मुनेश त्यागी
आजकल आदिपुरुष फिल्म बहुत जोर शोर से चर्चा में है। इसकी पटकथा को लेकर, इसके डायलॉग को लेकर, इसकी कहानी को लेकर, देश में शोर मचा हुआ है। बहुत सारे लोगों में व्याकुलता व्याप्त है। रामानंद सागर के बेटे ने इस फिल्म की विषय वस्तु और डायलॉग्स को लेकर अप्रसन्नता जाहिर की है और इस फिल्म का विरोध किया है।
हमने बहुत पहले देखा था कि राम सबके प्यारे और सम्माननीय थे। पहले जब रामलीला होती थी तो उसमें जय सियाराम के नारे लगते थे। उसको सभी धर्म और जाति के लोग देखते थे, उनसे शिक्षा ग्रहण करते थे और मर्यादा पुरुषोत्तम राम की छवि को बहुत सारे लोग अपने जीवन में उतारने की कोशिश करते थे।
मगर उसके बाद राम के नाम पर राजनीति शुरू कर दी गई। उसको सियाराम से अलग कर दिया गया और उसके बाद जय श्रीराम का गला फाड नारा दिया जाता है जिसने मर्यादा पुरुषोत्तम राम की छबि को भी बदल दिया और आज पुनः सिनेमा के माध्यम से मर्यादा पुरुषोत्तम राम की छवि बिगाड़ी जा रही है। “जय श्री राम” के आक्रामक और भड़काऊ नारे लगाए जा रहे हैं जिससे कहानी, कथ्य भाषा और डायलॉग्स की असलियत को लेकर, कई तरह के विवाद खड़े हो गए हैं और इसे लेकर लोगों में काफी नाराजगी व्याप्त हो गई है।
सियाराम से श्रीराम करने के विषय को लेकर, कुछ दिन पहले एक कविता लिखी थी जो आज भी शत-प्रतिशत प्रसांगिक बनी हुई है। उस कविता को पुनः आपकी पेशे नजर कर रहे हैं,,,,,
पहले मैं देखा करता था एक जोडी,
सबके प्यारे सियाराम की जोडी,
जिसकी सौम्यता, सुंदरता और निश्छलता
से हो जाया करता था नतमस्तक।
अनायास ही आ जाता था
आस्था और श्रध्दा का भाव
उनके प्रति।
धीरे धीरे कुछ बदलता गया।
आजकल मैं देखता हूँ —-
एक “श्रीराम”
जो अलग कर दिया गया है सिया से
जो बना दिया गया है हथियारबंद,
जो दिखता है हिंसक, क्रुध्द और बेसब्र।
यह आक्रामक राम अलग है
सियाराम वाले सौम्य राम से।
पहले रामलीलाओं में जय बुलती थी,,,
“जय सियाराम ।”
आजकल एक कान फोडू नारा
लगाया लगाया जाता है,,,,
“जय श्री राम। “
पहले सब का सा लगता था राम।
आजकल हथिया लिया है,
अपहरण कर लिया है,
कुछ लोगों ने राम का।
आज का राम दिखता है अलग
दशरथ के राम से,
यह नहीं मिलता जुलता है,
तुलसी के राम से।
आजकल झुंड के झुंड
“जय श्रीराम” का नारा लगाकर
फूंकते हैं घर बार,
उजाडते हैं दुकानें,
ढा देते हैं घर और झोपड़ियां
बिसमार कर देते हैं इबादतगाह।
पुराना राम, राम नहीं रहा अब
वह बन गया है “श्रीराम”
जिसके नारे लगा कर
किए जाते हैं दंगे
मार दिए जाते हैं बेगुनाह।
आजकल “श्रीराम” के नाम पर
लोग बन बैठे हैं सांसद, विधायक, मंत्री।
अब “श्रीराम” के नाम पर
हासिल की जाती है सत्ता और सरकार
जो बन बैठी है जनविरोधी,
रामायण विरोधी और राम विरोधी।
आज का “श्रीराम”
बना दिया गया है आक्रामक
जैसे वह चाकर बन गया हो
लुटेरों, दंगाइयों, हत्यारों और
मुनाफाखोर धन्ना सेठों का।
सबके राम को
बना दिया गया है
कुछ लोगों का “श्रीराम”।
मैं चाहता हूं फिर से लौट आए
वही पुराना सियाराम।
मैं सच सच कहता हूं
मुझे डर लगता है-
इस “श्रीराम” से
यानि कुछ लोगों के “श्रीराम” से।





