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नशे का गढ़ बनते इंदौर को बचाने सबको आगे आना होगा

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 अंकुर जायसवाल

बेशर्मी, शर्मनाक, धिक्कार, बिगड़ैल, नशेड़ी, मनमाने, घिनौने, कलंकित, निकृष्ट। इन शब्दों के सैकड़ों, हजारों समानार्थी शब्द भी कम पड़ जाएंगे। या कहिये शब्दकोश खुद डूब मरने को आतुर दिखेगा। शब्द गढ़े जाते हैं, अपराधी को उसकी गलतियों पर सीख देने को। समाज को सही गलत का भेद बताने को। पर अफसोस नशे में डूबते मदहोश इंदौर में युवा ऐसे शब्दों को तमगे की तरह गले में लटकाकर सरेआम सड़कों पर घूम रहे हैं। यकीनन ये इंदौरी तो नहीं हो सकते। नशे का गढ़ बनते इस शहर को बचाने हम सबको आगे आना होगा। ऐसे अपराधियों को सजा दिलवाना अब समाज की जिम्मेदारी है।

कार में लड़की को अंदर खींचने और उसके बचाओ-बचाओ की चीखों वाला इंदौर का एक वीडियो वायरल हो रहा है। कुछ शालीन शहरी लड़की के प्रति हमदर्दी रखते हुए, एक वीडियो बनाकर पुलिस को भेजते हैं, ताकि अपराधी को सजा मिल सके… पर हमेशा की तरह इस बार भी कोई कार्रवाई होती नहीं दिख रही। यदि पुलिस सबूतों से बंधी है, तो क्या हम सब इंदौरी अपनी कोई भूमिका नहीं निभाएंगे? हमारी चुप्पी इन मदहोशों के हौसलें ऐसे बढ़ा देगी कि एक दिन ये हमारी देहरी तक आ जाएंगे। चुप्पी तोड़िये, ये आपका अपना इंदौर है।

धन के दम पर सड़कों पर नशे में महंगी गाड़ियों को दौड़ना। अर्धनग्न लड़कियों को कभी अपनी कार के भीतर खींचना, कभी लड़कियों का सड़क पर लोट लगाना… फिर वीडियो वायरल होने पर थाने में जाकर सब सेट हो जाना। क्या इस तरह के गंभीर मामलों पर हम ऐसे ही हाथ पर हाथ धरे बैठे रहेंगे। ताजा वीडियो तो रिश्तों की नई परिभाषा गढ़ रहा है। लड़की का कहना है, जो लड़का उसे गाड़ी के भीतर खींच रहा है, वो उसका भाई है, वह उससे नाराज होकर चीख रही है। यदि भाई है तब तो ये मामला और संगीन और शर्मसार करने वाला है। क्या भाई-बहन इस तरह से नशे में धुत होकर खींचतान करते हैं? एक बार वीडियो में जो चीखें हैं, उनको दिल से सुनकर, समझिये आप उन चीखों में छिपे शब्द पढ़ लेंगे। यदि वो लड़का भाई नहीं है तब तो अपराध और बड़ा हो जाएगा। क्या हम अपनी नंगाई छिपाने को पवित्र रिश्ते की गरिमा को तार-तार कर देंगे?  

लड़की का दूसरा दावा है कि वीडियो एक साल पुराना है। इस तकनीकी युग में पुलिस का साइबर विंग आसानी से पता कर सकता है, वीडियो कब बना। इंतजार किसका? एक साल पुराना होने से भी अपराध धुल नहीं जाते।

इस मामले में लड़की की मदद को आए मीडियाकर्मी पर भी वो थाने में ही हमला कर देती हैं। पुलिसवालों के सामने मीडिया को तमाचा मार वो निकल जाती है। क्या पुलिस इतनी लाचार है? क्या इस मामले में लड़की पर अपराध दर्ज नहीं होना चाहिए? आपके थाने में हुए घटनाक्रम में कौन से सबूत की दरकार है?

Ramswaroop Mantri

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