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संयुक्त किसान मोर्चा की 4 दिसंबर की बैठक में किसान आगे की कार्रवाई पर फैसला लेंगे

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 एसकेएम द्वारा भेजे गए पत्र पर मोदी सरकार को औपचारिक रूप से जवाब देने का समय दिया जा रहा है — केंद्रीय मंत्री श्री नरेंद्र सिंह तोमर का कहना गलत है कि पीएम द्वारा घोषित समिति के गठन के साथ, “किसानों की एमएसपी पर मांग पूरी हुई”: एसकेएम*
*2020 में पारित दो नए कृषि कानूनों को निरस्त करने और आवश्यक वस्तु अधिनियम 1955 में किए गए संशोधनों को वापस लेने के लिए कृषि कानून निरसन विधेयक 2021 कल संसद में कार्य के लिए सूचीबद्ध है, पेश किया जाना और विचार करना और पारित किया जाना है — विधेयक का उद्देश्य और कारण खंड कानून और निरसन के कारणों की पूरी तरह से गलत तस्वीर को दर्शाता है*
*मुंबई के आजाद मैदान में ऐतिहासिक शेतकारी कामगार महापंचायत में हजारों किसानों की भागीदारी
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Kisan Mahapanchayat In Mumbai 100 Different Organizations Joined


जैसा कि कल बैठक के बाद घोषणा किया गया था, संयुक्त किसान मोर्चा ने भारत के प्रधानमंत्री को 21 नवंबर, 2021 को अपने पत्र में उठाए गए सभी मांगों पर भारत सरकार के औपचारिक और पूरे जवाब की प्रतीक्षा करने का फैसला किया है। एसकेएम ने 29 नवंबर से संसद तक प्रस्तावित ट्रैक्टर मार्च को स्थगित कर मोदी सरकार को और समय देने का फैसला किया है। संयुक्त किसान मोर्चा की चार दिसंबर को होने वाली अगली बैठक में प्रदर्शनकारी किसान आगे की कार्रवाई पर निर्णय लेंगे।
मुंबई के आजाद मैदान में आज एक विशाल शेतकारी कामगार महापंचायत हुई, जिसमें कम से कम 100 संगठन एक साथ आए। इस महापंचायत में पूरे महाराष्ट्र के सभी जाति और धर्म के किसान, मजदूर, खेतिहर मजदूर, महिलाएं, युवा और छात्र शामिल हुए। कई एसकेएम नेताओं ने आज इस कार्यक्रम में भाग लिया। महापंचायत ने कृषि कानूनों को निरस्त करने में भाजपा-आरएसएस सरकार पर किसानों के साल भर के संघर्ष की ऐतिहासिक जीत का जश्न मनाया, और शेष मांगों के लिए लड़ने के अपने दृढ़ संकल्प की घोषणा की। इनमें उचित एमएसपी और खरीद की गारंटी देने वाला केंद्रीय कानून, बिजली संशोधन विधेयक को वापस लेना, लखीमपुर खीरी के कसाई अजय मिश्रा टेनी को कैबिनेट से हटाना और गिरफ्तारी, चार श्रम संहिताओं को निरस्त करना, निजीकरण के माध्यम से देश को बेचना बंद करना, डीजल, पेट्रोल, रसोई गैस और अन्य आवश्यक वस्तुओं की कीमतों को आधा करना, मनरेगा के तहत काम के दिनों और मजदूरी को दोगुना करना और इसे शहरी क्षेत्रों में विस्तारित करना शामिल था। 27 अक्टूबर को पुणे से शुरू हुई लखीमपुर खीरी शहीदों की शहीद कलश यात्रा ने पिछले एक महीने में महाराष्ट्र के 30 से अधिक जिलों की यात्रा की। आज सुबह, शहीद कलश यात्रा हुतात्मा चौक पहुँची, जो 1950 के दशक में संयुक्त महाराष्ट्र संघर्ष के 106 शहीदों को याद करता है। इसके बाद आजाद मैदान में महापंचायत के ठीक बाद शाम करीब 4 बजे एक विशेष कार्यक्रम में लखीमपुर खीरी नरसंहार के शहीदों की अस्थियां गेट-वे ऑफ इंडिया के पास अरब सागर में विसर्जित की गईं।

