयास से मेरी उनसे मुलाकात संभव हो सकी। मुलाकात के दौरान शिवानंद तिवारी भी आ गए उन्होंने भी जयप्रकाश जी से मेरे बारे में बताया। जयप्रकाश जी के गंभीर बीमार होने के कारण उन्हें रीवा आने का आमंत्रण नहीं दे सका लेकिन उनसे अनुरोध किया कि वह रीवा के लिए अपना संदेश दें जिस पर उन्होंने कहा कि मेरा संदेश छपा हुआ है जिसे ले जाएं लेकिन मैंने उनसे कहा कि रीवा में महाराजा स्वतंत्र उम्मीदवार के रूप में चुनावी मैदान में है जिसे कांग्रेस का समर्थन मिला हुआ है। आपका  यह संदेश वहां काम नहीं करेगा तब जयप्रकाश जी ने कुमार प्रशांत से कहकर अपना अलग संदेश लिखवाया । जिसमें तानाशाही और राजाशाही को एक दूसरे का पूरक बताते हुए उसे परास्त करने की अपील की गई। जयप्रकाश जी की इस अपील का असर हुआ। रीवा में 1971 के चुनाव में रिकॉर्ड बहुमत से चुनाव जीतने वाले महाराजा को 1977 के लोकसभा चुनाव में आखिरकार शिकस्त मिली। 

श्री खरे ने बताया कि अख्तर हुसैन ने उस दौरान बिहार के चुनाव में अपनी व्यस्तता के बावजूद रीवा लोकसभा इस ऐतिहासिक चुनाव के लिए कई दिनों का समय दिया था। उस समय अख्तर हुसैन ने कहा था कि बिहार से लेकर दिल्ली तक कांग्रेस का सफाया होने जा रहा है। तब उनकी यह भविष्यवाणी अक्षरशः सही साबित हुई। 

कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुए पूर्व सांसद बुद्धसेन पटेल ने कहा कि अख्तर हुसैन चपरासी के बेटे थे लेकिन उनकी क्रांतिकारिता से सिंहासन हिला ही नहीं बदल गया। लोकनायक जयप्रकाश के नेतृत्व में चले संपूर्ण क्रांति आंदोलन को पूरे देश में गतिशील बनाने में अख्तर हुसैन जैसे नौजवान नींव का पत्थर बने। अख्तर हुसैन जी ने अपना पूरा जीवन देश और समाज सेवा के लिए समर्पित कर दिया । अख्तर जी के प्रयास से अजय खरे की लोकनायक जयप्रकाश जी से मुलाकात संभव हो पाई थी जिस वजह से उस समय रीवा की जनता के लिए लोकनायक का संदेश प्राप्त हुआ । उस समय रीवा के महाराजा को परास्त करना काफी मुश्किल काम था। राजाशाही तानाशाही एक सिक्के के दो पहलू के लोकनायक के संदेश ने आखिरकार चुनाव परिणाम बदल डाला। सन 1977 में जनता पार्टी के प्रत्याशी जहां अन्य स्थानों में लाखों मतों से जीत रहे थे वहां रीवा का लोकसभा चुनाव कुछ हजार मतों से ही जीता जा सका।

श्रद्धांजलि सभा में नारी चेतना मंच की पूर्व अध्यक्ष मीरा पटेल, संगीता चतुर्वेदी , नजमुन्निसा , माया सोनी , डॉ श्रद्धा सिंह, श्वेता पाण्डेय , समाजसेवी अशोक सिंह, श्रवण प्रसाद नामदेव , रामकृष्ण पटेल, शेषमणि शुक्ला, दीपक गुप्ता एडवोकेट, रशीद खान ,जब्बार भाई, विक्रम सिंह, पद्मनाथ पटेल, के पी पटेल, अयान मंसूरी आदि की सक्रिय भागीदारी रही। सभा के अंत में 2 मिनट का मौन रखकर दिवंगत अख्तर हुसैन की आत्मा की शांति की प्रार्थना की गई । कार्यक्रम संचालन डॉ श्रद्धा सिंह ने किया।

Ramswaroop Mantri

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