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*फसल बीमा के नाम पर भी किसानों के साथ हुई ठगी,2 साल बाद भी जिले के आधे से ज्यादा किसानों को नहीं मिला फ़सल बीमा*

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*बीमा कंपनी ने प्रीमियम तो ले लिया लेकिन क्लेम के नाम पर किसानों को बनाया बेवकूफ*

 *इंदौर जिले में आधी से ज्यादा पंचायतों के किसानों को नहीं मिली क्लेम की राशि, ठगाये किसान आक्रोश में*

इंदौर । फसल बीमा करते वक्त किसानों को सब्जबाग दिखाए गए थे कि जब भी उनकी फसल अतिवृष्टि या पाला पड़ने या अन्य किसी प्राकृतिक प्रकोप से खराब होगी तो उन्हें क्लेम की राशि मिलेगी । जिससे वह अपने नुकसान की भरपाई कर पाएंगे । लेकिन फसल बीमा के नाम पर किसानों को मुआवजे के नाम पर ₹1 भी नहीं मिला है। इंदौर जिले में आधी से ज्यादा पंचायतों में किसानों की गेहूं और सोयाबीन की पूरी फसल बर्बाद होने के बावजूद सरकारी गलत नीति और बीमा कंपनियों की मनमानी के चलते किसानों को मुआवजा राशि नहीं मिली है । संयुक्त किसान मोर्चा के रामस्वरूप मंत्री और बबलू जाधव ने बताया कि पिछले 2 साल से किसानों की फसल लगातार बर्बाद हो रही है । कभी ओलावृष्टि से तो कभी बेमौसम बारिश से । 

2 साल पूर्व भी गेहूं और सोयाबीन की फसल बर्बाद हुई थी। किसानों को उम्मीद थी कि सरकार ने हम से फसल के बीमा के लिए मोटी बीमा राशि ली है, तो अब बीमा कंपनी हमें फसल नुकसानी का मुआवजा देगी । लेकिन किसानों की उम्मीद पर सरकार की गलत नीतियों और बीमा कंपनी की मनमानी के कारण पूरी तरह पानी फिर गया है ।

संयुक्त किसान मोर्चा लगातार मांग कर रहा है कि फसल नुकसानी के सर्वे के लिए किसान के खेत को ही अनावरी माना जाना चाहिए ,लेकिन सरकार ने नीति बनाई है की पटवारी हल्के को अनावरी मानकर नुकसानी का सर्वे किया जाए। इसके चलते किसानों के नुकसान का सही आंकलन नहीं हो पाता है और उन्हें मुआवजा नहीं मिलता है। इसी के साथ पिछले 3 साल की फसल उत्पादन का औसत निकाल कर नुकसानी तय करने से भी नुकसान का सही आकलन नहीं हो पाता है और बीमा कंपनी क्लेम देने से इंकार कर देती है ।

इंदौर जिले में साढेतीन सौ से ज्यादा पंचायतें हैं। जिनमें करीब 185 पंचायतों में किसानों को बीमा राशि नहीं मिली है। जबकि कुल भूमि के हिसाब से बीमा कंपनी ने प्रीमियम लिया था। ठगाए किसान सरकार और बीमा कंपनी को कोस रहे हैं ।हालांकि इस वर्ष से सरकार ने अनावरी की सीमा किसान का खेत कर दी है । लेकिन पिछले 2 सालों का मुआवजा पूर्व के नियम से ही तय किया जा रहा है। इसके चलते जिन किसानों की पूरी फसल भी बर्बाद हो गई है। उन्हें भी मुआवजा नहीं मिला है।

 रामस्वरूप मंत्री , बबलू जाधव, शैलेन्द्र पटेल, लाखनसिंह डाबी ने बताया कि इंदौर जिले के करीब 135 ग्राम पंचायत के किसानों को खरीफ सोयाबीन 2021 का फसल बीमा नहीं मिला । वही गेहूं रबी 2021-22 का50 गांव के किसानों को नहीं मिला  बीमा कंपनी ने यह कहकर पल्ला झाड़ा की औसत उत्पादन में कोई कमी नहीं आई है। गांव में किसानों से करोड़ों रुपए प्रीमियम के लिए और बीमा के नाम पर किसानों को ठग लिया। 

अपने आपको किसान हितेषी सरकार बताने वाले मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान के कामकाज पर किसानों के साथ की गई इस ठगी से सवालिया निशान लग गया है। आपने बताया कि सांवेर के गांव पालिया हैदर, अलवासा बांसाद्रा, जमबुडी सरवर, अजनोद, जिदाखेडा, काकरिया  बोर्डया, पालकाकरिया, बदरखा, बालरिया, कछालिया, टाकून, पोटलोद, धनखेडी, रिगनोदिया, हतुनिया, डकाचया, मकोडिया,, सावेर, कासबा, बड़ोदिया खान, कुड़ाना ,नागपुर, पचोला,आदि ।

देपालपुर के बनियाखेडी ,देवराखेडी, भिडोता, अतयाना ,छडोदा, बछोडा, इलारिया, बडी कलमेर ,राजपुरा, ललेडी पुरा, काली बिल्लौद, मेढवाडा ऐसे दर्जनों गांव है जहां किसानों को बीमा नहीं मिला है ।

संयुक्त किसान मोर्चा ने इस संबंध में मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान को पत्र लिखकर मांग की है कि किसानों को फसल बीमा योजना के तहत फसल नुकसानी का तत्काल मुआवजे का भुगतान कराया जाए साथ ही सर्वे को पटवारी हल्के के बजाय

 खेत को अनावरी मानकर किया जाए ।अन्यथा संयुक्त किसान मोर्चा अन्य किसान संगठनों के साथ एकजुट होकर आंदोलन को बाध्य होगा ।

Ramswaroop Mantri

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