केंद्रीय मंत्री श्री नरेंद्र सिंह की मीडिया टिप्पणियां विरोध करने वाले किसानों के लिए सही या पर्याप्त प्रतिक्रियाएँ नहीं हैं। उनका यह कहना गलत और अनुचित है कि पीएम द्वारा घोषित समिति के गठन के साथ, “किसानों की एमएसपी पर मांग पूरी हो गई है”। यह दावा करना सर्वथा अनुचित और अतार्किक है कि “फसल विविधीकरण, शून्य-बजट खेती, और एमएसपी प्रणाली को अधिक पारदर्शी और प्रभावी बनाने के मुद्दों पर विचार-विमर्श करने के लिए” एक समिति से एमएसपी पर किसानों की मांग को पूरी हो गई है। श्री तोमर यह दावा करने में भी गलत हैं कि “केंद्र ने किसानों द्वारा पराली जलाने को अपराध से मुक्त करने की किसान संगठनों की मांग को भी स्वीकार कर लिया है”। जैसा कि एसकेएम द्वारा बताया गया है, “राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र और आस-पास के क्षेत्रों में वायु गुणवत्ता प्रबंधन आयोग अधिनियम 2021” में पर्यावरण मुआवजा के नाम से एक नई धारा 15 जारी है, जिसमें कहा गया है कि “आयोग, पराली जलाने से वायु प्रदूषण करने वाले किसानों से ऐसी दर से और इस तरह से पर्यावरणीय मुआवजे को वसूल कर सकता है, जैसा कि निर्धारित किया जा सकता है”, भले ही इसे “दंड” न कहा जाए।
कृषि मंत्री बिजली संशोधन विधेयक 2021 पर भी चुप थे, जो कल से शुरू होने वाले संसद के शीतकालीन सत्र के लिए सूचीबद्ध है। महत्वपूर्ण बात यह है कि श्री तोमर ने कहा कि किसानों के खिलाफ दर्ज मामलों को वापस लेना और आंदोलन के शहीदों को मुआवजा भी राज्य सरकारों के मामले हैं, और वे इन मामलों पर फैसला करेंगे। इन दोनों मुद्दों पर पंजाब सरकार ने पहले से ही प्रतिबद्धता जाहिर की है। यह देखते हुए कि अन्य सभी राज्य भाजपा शासित राज्य हैं, और यह देखते हुए कि आंदोलन भारत की भाजपा शासित सरकार के किसान विरोधी नीतियों के कारण उत्पन्न हुआ, यह महत्वपूर्ण है कि जिम्मेदारी केंद्र सरकार की होनी चाहिए, यह सुनिश्चित करने के लिए कि भाजपा शासित राज्य इस प्रतिबद्धता का पालन करें। मंत्री अजय मिश्रा टेनी की गिरफ्तारी और बर्खास्तगी के लिए एसकेएम की ओर से लखीमपुर खीरी नरसंहार संबंधी मांग पर भी चुप रहे। मोदी सरकार के मंत्री के अनैतिक बचाव की एसकेएम फिर से निंदा करता है। पिछले 12 महीनों में अब तक किसान आंदोलन की मांगों को पूरा करने के लिए कम से कम 686 किसानों ने अपने प्राणों की आहुति दे दी। हरियाणा के किसान नेताओं का अनुमान है कि पिछले एक साल में शांतिपूर्ण विरोध प्रदर्शन के लिए लगभग 48000 किसानों को कई पुलिस मामलों में फंसाया गया है। कई पर देशद्रोह और हत्या के प्रयास, दंगा आदि जैसे गंभीर आरोप हैं। उत्तर प्रदेश, चंडीगढ़, उत्तराखंड, दिल्ली और मध्य प्रदेश में भी इस संघर्ष के तहत किसानों के खिलाफ मामले दर्ज किए गए हैं। पंजाब में मुख्यमंत्री चरणजीत सिंह चन्नी ने घोषणा की थी कि उनकी सरकार अब तक दर्ज सभी मामलों को वापस लेगी।
