सुसंस्कृति परिहार
आज 26मई है एक महत्वपूर्ण दिन जब भारत के प्रधानमंत्री बतौर नरेन्द्र मोदी ने शपथ ली थी ।ये सातवां साल है और देश का क्या हाल है सबके सामने है। देश में तमाम रंगीन नज़ारे हैं । तिरंगे पर भगवा हावी होने की फिराक में है ।2024 की तैयारी जारी है। रंगबिरंगा देश और उसके अन्य रंग उन्हें पसंद नहीं ।आज ही चन्द्र ग्रहण हो रहा है बताते हैं चन्द्रमा इस दौरान ख़ूनी रंग में दिखेगा। यह करिश्मा प्रकृति में होता रहता है।अब तो कोरोना के साथ उपजी फंगस बीमारी भी कई रंगों में सामने आ रही है इन सब पर इन सात सालाना रंगों का भरपूर असर नज़र आ रहा है।रंग बदलते गिरगिट की तरह इंसान भी रंग बदलने में माहिर हो गया है। बहरहाल, हम जिस रंग की यहां बात कहने जा रहे हैं वह है काला रंग ।जो विरोध का प्रतीक है।आज ही किसानों ने ब्लेक डे मनाने का फैसला किया है क्योंकि उन्हें आंदोलन करते 26मई को पूरे छै माह हो रहे हैं।किसान 26 मई को देशभर में अपने-अपने घरों, वाहनों पर काले झंडे लगाएंगे। वहीं, कुछ दिन पहले आंदोलन का नेतृत्व कर रहे संयुक्त किसान मोर्चा ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को पत्र लिखकर एक बार फिर बातचीत शुरू करने की अपील की थी। अब तक उन्हें कुछ भी हासिल नहीं हुआ है। देश की 12 प्रमुख विपक्षी पार्टियों ने किसानों के आंदोलन के 6 महीने पूरे होने के मौके पर 26 मई को संयुक्त किसान मोर्चा द्वारा देशव्यापी प्रदर्शन को अपना समर्थन देने की घोषणा की है। ये जानकारी एक साझा बयान में दिया गया है।बयान पर कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी, पूर्व पीएम एच डी देवेगौड़ा (JDS), फारूक अब्दुल्ला (जेकेपीए), अखिलेश यादव (SP), शरद पवार (NCP), ममता बनर्जी (TMC), उद्धव ठाकरे (शिवसेना), एम के स्टालिन (DMK), हेमंत सोरेन (JMM), तेजस्वी यादव (RJD), डी राजा (भाकपा) और सीताराम येचुरी (लेफ्ट) ने हस्ताक्षर किए हैं।
बयान के मुताबिक ‘हमने 12 मई को संयुक्त रूप से PM को पत्र लिखकर कहा था: ‘कोरोना महामारी का शिकार बन रहे हमारे लाखों किसानों को बचाने के लिए कृषि कानून रद्द किए जाएं ताकि वो अपनी फसलें उगाकर भारतीय जनता का पेट भर सकें।’ बयान में आगे कहा गया है कि, ‘हम कृषि कानूनों को तत्काल रद्द करने और स्वामीनाथन आयोग की सिफारिश के अनुसार सी2+ 50 प्रतिशत न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) को कानूनी अमलीजामा पहनाने की मांग करते हैं।’
केंद्र की भाजपा सरकार कॉर्पोरेट कंपनियों को किसानों और मजदूरों की जिंदगी की कीमत पर देश की संपत्ति और संसाधनों को लूटने की खुली छूट दे रही है। देशभर के किसान पिछले 6 महीनों से अपनी दो मुख्य मांगो को लेकर आंदोलन कर रहे हैं – विवादास्पद कृषि कानूनों को रद्द करो और न्यूनतम समर्थन मूल्य का कानूनी अधिकार सुनिश्चित करो। किसान आंदोलन के दौरान मौसम की विषमता के चलते 500 के लगभग किसानों की मृत्यु हो गई लेकिन इस निष्ठुर भाजपा सरकार ने किसानों की जायज मांगों को सुनने और समझने की जहमत तक नहीं उठाई। किसानों के प्रति भाजपा सरकार की बेरुखी, किसान नेताओं के साथ बातचीत के हथकंडे अपनाना और किसानों के वाजिब मुद्दों और नीतियों पर हीला हवाली कर हठधर्मिता दिखाना भारतीय राजनीति और प्रशासनिक व्यवस्था पर कलंक है ।यह बात सोशल डेमोक्रेटिक पार्टी ऑफ इंडिया राष्ट्रीय अध्यक्ष एम के फैज़ी ने कही है 26मई को पार्टी कार्यकर्ता अपने घरों और मोहल्लों में तख्तियां और पोस्टर के साथ काले झंडे लगाकर प्रदर्शन करेंगे और किसान आंदोलन के समर्थन में सोशल मीडिया में अभियान चलाएंगे।
किसानों का जमावड़ा दिल्ली बार्डर पर जम रहा है इसको लेकर सरकार ने कोरोना नियमों का हवाला देकर ऐसे संकेत दिए हैं कि शायद इसमें ज़ोर ज़बरदस्ती हो सकती है।जबकि भारतीय किसान यूनियन के प्रवक्ता और नेता राकेश टिकैत ने कहा कि इस काला दिवस के दौरान ज्यादा भीड़ इकट्ठा नहीं की जाएगी. उन्होंने कहा कि ज्यादा लोग नहीं आएंगे. कई लोगों के बॉर्डर के पास घर हैं, वो वहां आएंगे । टिकैत ने कहा है कि कल भारत सरकार का पुतला जलाया जाएगा। इसके अलावा ट्रैक्टर व घरों पर काला झंडा लगाया जाएगा। ये सुबह 9-10 बजे से शुरू होगा। किसान कानूनों के खिलाफ चल रहे आंदोलन को दोबारा तेज करने के लिए किसानों में नया जोश भर गया है। कृषि कानूनों के खिलाफ दिल्ली की सीमाओं पर किसानों का धरना प्रदर्शन जारी है।