इस पृष्ठभूमि में, एसकेएम यह भी स्पष्ट करता है कि किसानों के साथ बातचीत को फिर से शुरू किए बिना, केंद्र सरकार अलोकतांत्रिक, एकतरफा तरीके से किसानों के विरोध को समाप्त करने की उम्मीद नहीं कर सकती है।
कल एक ऐतिहासिक दिन होगा, जब भारत सरकार इस निरसन विधेयक के साथ विरोध कर रहे किसानों की प्रमुख मांगों में से एक को स्वीकार करेगी। कल, केंद्रीय कृषि और किसान कल्याण मंत्री श्री नरेंद्र सिंह तोमर ‘कृषि कानून निरसन विधेयक 2021’ को विचार करने और पारित करने के लिए पेश करेंगे। यह मूल्य आश्वासन और कृषि सेवाओं पर किसान (सशक्तिकरण और संरक्षण) समझौता अध्यादेश, 2020, किसान उपज व्यापार और वाणिज्य (संवर्धन और सुविधा) अध्यादेश, 2020, आवश्यक वस्तु अधिनियम, 1955 में संशोधन करने के लिए आवश्यक वस्तु (संशोधन) अधिनियम, 2020 को निरस्त करने वाला एक विधेयक है। यह ध्यान देने योग्य है कि 2021 का यह विधेयक संख्या 143, जो 2020 में बनाए गए कानूनों, जिसके कारण भारत के किसानों द्वारा भारी ऐतिहासिक विरोध किया गया, की वापसी का प्रयास के लिए है, अपने उद्देश्यों और कारणों के विवरण में कानूनों का डटकर बचाव करता है और केवल एक समूह के किसानों के विरोध का उल्लेख करता है। यह निरसन को आजादी का अमृत महोत्सव के ‘समावेशी विकास और विकास के पथ पर सभी को एक साथ ले जाने की समय की आवश्यकता’ के साथ जोड़ता है।
भारत के किसान संघर्ष के समर्थन में दुनिया भर में अलग-अलग जगहों पर विरोध प्रदर्शन हो रहे हैं। लंदन में भारतीय उच्चायोग में विरोध के बाद, संयुक्त राज्य अमेरिका में विन्निपेग के मैनिटोबा में विरोध प्रदर्शन हुआ।
किसानों के आंदोलन को आगे बढ़ाने और इसे अभूतपूर्व बनाने वाले असाधारण और दृढ़निश्चयी प्रदर्शनकारियों के बारे में हर दिन नई कहानियां सामने आ रही हैं। पंजाब के लुधियाना के 25 वर्षीय रतनदीप सिंह 26 नवंबर को पहली वर्षगांठ मनाने के लिए सिंघू बॉर्डर पहुंचे – वे पूरी तरह से व्हीलचेयर पर आश्रित हैं। कई प्रदर्शनकारी ऐसे हैं, जिन्होंने पूरा एक साल मोर्चा में बिताया है। लुधियाना के 86 वर्षीय निश्तार सिंह ग्रेवाल उनमें से एक हैं। 70 साल के गुरदेव सिंह और 63 साल के साधु सिंह कचरवाल भी पिछले 365 दिन सिंघू बॉर्डर पर बिता चुके हैं। कल हरियाणा में जजपा विधायक के खिलाफ धरना प्रदर्शन किया गया। विधायक देवेंद्र बबली ने रतिया में अपना कार्यक्रम रद्द कर दिया, जब एक स्थानीय कार्यक्रम में उनके शामिल होने की सूचना मिलते ही किसानों का एक बड़ा समूह काले झंडे के साथ विरोध में इकट्ठा हो गया।

*जारीकर्ता* –बलबीर सिंह राजेवाल, डॉ दर्शन पाल, गुरनाम सिंह चढूनी, हन्नान मोल्ला, जगजीत सिंह डल्लेवाल, जोगिंदर सिंह उगराहां, शिवकुमार शर्मा (कक्का जी), युद्धवीर सिंह, योगेंद्र यादव
*संयुक्त किसान मोर्चा*

Ramswaroop Mantri

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